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पहाड़ों में गुम हुई बबीता पांडे का एक हफ्ते बाद भी सुराग नहीं, 100 जवान, खोजी कुत्ते, ड्रोन कैमरे भी बेअसर

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देहरादून, 5 जून। उत्तराखंड के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रेक की खूबसूरत वादियां इन दिनों एक ऐसे रहस्य की गवाह बनी हुई है, जिसने पूरे प्रदेश को बेचैन कर दिया है. वजह है कि दयारा बुग्याल ट्रेक से एक युवती का लापता होना. जिसका अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है. एमबीए की स्टूडेंट बबीता पांडे अपने दो दोस्तों (हरमनपाल सिंह जो ऊधमसिंह नगर जिले के दिनेशपुर के रहने वाले हैं और हरमनप्रीत सिंह जो कि उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के रहने वाले हैं) के साथ ट्रेक पर गयी थी।

नैनीताल जिले की रहने वाली थी 24 साल की बबीता पांडे
नैनीताल जिले के रामनगर की रहने वाली बबीता पांडे (उम्र 24 वर्ष) को लापता हुए एक हफ्ते से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया है. करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर फैले घने जंगलों, गहरी खाइयों, चट्टानों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में कई लोग उसकी तलाश में जुटे हैं, लेकिन हर बीतते दिन के साथ रहस्य और गहराता जा रहा है.

जिस दयारा बुग्याल को उसकी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण और रोमांचक ट्रेकिंग मार्गों के लिए जाना जाता है, वही इलाका अब चिंता, आशंका और इंतजार का प्रतीक बन गया है. बीते कई दिनों से सुबह होते ही रेस्क्यू टीमें नए उत्साह के साथ जंगलों और पहाड़ियों की ओर निकलती हैं और शाम ढलने तक लौटती हैं, लेकिन उनके हाथ अब तक खाली हैं. पहाड़ों की खामोशी जैसे हर सवाल को अपने भीतर समेटे बैठी है.

जंगल, गुफाएं, झील हर जगह खोजा, लेकिन बबीता का पता नहीं
बबीता की तलाश के लिए जिला प्रशासन ने अपनी लगभग पूरी ताकत झोंक दी है. आईटीबीपी, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, वन विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग की संयुक्त टीमें लगातार अभियान चला रही हैं.

खोजी कुत्ते और ड्रोन कैमरे भी नहीं खोज पाए
खोजी कुत्तों को ट्रेक रूट पर उतारा गया. ड्रोन कैमरों से पहाड़ियों और जंगलों की निगरानी की गई. सैटेलाइट फोन के जरिए दुर्गम क्षेत्रों से संपर्क बनाए रखा गया. यहां तक कि संभावित जल स्रोतों की भी गहन जांच की गई, लेकिन बबीता कहीं नहीं मिल रही है.

ट्रेक रूट के हर संभावित रास्ते, हर ढलान, हर जंगल और हर ऐसे स्थान की कई बार तलाशी ली जा चुकी है, जहां किसी व्यक्ति के फंसने या भटकने की संभावना हो सकती है. बावजूद इसके अब तक ऐसा कोई सुराग नहीं मिला है, जो बबीता तक पहुंचने में मदद कर सके.
रेस्क्यू अभियान में शामिल अधिकारी

रात में टेंट के बाहर निकली और फिर रहस्यमय तरीके से गायब हो गई
बताया जा रहा है कि बबीता अपने दो साथियों के साथ उत्तरकाशी घूमने आई थी. हर्षिल के लामा टॉप और गंगोत्री धाम का भ्रमण करने के बाद तीनों दयारा बुग्याल ट्रेक पर गए. जहां वो गोई कैंप में ठहरे. बीती 29 मई की रात करीब 11 बजे बबीता टेंट से बाहर निकली थी. युवकों का कहना है कि 29 मई की रात को टेंट में म्यूजिक बजाने को लेकर कुछ बात हुई थी, जिसके बाद बबीता टेंट से बाहर निकलीं और फिर वापस नहीं लौटीं।

पुलिस की मानें तो उस समय वो मोबाइल फोन पर गाने सुन रही थी. इसके बाद क्या हुआ? ये किसी को नहीं पता है. अगली सुबह जब उसके साथी जागे तो बबीता वहां नहीं थी. पहले उन्होंने अपने स्तर पर आसपास खोजबीन की, लेकिन जब काफी तलाश के बाद भी कुछ पता नहीं चला, तो पुलिस को सूचना दी गई. यहीं से शुरू हुई उस तलाश की कहानी जो 7 दिन बाद भी अधूरी है.

