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चमोली में टनल धंसने के 6 दिन बाद खत्म हुआ रेस्क्यू अभियान, कुल 10 मजदूरों की मौत, 12 घायल

गोपेश्वर, 18 अगस्त, 26. हाट-सियासैंण (पीपलकोटी) स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में 13 अगस्त को हुई दुर्घटना के बाद दोनों लापता श्रमिकों के शव बरामद कर लिए गए हैं। मंगलवार को रेस्क्यू अभियान के दौरान दोनों श्रमिक के शव को टनल से बाहर निकाला गया, जिन्हें तत्काल जिला चिकित्सालय, गोपेश्वर भेजा गया। कुल 10 शव मिल चुके हैं। हादसे में 12 घायल हैं। लापता सभी के शव बरामद होने के साथ रेस्क्यू अभियान भी समाप्त कर दिया गया है।

मंगलवार को टनल से दो मजदूरों के शव निकाले गए. इनकी पहचान झारखंड के खूंटी जिले के रहने वाले 31 वर्षीय लुकास टोपनो और छत्तीसगढ़ निवासी चेतन पोयाम के रूप में हुई है.

ये हादसा 13 अगस्त 2026 की शाम को टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (THDC) की निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की सुरंग में भूस्खलन के कारण हुआ था. मलबे और पानी के अचानक भरने से 3 किलोमीटर लंबी सुरंग में कुल 22 लोग फंस गए थे.

घटना के तुरंत बाद से ही जिला प्रशासन, पुलिस, NDRF और SDRF की टीमों ने संयुक्त रूप से युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया था. जिसके बाद 12 लोगों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था.

हादसे में घायल हुए 12 मजदूरों को इलाज के लिए तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वहीं, आखिरी लापता मजदूर का शव मिलते ही उसे पोस्टमार्टम और आगे की औपचारिकताओं के लिए जिला चिकित्सालय गोपेश्वर भेज दिया गया है.

कीचड़ और पानी निकासी के बीच चला सर्च ऑपरेशन
टनल के भीतर कई फीट तक मलबा और पानी जमा हो गया था, जिससे बचाव दल को अंदर दाखिल होने में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा. मलबे को हटाने और पानी निकालने के लिए बड़े सक्शन पंपों और एडवांस टूल्स की मदद ली गई. दिन-रात चले इस अभियान में टीमों ने टनल के कोने-कोने में सर्च ऑपरेशन चलाया.

इसके साथ ही चमोली के जिला सूचना अधिकारी धीरज कार्की ने बताया कि टनल में फंसी पांच में से तीन जेसीबी मशीनों को बाहर निकाल लिया गया था, जिससे रेस्क्यू कार्य में तेजी आई. बाकी फंसी दो मशीनों को भी जल्द बाहर निकाल लिया जाएगा.

प्रशासन की सतर्कता से पूरा हुआ अभियान
जिला प्रशासन और सभी संबंधित विभागों ने आपस में बेहतर तालमेल बनाकर इस जोखिम भरे रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया. अधिकारियों लगातार मौके पर मौजूद रहकर स्थिति की निगरानी की कर रहे थे, ताकि राहत कार्य में किसी संसाधन की कमी न आए. अब आखिरी मजदूर बरामद होने के साथ ही बीते कई दिनों से जारी रेस्क्यू ऑपरेशन अब खत्म हो गया है.

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