
कोटद्वार, 29 अगस्त। कोटद्वार रेलवे स्टेशन को अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत नया स्वरूप दिया जा रहा है. स्टेशन पर प्रवेश और निकासी के लिए दो बड़े गेट बनाए गए हैं. रेलवे की ओर से इन गेटों के सामने से अतिक्रमण हटाने के लिए स्थानीय प्रशासन को कहा गया. जांच में सामने आया कि स्टेशन के बाहर लगी कई दुकानें पीडब्ल्यूडी की सड़क की भूमि पर संचालित हो रही हैं. इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने 59 दुकानदारों को अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी कर दिया. नोटिस मिलने के बाद दुकानदारों ने कार्रवाई के विरोध में अपनी दुकानों के आगे धरना शुरू कर दिया
व्यापारियों का धरना प्रदर्शन लगातार जारी
नवनिर्मित रेलवे स्टेशन के बाहर बनीं खोखानुमा दुकानों को हटाने के फैसले के विरोध में कारोबारियों का धरना-प्रदर्शन 11वें दिन भी जारी रहा। शनिवार को प्रदर्शन में नगर उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय पदाधिकारी भी शामिल हुए।
रेलवे स्टेशन के बाहर बनीं खोखानुमा दुकानों को अतिक्रमण के दायरे में बताते हुए लोनिवि ने 18 अगस्त तक दुकानें हटा लेने का नोटिस कारोबारियों को जारी किया था। 19 अगस्त से कारोबारी दुकानें बंद कर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। शनिवार को धरना स्थल पर पहुंचे नगर उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश महामंत्री प्रकाशचंद्र मिश्रा ने कहा कि सरकार को विस्थापन नीति बनाते हुए मुआवजा तय करना चाहिए।
व्यापारियों ने इस संबंध में सीएम को भी भेजा है ज्ञापन
व्यापारियों का कहना है कि स्टेशन के बाहर दुकानें लंबे समय से संचालित हो रही हैं. इन दुकानों से कई परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है. उनका कहना है कि यदि अतिक्रमण हटाना जरूरी है तो दुकानदारों को किसी दूसरे स्थान पर विस्थापित किया जाए, ताकि उनकी रोजी-रोटी प्रभावित न हो. व्यापारियों और दुकानदारों ने धरना स्थल से तहसील तक जुलूस निकाला और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के बाद व्यापारियों ने उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजा. ज्ञापन में दुकानदारों को तत्काल हटाने के बजाय उनके पुनर्वास की मांग की गई है.
प्रदर्शनकारियों में जिलाध्यक्ष विवेक अग्रवाल, सेवकराम मानुजा, विवेक अग्रवाल, कुंज अग्रवाल, सुबोध कर्णवाल, लाजपत राय भाटिया, हरीश भाटिया, नितिन भाटिया, अभिनव आहूजा, हरजीत मल्होत्रा, विक्की देवल, यश वेदी शामिल रहे।



