
गोपेश्वर, 23 जनवरी। शुक्रवार को बसंत पंचमी के मौके पर नंदा सिद्धपीठ कुरूड़ से नंदा की बड़ी जात निकालने की घोषणा कर दी गई है। 5 सितम्बर को बड़ी जात का आगाज होगा।विश्व की सबसे लंबी पैदल धार्मिक यात्रा नंदा देवी राजजात को लेकर चल रहा विवाद अब लगभग समाप्त हो गया है। बड़ी जात यात्रा समिति ने बाकायदा मां नंदा की बड़ी जात का 21 दिन का यात्रा कार्यक्रम भी घोषित कर दिया है।
मां नंदा के मंदिर में बड़ी जात इसी वर्ष 2026 में आयोजित कराने का फैसला लिया गया है। 5 सितंबर को नंदा अपने सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर से कैलाश के लिए विदा होगी। मां नंदा ने अपने मुख्य अवतारी पुरुष पर अवतरित होकर इसी वर्ष कैलाश जाने की इच्छा जताई।
इसके बाद गौड़ ब्राह्मणों ने बड़ी जात आयोजन का दिनपट्टा तय किया। बता दें कि श्रीनंदा देवी राजजात समिति ने इस साल यात्रा स्थगित करते हुए 2027 में कराने का फैसला लिया था। इसके बाद कुरुड़ मंदिर समिति ने महापंचायत कर मां नंदा की बड़ी जात को 2026 में ही कराने का ऐलान कर दिया। जिसको लेकर विवाद की स्थिति बन गई थी।
महापंचायत ने 23 जनवरी को वसंत पंचमी पर्व पर कुरुड़ में मां नंदा के सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर में बड़ी जात के शुभारंभ का मुहुर्त निकालने का निर्णय लिया गया था। जिसके अनुसार ही आज वसंत पंचमी पर्व पर शुक्रवार को मां नंदा के सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर परिसर में नंदा की बड़ी जात का दिनपट्टा कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया था। मां नंदा ने अपने मुख्य अवतारी पुरुष पर अवतरित होकर इसी वर्ष कैलाश जाने की इच्छा जताई। इसके बाद गौड़ ब्राह्मणों ने बड़ी जात आयोजन का दिनपट्टा तय किया। इसी के साथ मां नंदा की बड़ी जात की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।
उधर श्रीनंदा देवी राजजात यात्रा 2027 में होगी। नंदा देवी मंदिर नौटी में राजकुंवर डॉ राकेश कुंवर ने घोषणा की कि 2027 की बसंत पंचमी को दिनपट्टा जारी होगा। एक साल में सरकार से व्यवस्था बनाने की मांग की गई। इस दौरान चमोली के डीएम और एसपी भी मौजूद रहे। हर 12 वर्ष में आयोजित होने वाली विश्व की सबसे लंबी पैदल धार्मिक यात्रा नंदा देवी राजजात करीब 280 किलोमीटर लंबी यात्रा लगभग 20 दिनों तक चलती है, जिसे हिमालयी महाकुंभ के नाम से भी जाना जाता है। जिसकी अगुवाई चौसिंगा यानी चार सींग वाला खाडू करता है। मान्यता है कि खाडू के जन्म के साथ ही राजजात का समय तय हो जाता है। इसे मां नंदा का प्रतिनिधि माना जाता है। यह यात्रा चमोली के नौटी गांव से शुरू होकर होमकुंड तक जाती है। जो कि हिमालय की सबसे कठिन और पैदल यात्रा मानी जाती है।
बधाण की नंदा का यह रहेगा रूट
5 सितम्बर – सिद्धपीठ कुरूड़ से चरबंग।
6 सितम्बर – चरंबग से कुंडबगड़ होते हुए मथकोट।
7 सितम्बर – मथकोट से धरगांव, नंदानगर होते हुए उस्तोली।
