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बदरीनाथ में धार्मिक मर्यादा और पंरपरा तार-तार करने के आरोप, CM से हस्तक्षेप की मांग, DM ने लिया संज्ञान, video

देहरादून, 26 सितंबर, 26. बदरीनाथ धाम में आयोजित ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल’ विवादों में है. आरोप है कि कार्यक्रम में धार्मिक मर्यादा और पर्यावरण मानकों का ख्याल नहीं रखा गया. जिस पर उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत और ज्योतिर्मठ शंकराचार्य एवं संतों ने कार्यक्रम के स्वरूप व तेज ध्वनि पर आपत्ति जताई है. जबकि, पर्यावरणविद् ने भी हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए आयोजनों को लेकर सावधानी बरतने की बात कही है.

19-20 सितंबर को बदरीनाथ धााम में हुआ था रंगारंग आयोजन
गौर हो कि बीती 19-20 सितंबर को बदरीनाथ धाम में अराइवल प्लाजा पर ‘देवभूमि कल्चरल फेस्टिवल 2026 का रंगारंग आयोजन किया गया था. जिसका थीम ‘हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ था. जिसका मकसद संस्कृति, सीमा पर्यटन और स्थानीय आजीविका को मंच देना था. भारतीय सेना एवं जिला प्रशासन चमोली के संयुक्त तत्वावधान में महोत्सव का आयोजन हुआ था. इस सांस्कृतिक महोत्सव में उत्तराखंड की लोक संस्कृति की छटा देखने को मिली, लेकिन फेस्टिवल में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के स्वरूप, तेज डीजे संगीत पर ठुमके और मनोरंजन आधारित प्रस्तुति सवालों में आ गए

बदरीनाथ धाम में धार्मिक आयोजन के नाम पर होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों के स्वरूप, तेज ध्वनि और प्रस्तुति को लेकर उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत और ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य व संतों ने कड़ी आपत्ति जताई है. दोनों पक्षों का कहना है कि बदरीनाथ धाम की धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए यहां होने वाले कार्यक्रमों के स्वरूप पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, लेकिन इस पवित्र धाम की आध्यात्मिक गरिमा और शांत वातावरण का ख्याल नहीं रखा गया.

बदरिकाश्रम का उल्लेख विभिन्न पुराणों में भगवान नर-नारायण की तपस्थली के रूप में मिलता है.यह क्षेत्र ऋषि-मुनियों की साधना और तपस्या से जुड़ा रहा है. इसलिए यहां शांति और संयम को विशेष महत्व दिया गया है. बदरीनाथ क्षेत्र में शंख बजाने तक को लेकर धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है. इसके पीछे तपस्या में किसी प्रकार का व्यवधान न हो, ऐसी परंपरा का उल्लेख किया जाता है.
– स्वामी प्रत्यक्षचैतन्यमुकुंदानंद गिरि, दंडी संन्यासी

स्वामी प्रत्यक्षचैतन्यमुकुंदानंद गिरि ने कपाट खुलने से पहले आयोजित कार्यक्रमों पर भी सवाल उठाए हैं. उसका कहना है कि कपाट बंद रहने की अवधि में बदरीनाथ धाम से जुड़ी धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं का विशेष महत्व रहता है. इस अवधि में होने वाली मानवीय गतिविधियों और आयोजनों को लेकर व्यवस्था स्पष्ट होनी चाहिए.

बदरीनाथ धाम में परंपराएं टूट रही हैं. कपाट खुलने से पहले भी धाम में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए थे. हाल में भी कार्यक्रम आयोजित किए गए. जिसमें अनादिकाल से चली आ रही परंपराओं को ठेस पहुंचाने का काम किया गया, वो निंदनीय है. महापंचायत की मांग है कि बदरीनाथ धाम की धार्मिक, आध्यात्मिक और पौराणिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए भविष्य के आयोजनों के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए. ताकि, इस तरह के विवाद दोबारा सामने न आएं.
– बृजेश सती, महासचिव, उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग, DM ने लिया संज्ञान
ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य और संतों की ओर से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की गई है. जारी बयान में कहा गया है कि धार्मिक परंपराओं और मर्यादाओं के विपरीत होने वाली गतिविधियों पर प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए. साथ ही बदरीनाथ धाम और अन्य तीर्थ क्षेत्रों में तेज डीजे, शोर-शराबे और आपत्तिजनक प्रस्तुतियों पर रोक लगाने की मांग की गई है.

ज्योतिर्मठ पीठ और संतों ने ये भी मांग रखी है कि तीर्थ क्षेत्रों में बड़े निर्माण, नई योजनाओं या बड़े आयोजनों से पहले शंकराचार्य से परामर्श और मार्गदर्शन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, तो वहीं इस मामले पर चमोली जिला प्रशासन ने भी मामले का संज्ञान लिया है. इस कार्यक्रम से संबंधित लोगों को नोटिस जारी किया है.

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