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कैबिनेट में उपनलकर्मियों को लेकर ठोस निर्णय न होने से कर्मचारियो ने भारी निराशा, सरकार को चेताया

देहरादून, 24 दिसम्बर। उत्तराखंड में उपनल कर्मचारियों का गुस्सा एक बार फिर सतह पर आ गया है. हालिया कैबिनेट बैठक में उपनलकर्मियों को लेकर कोई ठोस निर्णय न होने से कर्मचारियों में भारी निराशा हैं. सरकार से लंबे समय से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद लगाए बैठे उपनल कर्मचारी अब अपने भविष्य को लेकर गंभीर चिंता में हैं. सभी प्रदेश सरकार को जल्द फैसला लेने की चेतावनी दे रहे हैं.

कर्मचारियों के सब्र का बांध अब जवाब देेने वाला है
दरअसल पिछली कैबिनेट बैठक में भी उपनल कर्मियों के मुद्दे पर कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया था. इसके बावजूद कर्मचारियों को इस बार उम्मीद थी कि उनके पक्ष में कोई ठोस निर्णय लिया जाएगा, लेकिन जब कैबिनेट में आए मामलों की सूची सामने आई और उसमें उपनल कर्मचारियों से जुड़ा कोई प्रस्ताव शामिल नहीं दिखा, तो कर्मचारियों का सब्र जवाब दे गया.

हाईकोर्ट पहले ही उपनलकर्मियों को नियमित करने के निर्देश दे चुका है
कैबिनेट बैठक में उपनलकर्मियों को लेकर अनौपचारिक चर्चा जरूर हुई, लेकिन इसे लेकर कोई निर्णय नहीं लिया गया. यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब नैनीताल हाईकोर्ट पहले ही उपनल कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से नियमित करने के निर्देश दे चुका है. सरकार की ओर से समान कार्य के बदले समान वेतन दिए जाने पर विचार करने की बात कही जा रही है, लेकिन इसे लेकर भी अब तक कोई स्पष्ट नीति या निर्णय सामने नहीं आया है.

सरकार ने इस मामले में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में एक उप समिति का गठन जरूर किया है, जो उपनल कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रही है. हालांकि, इस समिति में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी को सदस्य तक नहीं बनाए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. खासतौर पर इसलिए क्योंकि उपनल कर्मचारियों से जुड़े सभी मामले सैनिक कल्याण विभाग के अंतर्गत आते हैं.

सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
उपनल महासंघ के अध्यक्ष विनोद गोदियाल ने कहा खुद सैनिक कल्याण मंत्री और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल कर्मचारियों के पक्ष में निर्णय लेने की बात कह चुके हैं, लेकिन बार-बार कैबिनेट में उनका मामला न लाया जाना सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़े करता है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले एक से दो सप्ताह के भीतर उपनल कर्मचारियों के पक्ष में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो कर्मचारी फिर से आक्रामक आंदोलन के लिए मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी.

हाल ही में उपनल कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर बड़ा आंदोलन किया था और हड़ताल पर चले गए थे. उस दौरान सरकार ने सकारात्मक आश्वासन देते हुए जल्द फैसला लेने का भरोसा दिलाया था, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए उपनल कर्मचारियों का धैर्य टूटता नजर आ रहा है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है.

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