
हरिद्वार, 18 सितंबर, 26. देशभर में बहुचर्चित रहे निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सुरेंद्र कोली के सुसाइड करने बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया है। आइए बताते हैं कि निठारी कांड में कब-कब क्या हुआ है? सुप्रीम कोर्ट ने बहुचर्चित निठारी कांड के आरोपी मोनिंदर पंधेर के बाद सुरेंद्र कोली को भी दोषमुक्त कर दिया था। निठारी कांड में उच्चतम न्यायालय से बीते वर्ष दोषमुक्त सुरेंद्र कोली आत्महत्या के पीछे बड़ा रहस्य छोड़ गया। बीती रात उसने फोन कर पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत को बताया था कि खोखा स्वामी उसे रुपयों के लिए परेशान कर रहा है और अगली सुबह उसने दुनिया ही छोड़ दी।
चाय की दुकान में लगा ली फांसी

शहर कोतवाली की सप्त ऋषि पुलिस चौकी पर सूचना मिली कि सप्त सरोवर रोड लालमाता मंदिर के सामने चाय की दुकान में फांसी लगा ली है। पुलिस मौके पर पहुंची और मृतक की फचाम सुरेंद्र कोली निवासी ग्राम मंगरुखाल, भिकियासेड़ अल्मोड़ा के रूप में कराई। शहर कोतवाल कुंदन सिंह राणा ने बताया कि सुरेंद्र कोली निठारी कांड में आरोपित रहा है। शुरुआती जांच में पता चला है कि वह कुछ महीनो से हरिद्वार में रह रहा था और चाय का खोखा किराए पर लेकर चला रहा था। दुकान से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, हर एंगल से मामले की जांच की जा रही है।
सुरेंद्र कोली की पारिवारिक हिस्ट्री
सुरेंद्र कोली चार भाइयों में दूसरे नंबर का था. उसके पिता शाकरू राम और मां कुंती देवी थीं. उसके बड़े भाई चंदन राम कोली और छोटे भाई हरीश कोली दिल्ली में रहते हैं. सबसे छोटे भाई आनंद राम कोली अपने परिवार के साथ मासी में रहते हैं. सुरेंद्र भी रोजगार के लिए गांव से दिल्ली गया था. उसकी शादी शांति देवी से हुई थी. निठारी कांड में नाम आने और जेल जाने के समय उसकी एक बेटी थी, जबकि उसका बेटा उस समय पत्नी के गर्भ में था. सुरेंद्र कोली उत्तराखंड के अल्मोड़ा के पास एक गांव का रहने वाला था। उसका परिवार बेहद गरीब था। 26 साल पहले वह गांव में बकरियों की देख-रेख करता था। साल 2000 में उसकी मुलाकात दिल्ली निवासी ब्रिगेडियर से हुई। इसके बाद ब्रिगेडियर के साथ सुरेंद्र कोली दिल्ली चला आया था। 2003 में ब्रिगेडियर को दिल्ली से बाहर जाना पड़ा। इसके बाद सुरेंद्र कोली मोनिंदर सिंह पंधेर के संपर्क में आया। सुरेंद्र कोली नोएडा सेक्टर-31 स्थित डी-5 कोठी में काम करने लगा। वह अपनी पत्नी को उत्तराखंड से नोएडा ले आया था। 2004 में मोनिंदर का परिवार नोएडा से पंजाब चला गया था। बाद में कोली ने पत्नी को भी गांव भेज दिया।
अल्मोड़ा के मंगरुखाल से है कनेक्शन
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के स्याल्दे ब्लॉक के मंगरुखाल गांव निवासी सुरेंद्र कोली की जिंदगी करीब दो दशक तक जेल की चारदीवारी में गुजरी. निठारी कांड में नाम सामने आने के बाद वह लंबे समय तक जेल में रहा. नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से दोषमुक्त होने के बाद उसने हरिद्वार में रहकर सामान्य जिंदगी शुरू करने की कोशिश की. वह वहां छोटी सी चाय की दुकान चला रहा था. सामान्य जीवन शुरू करने के कुछ ही समय बाद उसकी मौत की खबर सामने आई.
