
देहरादून, 25 फरवरी। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के साथ हुई मारपीट के बाद शासकीय कार्यालयों की सुरक्षा और अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी गई है. इसके तहत सरकारी कार्यालय को लेकर कई ऐसे नियम बनाए गए हैं जिनका अब संबंधित परिक्षेत्र में पालन करना होगा.
उत्तराखंड में प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद राज्य सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है. सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर लागू कर दी गई है. इस एसओपी का उद्देश्य कार्यस्थल पर बाहरी आक्रामकता, अनावश्यक दबाव, दुर्व्यवहार या हिंसा की घटनाओं को रोकना और लोक सेवकों को सुरक्षित कार्य वातावरण प्रदान करना है.
क्यों लागू की गयी सरकारी दफ्तरों के SOP
नई SOP विधानसभा और सचिवालय को छोड़कर राज्य के सभी शासकीय कार्यालयों में लागू होगी. हालांकि, संबंधित विभागीय सचिव स्तर पर इसके लिए अलग से अधिसूचना जारी की जाएगी. यह नियम केवल आम जनता पर ही नहीं, बल्कि निजी ठेकेदारों, जनप्रतिनिधियों, उनके समर्थकों और व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारियों सहित सभी आगंतुकों (विजिटर्स) पर समान रूप से लागू होंगे. एसओपी के तहत अब सरकारी कार्यालयों में प्रवेश पूरी तरह नियंत्रित रहेगा. सभी कर्मचारियों के लिए पहचान पत्र धारण करना अनिवार्य किया गया है. बिना आईडी कार्ड के कार्यालय परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी.
आम जनता के वाहनों का कार्यालय परिसर में प्रवेश प्रतिबंधित
आम जनता के वाहनों का कार्यालय परिसर में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा. मुख्य प्रवेश द्वार पर डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर लगाए जाएंगे और आगंतुकों की जांच के बाद ही उन्हें अंदर जाने दिया जाएगा. किसी भी विशिष्ट व्यक्ति या महानुभाव को भी बिना पूर्व अनुमति परिसर में प्रवेश की छूट नहीं होगी. सुरक्षा चौकी पर एक फोटोयुक्त नो एंट्री पंजिका भी रखी जाएगी, जिसमें दुर्व्यवहार या हिंसा के दोषी व्यक्तियों का रिकॉर्ड दर्ज होगा. ऐसे व्यक्तियों का दोबारा परिसर में प्रवेश रोका जा सकेगा.
मुलाकात के लिए पूर्व अनुमति अनिवार्य
अब किसी भी व्यक्ति को अधिकारी से मिलने के लिए पहले से समय लेना अनिवार्य होगा. बिना अपॉइंटमेंट किसी को भी सीधे अधिकारी कक्ष में प्रवेश नहीं मिलेगा. साथ ही एक समय में अधिकतम दो व्यक्तियों को ही किसी अधिकारी के कमरे में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी. यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि भीड़भाड़, दबाव या सामूहिक आक्रामकता जैसी स्थितियों से बचा जा सके और अधिकारी बिना भय के अपना कार्य कर सकें.
प्रवेश द्वारों पर सीसीटीवी लगाने के निर्देश
सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए एसओपी में सीसीटीवी कैमरे लगाने के निर्देश दिए गए हैं. कार्यालय के प्रवेश द्वार, गलियारों और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी कैमरे लगाए जाएंगे. इसके अतिरिक्त अधिकारियों की डेस्क के नीचे या रिसेप्शन क्षेत्र में गुप्त साइलेंट पैनिक अलार्म लगाने की भी व्यवस्था की जाएगी. आपात स्थिति में अधिकारी इस अलार्म का उपयोग कर सकेंगे, जिससे तुरंत सुरक्षा कर्मियों को सूचना मिल जाएगी और समय रहते हस्तक्षेप संभव हो सकेगा.