परिवार को यकीन बबीता इतनी आसानी से रास्ता नहीं भटक सकती
बबीता के परिवार के लिए यह इंतजार हर गुजरते दिन के साथ और भारी होता जा रहा है. जब से बबीता लापता हुई है, तब से उसके मां और भाई उत्तरकाशी में है. कभी वो रैथल गांव जाते हैं, तो कभी वो दयारा बुग्याल. बबीता के चचेरे भाई पंकज पांडे का कहना है कि,

बबीता कोई सामान्य पर्यटक नहीं थी. बल्कि, उसे ट्रेकिंग का अच्छा अनुभव था. हमें विश्वास नहीं हो रहा कि वो इतनी आसानी से रास्ता भटक सकती हैं.
– पंकज पांडे, बबीता के चचेरे भाई

बबीता के चचेरे भाई पंकज ने भावुक होकर कहा कि ‘अगर वो कहीं सुरक्षित है और यह खबर देख रही है, तो बस एक बार घर फोन कर दें. परिवार को उसकी आवाज सुनने का इंतजार है.’ घर में मां का रो-रोकर बुरा हाल है और हर फोन कॉल पर उम्मीद बंध जाती है कि शायद दूसरी तरफ से बबीता की आवाज सुनाई दे.

अपहरण से लेकर हादसे तक हर तरह से जांच
परिजन बबीता की सुरक्षित बरामदगी की उम्मीद लगाए हुए हैं. जबकि, खोजी टीमें लगातार अभियान चलाकर उसके सुराग तलाशने में जुटी हैं. इसी बीच इस मामले ने तब नया मोड़ लिया, जब परिजनों ने बबीता के साथ गए दोनों युवकों पर अपहरण का आरोप लगा दिया. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू दी है.

युवती के परिजनों की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने उसके साथ ट्रेकिंग पर आए उधम सिंह नगर निवासी हरमनपाल और उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर निवासी हरमनप्रीत सिंह के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज किया है. उनके बयानों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है.

पुलिस के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बबीता पांडे, हरमनपाल की दोस्त थी. जब हरमनपाल और हरमनप्रीत ने दयारा बुग्याल घूमने की योजना बनाई, तो बबीता भी उनके साथ ट्रेकिंग पर चली गई. जहां से वो अचानक लापता हो गई. लिहाजा, मामले की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है.

फिलहाल किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है. हादसा, रास्ता भटकना, जंगली जानवरों का हमला या फिर किसी आपराधिक साजिश की आशंका हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है. हालांकि, अभी तक ऐसा कोई ठोस तथ्य सामने नहीं आया है, जो किसी एक संभावना की पुष्टि कर सके. यही वजह है कि यह मामला जितना पुराना होता जा रहा है, उतना ही रहस्यमयी भी बनता जा रहा है
-कमलेश उपाध्याय, एसपी, उत्तरकाशी

रेस्क्यू ऑपरेशन धीमा नहीं पड़ा
लगातार कई दिनों तक अभियान चलाने के बाद कुछ विशेष टीमें वापस लौटी हैं, लेकिन खोज अभियान रुका नहीं है. पुलिस और वन विभाग के अधिकारी अब भी गोई क्षेत्र में डेरा डाले हुए हैं.

आने वाले दिनों में भी इलाके की सघन तलाशी जारी रहेगी. प्रशासन का कहना है कि जब तक बबीता का पता नहीं चल जाता, तब तक अभियान जारी रहेगा. अधिकारियों को उम्मीद है कि किसी न किसी बिंदु पर ऐसा सुराग जरूर मिलेगा, जो इस रहस्य की गुत्थी सुलझा सके.

7 दिन बाद भी वही सवाल- आखिर कहां है बबीता?
सात दिन पहले एक युवती अपने दोस्तों के साथ ट्रेकिंग के लिए निकली थी. आज उसके परिवार की आंखें रास्ता देख रही हैं. सैकड़ों जवान पहाड़ों की खाक छान रहे हैं और पूरा उत्तरकाशी एक जवाब तलाश रहा है कि आखिर बबीता पांडे कहां है?

क्या वो किसी दुर्गम इलाके में फंसी हुई है? क्या वो किसी दूसरे रास्ते पर निकल गई? क्या उसके साथ कोई हादसा हुआ या फिर इस पूरी कहानी का कोई ऐसा अध्याय अभी सामने आना बाकी है? जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी. फिलहाल, इन सवालों के जवाब दयारा बुग्याल की उन्हीं खामोश पहाड़ियों में कहीं छिपे हैं, जहां पिछले एक हफ्ते से उम्मीद और चिंता साथ-साथ चल रही हैं.

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