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PM मोदी ने दिल्ली-दून एक्सप्रेसवे का लोकार्पण से पहले मां डाट काली का लिया अशीर्वाद

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देहरादून, 14 अप्रैल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 11,963 करोड़ की लागत से बने 213 किमी लंबे दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का लोकार्पण करेंगे। इससे पहले पीएम मोदी सिद्धपीठ मां काली का आशीर्वाद लेने मां डाट काली मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने दस मिनट तक पूजा अर्चना की। इस दौरान डाट काली मंदिर में बच्चियों ने महिषासुरमर्दिनी स्तोत्रम् का पाठ किया। वहीं, पीएम मोदी ने भी बच्चियों के पाठ को उनके साथ खड़े रहकर सुना।

डाट काली मंदिर का पौराणिक इतिहास
मां डाट काली मंदिर उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा पर स्थित एक अत्यंत प्राचीन और सिद्धपीठ मंदिर है। देहरादून-सहारनपुर मार्ग पर स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। इस मंदिर की स्थापना 13 जून 1804 को हुई थी। मान्यता है कि जब इस क्षेत्र में सुरंग का निर्माण किया जा रहा था तो काम में बार-बार बाधाएं आ रही थीं। तब मां काली ने एक इंजीनियर को सपने में दर्शन देकर उसी स्थान पर मंदिर बनाने का निर्देश दिया। मंदिर निर्माण के बाद सुरंग का काम सफलतापूर्वक पूरा हो गया। ‘डाट’ शब्द का स्थानीय अर्थ ‘सुरंग’ या ‘पहाड़ का रास्ता’ होता है। सुरंग के पास स्थित होने के कारण इन्हें ‘डाट काली’ कहा जाने लगा। एक अन्य मान्यता के अनुसार यहां देवी का ‘दांत’ दंत गिरा था, जिस कारण इन्हें ‘दंतकाली’ या ‘डाट काली’ भी कहा जाता है।

नये वाहनों की पूजा
यह देहरादून और आस पास क्षेत्रों में परंपरा है कि जब भी कोई नया वाहन (कार, बाइक आदि) खरीदता है तो उसकी पहली पूजा मां डाट काली के दरबार में ही कराई जाता है। माना जाता है कि नया वाहन लेने पर चुनरी बंधवाने पर माता रानी स्वयं भक्त और वाहन की रक्षा करती हैं। मंदिर शिवालिक की पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच एक प्राकृतिक गुफा जैसी संरचना में स्थित है, जो भक्तों को शांति का अनुभव कराता है। इसे एक मनोकामना सिद्धपीठ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी मुरादें पूरी होने पर यहां भंडारा आयोजित करते हैं।

सिर पर ब्रहमकमल टोपी, भाषण में गढ़वाली-कुमाऊंनी के छोटे-छोटे वाक्य और भावनाओं में उत्तराखंड की बेहतरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ये तीन बातें मंगलवार को एक बार फिर से दिखाई दीं। दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री ने अपने चिर परिचित अंदाज में एक बार फिर साबित किया कि उत्तराखंड की प्रगति से उनका खास वास्ता है।

अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी बहुत खूबसूरती से लोकल कनेक्ट करते हैं। इसीलिए चाहे वेशभूषा हो, भाषा शैली हो या फिर स्थानीय जगहों के नाम का उल्लेख हो, प्रधानमंत्री हर बात का खास ख्याल करते हैं। ये ही वजह है कि उनके भाषण की शुरूआत में इस बार भी भुला-भुलियों, सयाणा, आमा, बाबा जैसे पहाड़ी बोली-भाषा के शब्दों ने प्रमुखता से स्थान पाया। दिल्ली- देहरादून एक्सप्रेस वे के निर्माण में मां डाटकाली के आशीर्वाद का प्रधानमंत्री ने खास तौर पर जिक्र किया। ये भी जोड़ा कि देहरादून पर मां डाटकाली की कृपा है। उत्तराखंड से लगे उत्तर प्रदेश के क्षेत्र में स्थित संतला माता मंदिर का भी उन्होंने स्मरण किया। प्रधानमंत्री ने हरिद्वार कुंभ, नंदा राजजात से लेकर पंच बदरी, पंच केदार, पंच प्रयाग का भी प्रभावपूर्ण जिक्र कर जबरदस्त लोकल कनेक्ट किया।

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