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प्रो. रमाकांत पाण्डेय को मिली उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति की जिम्मेदारी

देहरादून, 14 जनवरी। उत्तराखंड संस्कृत विवि के नए कुलपति पद पर नियुक्त कर दी गई है. केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर (राजस्थान) में निदेशक के पद पर कार्यरत प्रो. रमाकांत पाण्डेय को कुलपति बनाया गया है. इस संबंध में उत्तराखंड के राज्यपाल एवं कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने आदेश जारी कर दिए हैं. जारी किए गए आदेश के अनुसार, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार के कुलपति के पद के कार्य दायित्वों के लिए अस्थाई/अंतरिम व्यवस्था सम्बन्धी निर्गत आदेश संख्या-24077 दिनांक 23 अगस्त, 2025 को निरस्त कर दिया गया है.

उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में लागू उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा-12 की उपधारा (2) के अधीन कुलपति चयन के सम्बन्ध में गठित अन्वेषण समिति (Investigation committee) ने नाम प्रस्तुत किए थे. ऐसे में धारा-12 की उपधारा (1) में दिए गए प्रावधान के तहत प्रोफेसर रमाकांत पाण्डेय, निदेशक केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर, जयपुर (राजस्थान) को नियुक्त किया गया है. प्रो. रमाकांत पाण्डेय को कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से अगले तीन सालों की अवधि के लिए या फिर अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, तक की अवधि के लिए उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार का कुलपति नियुक्त किया गया है.

केंद्रीय विवि जयपुर में निदेशक पद कार्यरत थे
वर्तमान समय में प्रो. रमाकांत पाण्डेय, केंद्रीय संस्कृत विवि जयपुर परिसर में निदेशक पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. रमाकांत पाण्डेय को प्रोफेसर के रूप में 14 साल से अधिक का अनुभव है. जिसमें बतौर प्रोफेसर 10 साल और सीनियर प्रोफेसर 4 साल का अनुभव शामिल है. प्रोफेसर रमाकांत ने एम.ए. (संस्कृत), पीएचडी, डीलिट् की शिक्षा हासिल की है. इनको अध्यापन एवं शोध का 31 साल का अनुभव है. यही नहीं, इनको 15 साल का प्रशासनिक अनुभव भी है, जिसमें समन्वयक, दूरस्थ शिक्षा अध्ययन केंद्र- 02 साल, निदेशक एवं डीन, मुक्त स्वाध्याय पीठ (दूरस्थ शिक्षा संचालनालय)- 8 साल, निदेशक, भोपाल परिसर- 03 साल 04 माह, डीन भाषा, साहित्य एवं संस्कृति संकाय 02 सालों से लगातार), निदेशक, जयपुर परिसर एक नवंबर 2025 से वर्तमान समय तक प्रो. रमाकांत पाण्डेय के मार्गदर्शन में 25 छात्रों की पीएचडी पूरी हो चुकी हैं.

इसके साथ ही अभी तक प्रो. पांडेय की 65 पुस्तकें, 150 शोध पत्र और 22 साहित्यिक लेख प्रकाशित हो चुके हैं. इन्होंने सात शोध पत्रिकाओं का संपादन किया है. उनकी 27 पुस्तकें तमाम विवि में पढ़ाई जा रही हैं. वो 86 राष्ट्रीय, 15 अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी और 57 कार्यशाला में भी शामिल हो चुके हैं. विश्व के चार देशों, थाईलैंड, लंदन, आयरलैंड, नेपाल की यात्रा भी कर चुके हैं.

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