8 सितम्बर – उस्तोली से सरपाणी, लांखी होते हुए भेंटी।
9 सितम्बर – भेंटी से स्यांरी बंगाली होते हुए डुंग्री।
10 सितम्बर – डुंग्री से केरा, मैन होते हुए सूना।
11 सितम्बर – सूना से थराली, राड़ीबगड़ होते हुए चेपड़ो।
12 सितम्बर – चेपड़ों से कोठी होते हुए नंदकेशरी। (गढ़वाल तथा कुमाऊं की राज छंतोलियों का मिलन)।
13 सितम्बर – नंदकेशरी से पूर्णा, देवाल, इच्छोली, हाट होते हुए फल्दियागांव।
14 सितम्बर – फल्दियागांव से कांडई, लबू, ल्वाणी, बगडीगाढ़ होते हुए मुंदोली।
15 सितम्बर – मुंदोली से लोहाजंग, कार्तिकबगड़, देवी लाटू मिलन वाण।
16 सितम्बर – वाण से रणकधार होते हुए गैरोलीपातल।
17 सितम्बर – गैरोलीपातल से डोलीधार होते हुए बेदनी।
18 सितम्बर – बेदनी में नंदा सप्तमी पूजा के बाद पातर नचैणियां।
19 सितम्बर – पातर नचैणियां से कलवा बिनायक, रूपकुंड, ज्यूंरागली-शिलासमुंद्र।
20 सितम्बर – शिलासमुद्र से पंचगंगा, होमकुंड़ में बड़ी जात और जामुनडाली।
21 सितम्बर – जामुनडाली से तातड़ा होते हुए सुतोल।
22 सितम्बर – सतोल से कनोल होते हुए वाण।
23 सितम्बर – वाण से कुलिंग।
24 सितम्बर – कुलिंग से बगडीगाढ़ होते हुए ल्वाणी।
25 सितम्बर – ल्वाणी से उलंग्रा।
26 सितम्बर – उलंग्रा से हाट होते हुए वेराधार।
27 सितम्बर – वेराधार से टुनरी होते हुए गोठिंडा।
28 सितम्बर – गोठिंडा से कुनीपार्था होते हुए कुराड़।
29 सितम्बर – सगवाड़ा से डांखोली।
30 सितम्बर – डांखोली से भेटा होते हुए नंदादेवी सिद्धपीठ देवराड़ा में छह माह का प्रवास।
5 सितम्बर – सिद्धपीठ कुरूड़ से चरबंग।
6 सितम्बर – चरंबग से कुंडबगड़ होते हुए मथकोट।
7 सितम्बर – मथकोट से धरगांव, नंदानगर होते हुए उस्तोली।
8 सितम्बर – उस्तोली से सरपाणी, लांखी होते हुए भेंटी।
9 सितम्बर – भेंटी से स्यांरी बंगाली होते हुए डुंग्री।
10 सितम्बर – डुंग्री से केरा, मैन होते हुए सूना।
11 सितम्बर – सूना से थराली, राड़ीबगड़ होते हुए चेपड़ो।
12 सितम्बर – चेपड़ों से कोठी होते हुए नंदकेशरी। (गढ़वाल तथा कुमाऊं की राज छंतोलियों का मिलन)।
13 सितम्बर – नंदकेशरी से पूर्णा, देवाल, इच्छोली, हाट होते हुए फल्दियागांव।
14 सितम्बर – फल्दियागांव से कांडई, लबू, ल्वाणी, बगडीगाढ़ होते हुए मुंदोली।
15 सितम्बर – मुंदोली से लोहाजंग, कार्तिकबगड़, देवी लाटू मिलन वाण।
16 सितम्बर – वाण से रणकधार होते हुए गैरोलीपातल।
17 सितम्बर – गैरोलीपातल से डोलीधार होते हुए बेदनी।
18 सितम्बर – बेदनी में नंदा सप्तमी पूजा के बाद पातर नचैणियां।
19 सितम्बर – पातर नचैणियां से कलवा बिनायक, रूपकुंड, ज्यूंरागली-शिलासमुंद्र।
20 सितम्बर – शिलासमुद्र से पंचगंगा, होमकुंड़ में बड़ी जात और जामुनडाली।
21 सितम्बर – जामुनडाली से तातड़ा होते हुए सुतोल।
22 सितम्बर – सतोल से कनोल होते हुए वाण।
23 सितम्बर – वाण से कुलिंग।
24 सितम्बर – कुलिंग से बगडीगाढ़ होते हुए ल्वाणी।
