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NCERT ने बदला फैसला: कक्षा 9 की किताब में अब दिखाई देगी सिंधु घाटी सभ्यता की असली ‘डांसिंग गर्ल’

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नई दिल्ली, 16 जून। सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे मशहूर ऐतिहासिक धरोहरों में से एक ‘डांसिंग गर्ल’ की मूर्ति को लेकर छिड़े विवाद के बीच यह तय किया गया है कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की किताब में मूर्ति का मूल स्वरूप ही प्रकाशित किया जाएगा। NCERT ने अपनी क्लास 9 की नई पाठ्यपुस्तक में मोहनजोदड़ो की मशहूर ‘डांसिंग गर्ल’ (नर्तकी की मूर्ति) की तस्वीर में किए गए बदलाव को वापस लेने का फैसला किया है।

मोहनजोदड़ो सभ्यता से मिली डांसिंंग गर्ल प्रतिमा 4 हजार साल पुरानी
सूत्रों का कहना है कि किताब की सॉफ्ट कापी में यह बदलाव हो जाएगा। डिजिटल रूप में किताब में डांसिंग गर्ल का मूल स्वरूप ही नजर आएगा। सिंधु घाटी सभ्यता के मोहनजोदड़ो से मिली ‘डांसिंग गर्ल’ प्रतिमा करीब चार हजार वर्ष पुरानी मानी जाती है। यह कांस्य से निर्मित एक छोटी मूर्ति है, जो विश्वभर में प्रसिद्ध है। इतिहास और पुरातत्व से जुड़ी किताबों में इसे अक्सर मूल स्वरूप में प्रकाशित किया जाता है।

‘डांसिंग गर्ल’ को लेकर क्यों विवाद हो रहा था?
NCERT की 9वीं क्लास की कला शिक्षा की नई किताब ‘मधुरिमा’ के पहले अध्याय ‘कला के इतिहास’ में मूर्ति की तस्वीर को प्रकाशित किया गया।
नई किताब में प्रकाशित तस्वीर में प्रतिमा के धड़ (टॉर्सो) वाले हिस्से को छायांकित या ढका हुआ दिखाया गया है, जिसको लेकर सवाल उठाए गए।
तस्वीर में मूर्ति के धड़ को कंधों के नीचे तक इस तरह ढका गया, जिससे उसकी शारीरिक बनावट ही गायब हो गई। ऐसा लग रहा था कि मूर्ति को कपड़े पहनाए गए हों।
मूर्ति की तस्वीर में हुए बदलाव को लेकर विवाद इसलिए भी बढ़ गया, क्योंकि 25 सालों से इसे ऐसे ही छापा जा रहा था।
मूर्ति की तस्वीर को लेकर छिड़े विवाद के बाद NCERT ने इस बदलाव की समीक्षा के लिए मामला कला शिक्षा विभाग और पाठ्यपुस्तक विकास समिति को भेजा था।

एक्सपर्ट्स ने कहा कि जब तक यह किसी अधूरी कलाकृति के संभावित पुनर्निर्माण को दिखाने के लिए स्पष्ट रूप से न किया गया हो, तब तक ऐसी तस्वीर में बदलाव करना एक नकली कलाकृति बनाने जैसा है। अध्याय में डांसिंग गर्ल को मोहनजोदड़ो से प्राप्त लगभग 2600 ईसा पूर्व की कांस्य प्रतिमा बताया गया है। किताब में कहा गया है कि मोहनजोदड़ो की इस कांस्य प्रतिमा को ‘लॉस्ट-वैक्स तकनीक’ से बनाया गया था, जो पश्चिम बंगाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ में प्रचलित है। मोहनजोदड़ो से प्राप्त डांसिंग गर्ल सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध पुरातात्विक वस्तुओं में से एक मानी जाती है।

ढकी हुई तस्वीर को मौलिक तस्वीर से रिप्लेस किया जाएगा: सूत्र
वहीं, सूत्रों का कहना है कि यह तय किया गया है कि नई किताबों में वास्तविक यानी मौलिक तस्वीर ही नजर आएगी। तस्वीर में किए गए बदलाव को मौलिक स्वरूप से ही रिप्लेस किया जाएगा। मोहनजोदड़ो में खुदाई के दौरान मिली हजारों वर्ष पुरानी मूर्ति ‘डांसिंग गर्ल’ को हड़प्पा कला का एक बेहतरीन नमूना माना जाता है। सूत्रों का कहना है कि सॉफ्ट कापी में इसे मंगलवार तक बदल दिया जाएगा।

सूत्र यह भी बताते है कि अभी यह किताब बहुत ही सीमित मात्रा में सर्कुलेट हुई है। अभी बाजार में बिक्री के लिए इस किताब का आना बाकी है। अब जल्द ही यह बदलाव कर इसे जारी कर दिया जाएगा। ‘डांसिग गर्ल’ की इस मूर्ति की ऊंचाई लगभग चार इंच है। फिलहाल ये मूर्ति नई दिल्ली के नेशनल म्यूजियम (राष्ट्रीय संग्रहालय) में सुरक्षित रखी हुई है, जो हड़प्पा सभ्यता के उन्नत धातु विज्ञान का प्रतीक है।

हाल के महीनों में NCERT से जुड़ा यह पाठ्यपुस्तक से संबंधित दूसरा विवाद है। इस साल फरवरी-मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने 8वीं क्लास की सोशल साइंस की किताब के एक चैप्टर को लेकर खुद संज्ञान लिया था, उस चैप्टर में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और केसों के पेंडिंग होने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई थी। कोर्ट ने किताब को वापस मंगाने और उसकी कॉपियों को सर्कुलेशन से हटाने का आदेश दिया। अब यह किताब भी जून में ही मिलने लगेगी।

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