देहरादून, 8 अगस्त। मैं और मेरे नौ साथी जवान धराली आपदा के बाद राहत और बचाव कार्य के लिए आया था। लेकिन अचानक मलबा गिरा और मैं और मेरे साथी जवान भागीरथी के सैलाब में बह गए थे। मेरी दोनों बहनों की दुआओं का असर है कि मेरी जान बच गई, लेकिन मेरी टुकड़ी के नौ जवान अभी भी लापता हैं… यह कहना है आपदा में सुरक्षित बचे अग्निवीर सोनू सिंह का।
उत्तर प्रदेश के बलिया के रहने वाले सोनू ने बताया कि उनकी बहनें उन्हें बार-बार फोन करके रक्षाबंधन पर घर आने के लिए कह रही थीं लेकिन उन्हें छुट्टी नहीं मिल पाई थी। जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती सोनू ने बताया कि 5 अगस्त को धराली में आई आपदा की सूचना पर उनकी 18 जवानों की टुकड़ी को राहत और बचाव कार्य के लिए भेजा गया था। जैसे ही हम हर्षिल नाला पार कर रहे थे अचानक मलबा आ गिरा।
सोनू ने कहा, मुझे लगा कि अब मैं नहीं बच सकूंगा लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। मलबा बहाकर भागीरथी नदी की ओर ले गया। बहते हुए पत्थरों से टकराने से मेरे शरीर पर कई जगह चोटें आईं लेकिन इस दौरान मैंने एक पेड़ को पकड़ लिया। करीब डेढ़ घंटे तक मैं मलबे में फंसा रहा। सेना की एक दूसरी टुकड़ी मुझे ढूंढते हुए वहां पहुंची और मुझे बाहर निकाला।
नौ जवान अभी भी लापता
सोनू ने बताया कि उनकी टुकड़ी के नौ जवान अब भी लापता हैं जिनमें एक सूबेदार और एक हवलदार भी शामिल हैं। फिलहाल सोनू सिंह जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं।