
देहरादून, 27 अगस्त, 26. उत्तराखंड में उच्चकृत विद्यालयों में व्यायाम शिक्षकों का पद समाप्त किए जाने का विरोध तेज हो गया है. शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षित बेरोजगार संगठन ने इसके खिलाफ 2 सितंबर को मुख्यमंत्री आवास कूच किए जाने का ऐलान किया है. साथ ही प्रशिक्षित बेरोजगार ने प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा.
नई शिक्षा नीति में सरकार का दोहरा चरित्र उजागर
संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश चंद्र पांडेय का कहना है कि जहां एक तरफ उत्तराखंड सरकार नई शिक्षा नीति NEP -2020 लागू करने का दावा कर रही है. जिसमें शारीरिक शिक्षा को प्राथमिक से इंटरमीडिएट तक अनिवार्य विषय बताया गया है, वहीं दूसरी तरफ सरकार का दोहरा चरित्र सामने आ रहा है. उन्होंने कहा कि हाल ही में प्रदेश में जो विद्यालय उच्चकृत किए गए, उनमें शारीरिक शिक्षा के पद को ही समाप्त कर दिया गया है. यह उत्तराखंड के नौनिहालों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है.
बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने की जरूरत
जगदीश चंद्र ने कहा कि जिस आयु में बच्चों को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने की सबसे ज्यादा जरूरत है, सरकार इस विषय के शिक्षक का पद खत्म कर रही है. जिसकी वजह से एक तरफ बच्चों में खेल, अनुशासन और स्वास्थ्य की भावना समाप्त होगी, तो वहीं दूसरी तरफ हजारों प्रशिक्षित शारीरिक शिक्षक बेरोजगारों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ होता. उन्होंने कहा कि इस फैसले का पूरी प्रदेश कार्यकारिणी जोरदार विरोध करती है.
गौरे हो कि देहरादून में शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षित बेरोजगार मांगों को लेकर लंबे समय से शिक्षा निदेशालय में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे रहे, लेकिन उनकी मांगों पर कोई गौर नहीं हुआ. प्रशिक्षित बेरोजगारों ने अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री आवास कूच भी किया था. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को सुभाष रोड पर पुलिस हेडक्वार्टर से पहले बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया था.



