कुमाऊं रेजिमेंट सेंटर में हुई कसम परेड के बाद 1170 अग्निवीर बने भारतीय सेना का हिस्सा

रानीखेत (अल्मोड़ा), 30 मई। कुमाऊं एवं नागा रेजिमेंट सेंटर (केआरसी) मुख्यालय में कठिन सैन्य प्रशिक्षण के अग्निपथ पर तपकर निकले 1170 अग्निवीर नवसैनिक भारतीय सेना का अंग बने। अदम्य साहस, शौर्य व वीरता के प्रतीक बहादुरगढ़ द्वार से कदमताल कर इन जांबाज अग्निवीर सैनिकों ने अंतिम पग भर मां भारती की आन, बान व शान की रक्षा को जरूरत पडऩे पर सर्वस्व न्यौछावर करने की कसम ली।
सैनिक बनकर देश सेवा का अवसर हर किसी को नहीं मिलता : कमांडेंट ब्रिगेडियर
मुख्य अतिथि केआरसी कमांडेंट ब्रिगेडियर विजयंत महादिक ने अग्निवीर रिक्रूट्स में नया जोश भरते हुए रेजिमेंट का नाम, नमक व निशान ऊंचा रख सैन्य परंपरा का गौरव बरकरार रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सैन्य जीवन को तपस्या से कम नहीं है और सैनिक बन देश सेवा का अवसर हर किसी को नहीं मिलता। कहा कि देश को मेजर सोमनाथ शर्मा व मेजर शैतान सिंह के रूप में दो परमवीर चक्र दिलाने वाली कुमाऊं रेजिमेंट का अंग बनना सौभाग्य की बात है।
केआरसी मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक सोमनाथ मैदान के इतिहास में शनिवार को एक और गौरवशाली पृष्ठ जुड़ गया। यहां चुनौतियों से भरा 31 सप्ताह का कड़ा प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद वीररस से लबरेज रेजिमेंट की बैंडधुन पर कदम बढ़ाते अग्निवीर नवसैनिक भारतीय फौज का हिस्सा बने। कमांडेंट ब्रिगेडियर विजयंत महादिक, डिप्टी कमांडेंट कर्नल प्रभु रामदास बामन, प्रशिक्षण अधिकारी कर्नल मोहित वर्मा ने बारी बारी सलामी ली। परेड की अगुआई कैप्टन रौबिन शर्मा ने की। इस दौरान सूबेदार मेजर राजेश कुमार, परेड कमांडर अग्नि वीर पंकज कुमार, वरिष्ठ ड्रिल प्रशिक्षक सूबेदार प्रकाश चंद, हवलदार भगत सिंह, अलका कौशिक आदि सैन्य अफसर व जवान मौजूद रहे।
सर्वश्रेष्ठ रिक्रूट्स को लगाए पदक
मुख्य अतिथि ब्रिगेडियर विजयंत ने प्रशिक्षण अवधि में ड्रिल में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए अग्निवीर पंकज कुमार, लिखित में अग्निवीर संजय सिंह नेगी, शारीरिक में संजय सिंह, फायरिंग में अग्निवीर अमन कुमार, टीएसओटी में अग्निवर सूरज एड़ी व बेस्ट इन आल के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर अग्निवीर पीयूष कार्की को पदक लगा सम्मानित किया। अग्निवीर-2025 के सातवें बैच की चैंपियन ब्रावो कंपनी रही। बाद में रिक्रूट्स के स्वजन को गौरव पदक प्रदान किए गए। इसमें मनीषा महादेव व पूनम गहलोत शामिल रहीं।
देशसेवा को प्रेरित करने वाले स्वजनों का ऋणी रहेगा देश
ब्रिगेडियर विजयंत महादिक ने कहा कि भारतीय सेना उन परिवारों की ऋणी रहेगी जिन्होंने अपने पुत्रों को सेना में भर्ती होकर देश सेवा की प्रेरणा दी। सभी रिक्रूट्स ने कठिन प्रशिक्षण के दौरान अदम्य साहस का परिचय दिया। उन प्रशिक्षकों का भी धन्यवाद जिन्होंने नौजवान को अनुशासित कुशल सैनिक बनाया। सैनिक बन कर्तव्य निभाना सच्ची देशसेवा व पुण्य कार्य है। एक सच्चा सैनिक अपना सर्वस्व त्याग कर जिस निष्ठा, अनुशासन व समर्पण के साथ अपना जीवन व्यतीत करता है, ऐसी मिशाल दुनिया में कहीं नहीं मिलती।



