
देहरादून, 7 सितंबर, 26. पतंजलि योगपीठ के महामंत्री और बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण को फर्जी पासपोर्ट मामले में बड़ी राहत मिली है. देहरादून की विशेष CBI सीबीआई अदालत ने करीब 15 साल पुराने मामले में सोमवार को फैसला सुनाते हुए उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया. आचार्य बालकृष्ण पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट हासिल करने का आरोप लगा था.
2011 में दर्ज हुआ था मुकदमा
अखिल भारतीय संत समिति के तत्कालीन अध्यक्ष की शिकायत के आधार पर सीबीआई CBI जुलाई 2011 में मामलला दर्ज किया था। मामले की शुरुआत अप्रैल 2011 में मिली शिकायत से हुई थी. इसके बाद सीबीआई ने प्रारंभिक जांच के बाद जुलाई 2011 में एफआईआर दर्ज की थी. मामले में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल करने के साथ पासपोर्ट एक्ट की धाराएं लगाई गई थीं. सीबीआई का आरोप था कि भारतीय पासपोर्ट हासिल करने के लिए बरेली स्थित पासपोर्ट कार्यालय में कुछ शैक्षणिक प्रमाणपत्र पेश किए गए थे, जिनकी प्रमाणिकता पर सवाल उठे थे.
खुर्जा के कॉलेज के प्रमाणपत्रों पर था विवाद
जांच में बुलंदशहर के खुर्जा स्थित राधाकृष्ण संस्कृत महाविद्यालय से जुड़े प्रमाणपत्र भी सामने आए थे. यह महाविद्यालय संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध बताया गया था. सीबीआई ने विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड के आधार पर इन प्रमाणपत्रों की वैधता पर सवाल उठाए थे. जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने साल 2012 में अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था.
हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई थी रोक
मामले की जांच के दौरान जुलाई 2011 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने आचार्य बालकृष्ण की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी थी. उन्हें अपना पासपोर्ट अदालत में जमा कराने का निर्देश भी दिया गया था. अक्टूबर 2013 में अदालत ने आईपीसी की धारा 120-B, 420, 468 और 471 समेत पासपोर्ट एक्ट के तहत आरोप तय किए थे. बाद में आरोपों में संशोधन किया गया और मुकदमा मुख्य रूप से IPC की धारा 471 तथा पासपोर्ट एक्ट की धारा 12(1)(B) के तहत आगे चला.
अदालत में जमा रहा पासपोर्ट
मामले की लंबी सुनवाई के दौरान आचार्य बालकृष्ण का पासपोर्ट अदालत में जमा रहा. साल 2018 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उन्हें पासपोर्ट वापस लेने और उसका नवीनीकरण कराने की अनुमति दी थी. 2011 में शुरू हुई कानूनी लड़ाई करीब 15 साल बाद फैसले तक पहुंची. देहरादून की विशेष सीबीआई अदालत ने आचार्य बालकृष्ण को सभी आरोपों से बरी कर दिया. फैसले के बाद आचार्य बालकृष्ण ने इसे न्याय व्यवस्था के प्रति अपने भरोसे की जीत बताया.
कोर्ट के फैसले के बाद आचार्य बालकृष्ण ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सत्य की जीत हुई है और लंबे समय तक चले इस फर्जी मामले से उन्हें जो मानसिक प्रताड़ना मिली थी, उससे अब राहत मिली है।