25 सितम्बर – ल्वाणी से उलंग्रा।
26 सितम्बर – उलंग्रा से हाट होते हुए वेराधार।
27 सितम्बर – वेराधार से टुनरी होते हुए गोठिंडा।
28 सितम्बर – गोठिंडा से कुनीपार्था होते हुए कुराड़।
29 सितम्बर – सगवाड़ा से डांखोली।
30 सितम्बर – डांखोली से भेटा होते हुए नंदादेवी सिद्धपीठ देवराड़ा में छह माह का प्रवास।
दशोली की नंदा का रूट मैप
5 सितम्बर – सिद्धपीठ कुरूड़ से धरगांव होते हुए कुमजुग।
6 सितम्बर – कुमजुग से कुंडबगड़ होते हुए लुणतरा।
7 सितम्बर – लुणतरा से कांडा, खुनाणा, लामसोड़ा, माणखी, चोपड़ाकोट होते हुए कांडई।
8 सितम्बर – कांडई से खलतरा, मोठा, चाका होते हुए सेमा।
9 सितम्बर – सेमा से बैराशकुंड, इतमोली, घुवड़खेत होते हुए मटई ग्वाड़।
10 सितम्बर – मटई ग्वाड से दाणू मंदिर होते हुए पगना।
11 सितम्बर – पगना से भौंधार, चरबंग होते हुए ल्वाणी।
12 सितम्बर – ल्वाणी से सुंग, बौंटाखाल होते हुए रामणी।
13 सितम्बर – रामणी से कासमातोली, घूनी, पडेरगांव, बूरा होते हुए आला।
14 सितम्बर – आला से जोखना, सितेल होते हुए कनोल।
15 सितम्बर – कनोल से वाण। (लाटू व सभी देवडोलियों का मिलन)।
16 सितम्बर – वाण से गैरोलीपातल।
17 सितम्बर – गैरोलीपातल से होते हुए बेदनी।
18 सितम्बर – बेदनी में अमुकता भरणी नंदा सप्तमी पूजा के बाद पातर नचैणियां।
19 सितम्बर – पातर नचैणियां से कलवा विनायक, रूपकुंड, ज्यूंरागली होते हुए शिलासमुद्र।
20 सितम्बर – शिला समुंद्र से पंचगंगा, त्रिशूली, होमकुंड होते हुए जामुनडाली।
21 सितम्बर – जामुनडाली से तातडा, द्योसिंगधाम होते हुए सुतोली।
22 सितम्बर -सुतोल से फरखेल।
23 सितम्बर -फरखेत से कुरूड़ नंदाधाम।
5 सितम्बर – सिद्धपीठ कुरूड़ से धरगांव होते हुए कुमजुग।
6 सितम्बर – कुमजुग से कुंडबगड़ होते हुए लुणतरा।
7 सितम्बर – लुणतरा से कांडा, खुनाणा, लामसोड़ा, माणखी, चोपड़ाकोट होते हुए कांडई।
8 सितम्बर – कांडई से खलतरा, मोठा, चाका होते हुए सेमा।
9 सितम्बर – सेमा से बैराशकुंड, इतमोली, घुवड़खेत होते हुए मटई ग्वाड़।
10 सितम्बर – मटई ग्वाड से दाणू मंदिर होते हुए पगना।
11 सितम्बर – पगना से भौंधार, चरबंग होते हुए ल्वाणी।
12 सितम्बर – ल्वाणी से सुंग, बौंटाखाल होते हुए रामणी।
13 सितम्बर – रामणी से कासमातोली, घूनी, पडेरगांव, बूरा होते हुए आला।
14 सितम्बर – आला से जोखना, सितेल होते हुए कनोल।
15 सितम्बर – कनोल से वाण। (लाटू व सभी देवडोलियों का मिलन)।
16 सितम्बर – वाण से गैरोलीपातल।
17 सितम्बर – गैरोलीपातल से होते हुए बेदनी।
18 सितम्बर – बेदनी में अमुकता भरणी नंदा सप्तमी पूजा के बाद पातर नचैणियां।
19 सितम्बर – पातर नचैणियां से कलवा विनायक, रूपकुंड, ज्यूंरागली होते हुए शिलासमुद्र।
20 सितम्बर – शिला समुंद्र से पंचगंगा, त्रिशूली, होमकुंड होते हुए जामुनडाली।
21 सितम्बर – जामुनडाली से तातडा, द्योसिंगधाम होते हुए सुतोली।
22 सितम्बर -सुतोल से फरखेल।
23 सितम्बर -फरखेत से कुरूड़ नंदाधाम।



