
सतपुली/कोटद्वार, 28 फरवरी। तीन दिवसीय नयारघाटी एडवेंचर स्पोर्ट्स फेस्टिवल में तीनों दिन जल, थल और नभ की गतिविधियां छाई रही। शनिवार को पुरस्कार वितरण के साथ तीन दिवसीय फेस्टिवल का समापन हुआ।
पैराग्लाइडिंग एक्यूरेसी प्रतियोगिता में हिमाचल के मोहर सिंह पहले, भीमताल के मनीष उप्रेती दूसरे और हिमाचल के अक्षय कुमार तीसरे स्थान पर रहे जबकि पैराग्लाइडिंग टीम में पहला स्थान टीम एडवेंचर जोन, दूसरा स्थान टीम फ्लाइवर कला और तीसरा स्थान टीम पाजू भीमताल ने कब्जाया। गर्ल्स राइजिग स्टार्स का खिताब चंपावत की शीतल ठाकुर को मिला। पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता चीफ जज राजू राय और मीट डायरेक्टर विक्रम सिंह नेगी की देखरेख में संपन्न हुए।
माउंटेन बाइकिंग प्रतियोगिता पुरुष वर्ग में प्रज्ज्वल ने पहला, नीरज भंडारी ने दूसरा और हिमांशु डबराल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। महिला वर्ग में संध्या मौर्य ने पहला, वंदना सिंह ने दूसरा और वरनाली महेला ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। एंग्लिग में कुल आठ प्रतिभागी ही थे जिसमें संजीव परोरिया, ट्रैवर होमस और संजय पंचेश्वर पहले तीनों स्थानों पर रहे। सभी प्रतिभागियों को स्मृतिचिह्न और नकद राशि देकर सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि विधायक पौड़ी राजकुमार पोरी ने कहा कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप बिलखेत में पैराग्लाइडिंग प्रशिक्षण केंद्र बनाया जाएगा। पुरस्कार वितरण में जिलाधिकारी गढ़वाल स्वाति एस. भदौरिया, सीडीओ पौड़ी गिरीश चंद्र गुणवंत, उपजिलाधिकारी सतपुली रेखा आर्य, ग्राम प्रधान बिलखेत रश्मि देवी, वेद प्रकाश वर्मा, मनोज नैथानी आदि मौजूद रहे।
फेस्टिवल में पहुंचे कई राज्यों के पैराग्लाइडर्स
सतपुली। नयार घाटी एडवेंचर स्पोर्ट्स फेस्टिवल में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में देश के अनेक राज्यों के 52 पैराग्लाइडर्स, माउंटेन बाइकिंग में 33, कयाकिंग में 32, एंग्लिग में 8 धुरंधरों ने जौहर दिखाए। महोत्सव में क्षेत्र के ग्रामीणों द्वारा हॉट एयर बैलून, टैंडम पैराग्लाइडिंग, जिप लाइन, बर्मा ब्रिज, कमांडो नेट का निःशुल्क लुत्फ उठाया गया।
भरतवाण के जागर व गीतों पर झूमे दर्शक
नयार वैली एडवेंचर फेस्टिवल के दूसरे दिन की सांस्कृतिक संध्या जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण के नाम रही। उनकी लोकगायन की अनुपम छटा ने फेस्टिवल की संध्या पर चार चांद लग गए। जागर सम्राट भरतवाण ने रुमा झूमा…, मेरु हिमवंती देश…, सरुली मेरु जिया लगी गे…, सभी कठ्ठा ह्वे गैनी… और बिंदुली राति रै गे जरासी… जैसे लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए। क्षेत्रवासियों का कहना था कि यह संध्या न केवल सांस्कृतिक विरासत का उत्सव बनी बल्कि नयार घाटी की पहचान और लोकसंस्कृति के गौरव को भी नयी ऊंचाई दे गई।