बहू के घर छोड़ते ही फिर मां ने छोड़ दी दुनिया
2019 के आसपास सुरेंद्र की पत्नी सामाजिक तिरस्कार की डर से करीब 13 वर्षीय बेटे का भविष्य देख उसे लेकर गांव से चली गई थी। वह कहां है, किसी को नहीं पता। तब सुरेंद्र की मां कुंती देवी गांव में अकेली रह गई। वह कहती रही कि उसके गरीब बेटे को रसूखदारों ने बलि का बकरा बना दिया। बहू के जाने के कुछ ही माह बाद कुंती देवी ने भी दम तोड़ दिया।
गांव से नाता तोड़ दिया था तीनों भाइयों ने
सबसे छोड़ा भाई आनंद कोली प्राइवेट स्कूल में शिक्षक है। सुरेंद्र से बड़ा भाई चंदन व छोटा मंगत दिल्ली में रहता है। निठारी कांड में सुरेंद्र कोली की गिरफ्तारी के बाद तीनों भाइयों ने गांव से नाता तोड़ ही दिया था। पूर्व ग्राम प्रधान जोगा सिंह ने बताया कि सुरेंद्र कोली कुशल कारीगर था। हुनर का धनी था।
जेल में ही बेटे को पहली बार देखा
नारायण सिंह रावत के मुताबिक सुरेंद्र की मां और पत्नी की डासना जेल में उससे अंतिम मुलाकात हुई थी. तब सुरेंद्र कोली ने अपने बेटे का चेहरा देखने की इच्छा जताई थी. बाद में डासना जेल में मुलाकात के दौरान ही उसने पहली बार अपने बेटे को देखा.
जून में आखिरी बार गांव आया था सुरेंद्र
दोषमुक्त होने के बाद सुरेंद्र कोली जून में आखिरी बार अपने पैतृक गांव मंगरुखाल आया था. गांव में परिवार की ओर से पूजा-पाठ का कार्यक्रम रखा गया था. जिसमें चारों भाई शामिल हुए थे. ग्रामीणों के अनुसार इस दौरान सुरेंद्र का व्यवहार सामान्य रहा. उसने लोगों से बातचीत भी की. उसके गांव का पुश्तैनी मकान अब खंडहर में तब्दील हो चुका है. वह अपने छोटे भाई आनंद कोली के घर पर ठहरा था.
क्या था मामला
सीबीआइ विशेष अदालत ने सुरेंद्र कोली को नोएडा निठारी गांव में 15 वर्षीय नाबालिग लड़की के दुष्कर्म और हत्या के लिए दोषी ठहराया था। फरवरी 2011 में कोर्ट ने उसकी सजा बरकरार रखी थी। उसकी पुनर्विचार याचिका 2014 में खारिज कर दी गई थी। हालांकि, जनवरी 2015 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उसकी दया याचिका पर निर्णय में अत्यधिक देरी के कारण उसकी मृत्युदंड की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था।
2004-05 में रोजगार के सिलसिले में पहुंचा था दिल्ली
सुरेंद्र कोली अल्मोड़ा के मंगरूखाल का रहने वाला था। परिवार को आर्थिक तंगी से बाहर निकालने के लिए वहवर्ष 2004-05 में रोजगार के सिलसिले में दिल्ली गया था। दिल्ली में वह मनिंदर सिंह पंधेर के यहां नौकरी करने लगा। 2006 में निठारी हत्या व दुष्कर्म कांड सामने आया, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कर दिया था बरीब
ता दें कि साल 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया था। 2006 में निठारी हत्या व दुष्कर्म कांड सामने आया था। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुनाई थी। 2015 में न्यायालय ने फांसी की सजा में राहत देते हुए उम्रकैद सुनाई थी।
कब-कब क्या हुआ?
29 दिसंबर 2006: निठारी गांव में मोनिंदर सिंह पंधेर की कोठी के पीछे नाले से 19 बच्चों और महिलाओं के कंकाल मिले। मालिक मनिंदर सिंह पंधेर और उसका नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने जांच शुरू की।
11 जनवरी 2007: मामले की जांच सीबीआइ काे सौंपी गई। सीबीआई का पहला दल निठारी पहुंचा। कोठी के पास से 30 और हड्डियां बरामद कीं।
22 मई 2007 : सीबीआइ ने गाजियाबाद की अदालत में मामले में पहला आरोप पत्र दाखिल किया। मोनिंदर सिंह पंधेर पर हल्के आरोप लगाए गए। कोली पर दुष्कर्म, अपहरण और हत्या के आरोप लगाए गए।
13 फरवरी 2009: निठारी में सिलसिलेवार 19 हत्याओं में से एक 14 वर्षीय रिम्पा हालदार के साथ रेप और उसकी हत्या के लिए विशेष अदालत ने पंधेर तथा कोली को मौत की सजा सुनाई।
11 सितंबर 2009 : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंधेर को सुनाई गई मौत की सजा से से बरी किया।
20 जुलाई 2014: सुरेंद्र कोली की दया याचिका राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खारिज कर दी।
08 सितंबर 2014 : कोर्ट ने रात एक बजे कोली की फांसी पर रोक लगा दी, कोली की सजा उसी दिन होनी थी।
24 जुलाई 2017: कोली और पंधेर को 20 वर्ष की पिंकी सरकार की हत्या और बलात्कार के प्रयास में सीबीआइ अदालत ने दोषी ठहराया। दोनों के खिलाफ हत्या के 16 मामलों में से यह आठवां मामला है, इसमें फैसला सुनाया गया है।



