
देहरादून, 6 जनवरी। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर मंगलवार को उत्तराखंड की राजनीति अचानक गरमा गई, देर शाम उर्मिला सनावर को देहरादून में गांधी पार्क के पास देखा गया। दिन में फेसबुक पर दिल्ली से देहरादून के लिए रवाना होने का वीडियो पोस्ट कर चुकीं उर्मिला सनावर ने दावा किया था कि उनके पास अंकिता भंडारी मामले से जुड़े अहम सबूत हैं और वह इन्हीं के साथ उत्तराखंड आ रही हैं।
प्रदेश में सियासी सरगर्मियां तेज
वीडियो के वायरल होते ही प्रदेश में सियासी सरगर्मियां तेज हो गईं और देर शाम तक उनके हरिद्वार या देहरादून पहुंचने को लेकर कयासबाजी चलती रही। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच देहरादून और हरिद्वार पुलिस ने उर्मिला सनावर की मौजूदगी से अनभिज्ञता जताई और इंटरनेट मीडिया पर चल रही चर्चाओं को अफवाह करार दिया।
गांधी पार्क के पास दिखी उर्मिला
इसी बीच रात करीब साढ़े नौ बजे उर्मिला सनावर को गांधी पार्क के पास राजपुर रोड की ओर जाती हुई अर्टिगा कार में देखा गया। उनके साथ एक अन्य वाहन में स्वामी दर्शन भारती भी मौजूद बताए गए। हैरानी की बात यह रही कि आम लोगों और कुछ पत्रकारों ने उर्मिला को पहचान लिया, जबकि पुलिस लगातार उनके देहरादून में होने से इन्कार करती रही।
पत्रकारों ने गाड़ी को रोककर किए सवाल
कनक चौक के पास अचानक जाम की स्थिति बन गई, जहां कुछ पत्रकारों ने उर्मिला की गाड़ी को रोककर सवाल किए। इस दौरान उर्मिला सनावर ने कहा कि वह उत्तराखंड पहुंच चुकी हैं, लेकिन अभी न तो पुलिस से मिली हैं और न ही किसी से औपचारिक मुलाकात हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह स्वामी दर्शन भारती के साथ हैं और बुधवार को सार्वजनिक रूप से पूरे मामले पर अपनी बात रखेंगी।
दोहराया, सभी सबूत हैं मेरे पास
उर्मिला ने दोहराया कि उनके पास अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़े सभी सबूत हैं और वह अंकिता को न्याय दिलाने के उद्देश्य से ही उत्तराखंड आई हैं। घटना को लेकर एक और चर्चा का विषय उनकी अर्टिगा कार बना, जिस पर टेंपरेरी नंबर होने के बावजूद सरकारी नेम प्लेट लगे होने की बात कही जा रही है। इससे राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। साथ ही, पुलिस की सक्रियता और सूचना तंत्र पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
वीडियो में बोली ‘जय श्री राम’…
इधर, दिन में जारी उर्मिला सनावर के फेसबुक वीडियो ने भी सियासी हलकों में अलग ही बहस छेड़ दी। वीडियो में ‘जय श्री राम’, ‘जय बदरी विशाल’ और ‘जय केदार’ जैसे उद्बोधनों के साथ देवभूमि और अयोध्या का उल्लेख किया गया है। इसे लेकर विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने हिसाब से निहितार्थ निकाल रहे हैं।



