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बाबा केदार के दरबार में ‘सुगम दर्शन’ को देने होंगे रु. 1100, BKTC ने जारी की नई SOP

रुद्रप्रयाग, 29 मई। बाबा केदार की पावन नगरी में अब दर्शन व्यवस्था पूरी तरह बदलने जा रही है. विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में बढ़ती भीड़, वीआईपी कल्चर और अव्यवस्थित दर्शन व्यवस्था के बीच बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने बड़ा फैसला लेते हुए नई एसओपी जारी कर दी है. नई व्यवस्था के तहत अब ”सुगम दर्शन” के लिए श्रद्धालुओं को 1100 शुल्क देना होगा.

BKTC की नई व्यवस्था पर छिड़ गयी नई बहस
नई व्यवस्था के तहत अब केदारनाथ धाम में विशेष या वीआईपी दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को 1100 रुपये प्रति व्यक्ति का शुल्क देना होगा, जिसके बाद उन्हें मंदिर समिति की ओर से दर्शन की रसीद जारी की जायेगी। इस फैसले के बाद धाम में एक नई बहस छिड़ गई है. चर्चा इस बात की है कि अब बाबा के दरबार में मंत्री हो या संत्री, आम श्रद्धालु हो या खास व्यक्ति सभी को नियमों के तहत ‘पर्ची’ कटवानी पड़ेगी. मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि यह व्यवस्था यात्रा संचालन को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से लागू की गई है. लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या, खराब मौसम और लंबी कतारों की समस्या को देखते हुए यह कदम उठाया गया है.

भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा को लेकर लिया गया निर्णय
नई एसओपी के अनुसार अब श्रद्धालुओं को निर्धारित शुल्क देकर तय समय में सुगम दर्शन की सुविधा दी जाएगी. इससे घंटों लाइन में लगने की समस्या कम होगी और विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं व अस्वस्थ यात्रियों को राहत मिल सकेगी, लेकिन सबसे बड़ी चर्चा इस बात को लेकर है कि इस नई व्यवस्था का असर अब पंडा-पुरोहितों और उनके यजमानों पर भी पड़ने जा रहा है. इस नई व्यवस्था में केवल (राज्य अतिथियों) और उनके परिवार के सदस्यों को ही इस शुल्क से छूट प्रदान की गयी है।

लापरवाही पर होगी कार्रवाई
मंदिर समिति ने सख्त हिदायत दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले या बना पर्ची के बैकडोर एंट्री कराने वाले कर्मचारियों और कार्मिकों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जायेगी। वर्षों से चली आ रही परंपरागत व्यवस्थाओं के बीच अब यजमानों के लिए भी प्रक्रिया के तहत पर्ची कटवाना अनिवार्य बताया जा रहा है. इसे बीकेटीसी द्वारा व्यवस्था पर ‘कड़ा नियंत्रण’ माना जा रहा है. धाम में यह चर्चा भी तेज है कि अब वीआईपी संस्कृति पर भी काफी हद तक रोक लगेगी. यानी सिफारिश, रसूख और दबाव की बजाय अब नियम और शुल्क आधारित व्यवस्था लागू होगी.

इस फैसले पर प्रतिक्रियाएं भी दो हिस्सों में बंटती दिखाई दे रही हैं. कुछ श्रद्धालु इसे बेहतर प्रबंधन और सुरक्षित यात्रा की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं, तो कुछ लोग इसे आस्था के नाम पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बता रहे हैं. सोशल मीडिया पर भी इस एसओपी को लेकर बहस तेज हो गई है. इन दिनों बाबा केदार की नगरी में लगातार बारिश, बर्फीली हवाओं और भारी भीड़ के बीच यात्रा अपने चरम पर है. ऐसे में बीकेटीसी की यह नई व्यवस्था आने वाले दिनों में यात्रा संचालन की तस्वीर बदल सकती है.

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