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CBSE 12वीं के सभी छात्रों की आंसरशीट डिजिलॉकर में मार्कशीट के साथ मिलेगी

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नई दिल्ली, 30 मई। बोर्ड एग्जामिनेशन सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) अगले साल से स्टूडेंट्स को उनकी इवैल्यूएट की हुई आंसर शीट की स्कैन्ड कॉपी सीधे डिजिलॉकर (DigiLocker)के ज़रिए डिजिटल मार्कशीट और सर्टिफिकेट के साथ देने पर विचार कर रहा है.

कुछ छात्रों की शिकायत के बाद लिया गया यह निर्णय
यह प्रस्तावित कदम इस साल के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रक्रिया के दौरान उठी चिंताओं के बाद उठाया गया है, जहां कई स्टूडेंट्स ने आरोप लगाया था कि री-इवैल्यूएशन के दौरान दी गई आंसर शीट धुंधली, अधूरी थीं, या उनमें सप्लीमेंट्री पेज गायब थे. कुछ स्टूडेंट्स ने यह भी दावा किया कि उन्हें दी गई कॉपियां उनकी हैंडराइटिंग से मेल नहीं खाती थीं, जिससे माता-पिता, टीचर और स्टूडेंट्स ने उनकी आलोचना की. अभी, सीबीएसई स्टूडेंट्स को रिजल्ट घोषित होने के बाद डिजिलॉकर (DigiLocker) के ज़रिए उनकी मार्कशीट, पासिंग सर्टिफिकेट और माइग्रेशन सर्टिफिकेट मिलते हैं.

मार्कशीट के साथ आंसर शीट की स्कैन कापी भी देख सकते हैं छात्र
हालांकि, अपनी आंसर बुक पाने के इच्छुक स्टूडेंट्स को एक अलग प्रक्रिया से गुज़रना पड़ता है जिसमें मार्क्स के वेरिफिकेशन, आंसर शीट की स्कैन्ड कॉपी और री-इवैल्यूएशन के लिए एप्लीकेशन शामिल हैं, जो अक्सर कई हफ़्तों तक फैल जाते हैं और इसके साथ एक्स्ट्रा फीस भी लगती है. नए प्रपोज़ल के तहत, स्टूडेंट्स डिजिलॉकर (DigiLocker) के ज़रिए ही अपनी जांची हुई आंसर शीट का एक्सेस अपने आप पा सकते हैं, जिससे अलग-अलग एप्लीकेशन की ज़रूरत खत्म हो जाएगी.

सूत्रों का कहना है कि बोर्ड का मानना ​​है कि आंसर बुक तक सीधी पहुंच से इवैल्यूएशन को लेकर होने वाले झगड़े कम हो सकते हैं, एग्जामिनेशन सिस्टम में भरोसा बढ़ सकता है और रिजल्ट के बाद की प्रक्रिया आसान हो सकती है. यह प्लान एग्जामिनेशन में डिजिटाइज़ेशन और ट्रांसपेरेंसी की दिशा में एक बड़े कदम का हिस्सा है.

खबर है कि हर साल बोर्ड एग्जाम के दौरान बहुत ज़्यादा आंसर शीट बनने को देखते हुए, डेटा स्टोरेज, सर्वर कैपेसिटी, स्कैनिंग क्वालिटी स्टैंडर्ड और साइबर सिक्योरिटी जैसे मामलों पर टेक्निकल बातचीत चल रही है. अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि क्या स्टूडेंट्स को रिज़ल्ट घोषित होने के तुरंत बाद पूरी स्कैन की हुई आंसर बुक मिलनी चाहिए या उन्हें एक सुरक्षित, टाइम-बाउंड सिस्टम के ज़रिए एक्सेस दिया जाना चाहिए. कहा जा रहा है कि सीबीएसई ऐसा काम कर रहा है जिससे स्टैंडर्ड स्कैनिंग क्वालिटी पक्की हो सके और जो आंसर शीट पढ़ी न जा सकें या अधूरी हों, उनसे जुड़ी शिकायतों को रोका जा सके.

एजुकेशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस पहल से ट्रांसपेरेंसी में काफी सुधार हो सकता है, लेकिन इसकी सफलता मज़बूत टेक्निकल इंफ्रास्ट्रक्चर और इवैल्यूएशन सेंटर्स में लगातार लागू करने पर निर्भर करेगी. उनका कहना है कि स्कैनिंग की सटीकता बनाए रखना और संवेदनशील एग्जामिनेशन रिकॉर्ड की सुरक्षित हैंडलिंग सिस्टम के अच्छे से काम करने के लिए बहुत ज़रूरी होगी.

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