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पहले दलेर मेहंदी को मंच पर टोका, अब विवाद बढ़ा तो मंत्री जी दे रहे हैं सफाई

देहरादून, 21 अक्टूबर, 26. उत्तराखंड में एक कार्यक्रम के दौरान पंजाबी गायक दलेर मेहंदी और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बीच हुए विवाद का मामला सुर्खियों में है. मामले में अब मंत्री उनियाल ने अपनी बात रखी है. दलेर मेहंदी को मंच पर टोकने और उनके प्रदर्शन पर सवाल उठाने को लेकर सुबोध उनियाल ने कहा कि उन्होंने कोई अपशब्द नहीं कहे.

उनका कहना है कि कलाकार को कार्यक्रम के लिए 35 लाख रुपए दिए गए थे, लेकिन वो ठीक से बोल भी नहीं पा रहे थे और न ही चल पा रहे थे. मंत्री उनियाल के मुताबिक, जब कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने सवाल उठाने शुरू किए, तो जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्हें खुद मंच पर जाना पड़ा.

एंकर को समझाने के बाद भी नहीं हुआ सुधार
कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान शुरुआत में एंकर के माध्यम से स्थिति को संभालने की कोशिश की गई थी. उन्होंने कहा कि एंकर को समझाया गया, लेकिन इसके बाद भी कलाकार की टीम की ओर से कोई खास सुधार नहीं हुआ. मंत्री उनियाल का कहना था कि पूरी टीम हाथ हिलाकर लिप-सिंक कर रही थी.

पूरी टीम केवल हाथ हिलाकर लिप-सिंक कर रही थी. ऐसे में मुझे लगा कि जिस कार्यक्रम के लिए इतनी बड़ी रकम खर्च की गई है, वहां दर्शकों को अपेक्षित प्रस्तुति नहीं मिल रही है. इसी वजह से मुझे खुद मंच पर जाकर हस्तक्षेप करना पड़ा.
-सुबोध उनियाल, कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड

सुबोध उनियाल का कहना है कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और दर्शकों की अपेक्षाएं भी थीं. ऐसे में उनकी जिम्मेदारी थी कि वो लोगों के सवालों का जवाब दें. उन्होंने अपने व्यवहार को कलाकार का अपमान करने की कोशिश मानने से इनकार किया. हालांकि, मंच पर हुई इस घटना के बाद कलाकार के सम्मान और सार्वजनिक कार्यक्रमों में प्रस्तुति की गुणवत्ता को लेकर बहस शुरू हो गई है.

35 लाख रुपए और होटल बुकिंग को लेकर क्या बोले मंत्री?
सुबोध उनियाल ने दलेर मेहंदी को किए गए भुगतान का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के लिए पूरी रकम पहले ही उनके खाते में डाल दी गई थी, जिसके बाद उन्होंने आने की सहमति दी थी. मंत्री उनियाल के मुताबिक, इसके बाद कलाकार की ओर से पूरे होटल की बुकिंग का खर्च देने की बात कही गई. यह रकम भी भेजी गई थी. मेरा कोई व्यक्तिगत मकसद नहीं था कि मैं दलेर मेहंदी को ठेस पहुंचाऊं. जब किसी कलाकार को कार्यक्रम के लिए बड़ी रकम दी जाती है, तो आयोजकों और दर्शकों की अपेक्षा होती है कि वो अपनी प्रस्तुति दें. मैंने इसी संदर्भ में अपनी नाराजगी जाहिर की थी।

वहीं, मंत्री सुबोध उनियाल की सफाई ऐसे समय आई है, जब इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा हो रही है और कलाकार के साथ किए गए व्यवहार पर सवाल उठाए जा रहे हैं. इसके अलावा स्थानीय कलाकारों को अवसर न देने के आरोप पर भी उन्होंने अपनी बात रखी.

9 दिन के मेले में 7 दिन स्थानीय कलाकारों को मौके
सुबोध उनियाल ने मेले के आयोजन और स्थानीय कलाकारों को दिए जाने वाले अवसरों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि मेला 9 दिन तक चलता है और इनमें से 7 दिन स्थानीय कलाकारों को मंच दिया जाता है. उनका कहना है कि आयोजन में स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देने का भी ध्यान रखा जाता है.

मंत्री उनियाल ने बताया कि पहले सुनंदा शर्मा को कार्यक्रम में बुलाया गया था, लेकिन तबीयत खराब होने के कारण वो नहीं आ सकीं. उनके मुताबिक, सुनंदा शर्मा ने इस स्थिति में पूरी रकम वापस कर दी थी. उन्होंने इसके जरिए यह बताने की कोशिश की कि कार्यक्रम में कलाकारों की भागीदारी और भुगतान को लेकर आयोजक गंभीरता से काम करते हैं.

कलाकार के सम्मान बनाम जनता के पैसे का सवाल
दलेर मेहंदी के साथ हुए विवाद ने अब कलाकार के सम्मान और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर खर्च होने वाले पैसे की जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक ओर सुबोध उनियाल का कहना है कि उन्होंने जनता के दबाव में जनप्रतिनिधि के तौर पर सवाल उठाया और उनका उद्देश्य किसी कलाकार का अपमान करना नहीं था.

दूसरी ओर दलेर मेहंदी के समर्थन में बॉलीवुड से जुड़े लोगों और गायक मीका सिंह की प्रतिक्रियाओं में उनकी सेहत का मुद्दा उठाया गया है. इन प्रतिक्रियाओं में कहा गया है कि दलेर मेहंदी की हाल ही में बड़ी हार्ट सर्जरी हुई है और वो नशा नहीं करते. ऐसे में विवाद के दो पहलू सामने आ रहे हैं.

पहला, कार्यक्रम के लिए भुगतान की गई रकम के बदले कलाकार की प्रस्तुति को लेकर आयोजकों और दर्शकों की अपेक्षाएं. दूसरा, कलाकार की सेहत और उसके साथ सार्वजनिक मंच पर किए जाने वाले व्यवहार का सवाल. फिलहाल, सुबोध उनियाल ने अपनी सफाई में स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य अपमान करना नहीं था, बल्कि कार्यक्रम में हो रही स्थिति पर सवाल उठाना था.

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