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17 से 30 हजार रुपये स्टाइपेंड पर अड़े दून मेडिकल कॉलेज के MBBS इंटर्न डॉक्टरों, कार्य बहिष्कार

देहरादून, 7 सितंबर, 26. राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के MBBS इंटर्न छात्र-छात्राओं ने अपने स्टाइपेंड बढ़ाए जाने की मांग को लेकर दून अस्पताल की ओपीडी प्रांगण में धरना दिया. साथ ही जोरदार प्रदर्शन कर ओपीडी से इमरजेंसी तक मार्च निकाला और स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग की. इस दौरान प्रशिक्षु डॉक्टरों ने सरकार से स्टाइपेंड 17 हजार रुपए से बढ़ाकर 30 हजार रुपए किए जाने की मांग उठाई.

30 हजार रुपए स्टाइपेंड की मांग


दरअसल, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के MBBS इंटर्न डॉक्टरों ने अपना निश्चित मानदेय बढ़ाने को लेकर प्रदर्शन किया. प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान में उन्हें करीब 17 हजार रुपए मासिक वेतन दिया जा रहा है, जिसे बढ़ाकर 30 हजार रुपए किया जाना चाहिए. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सरकार ने इसी तरह की सेवाओं के लिए मानदेय में बढ़ोतरी करते हुए करीब 12 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपए कर दिया है. ऐसे में उत्तराखंड में भी वेतन बढ़ाया जाना चाहिए. क्योंकि, दोनों राज्यों में कार्य और जिम्मेदारियां लगभग समान हैं.

काम का दबाव और महंगाई में 17 हजार में पढ़ाई करना मुश्किल
डॉक्टरों का कहना है कि ओपोडी, ओटी और वार्डों में उनसे 24 घंटे तक की कड़ी ड्यूटी ली जाती है, लेकिन मौजूदा महंगाई और जिम्मेदारी के हिसाब से उनका स्टाइपेंड बहुत कम है। उनका कहना था कि 17 हजार रुपए मासिक वेतन के हिसाब से उन्हें प्रतिदिन 500 रुपए भी नहीं मिलते. उनका कहना है कि इतनी कम राशि में काम करना बेहद कठिन है और यह राशि एक सामान्य दिहाड़ी मजदूर की दैनिक मजदूरी के आसपास ही बैठती है.

प्रदर्शनकारियों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग की कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए वेतन में जल्द बढ़ोतरी की जाए. उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होने पर आंदोलन को आगे भी जारी रखा जा सकता है. एमबीबीएस का कोर्स कर रही छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी यह मांग पूरी नहीं होती है, तब तक उनका कार्य बहिष्कार इसी तरह से जारी रहेगा.

स्टाइपेंड संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है और दून मेडिकल कालेज से रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है।
डा. आशुतोष सयाना, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा

हमारी एक ही मांग है कि स्टाइपेंड 17 हजार रुपए से बढ़ाकर 30 हजार रुपए की जाए. उत्तर प्रदेश में भी 12 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपए कर दी गई है, लेकिन उत्तराखंड में 17 हजार रुपए ही है. इतनी महंगाई में 17 हजार रुपए में कैसे काम चलेगा? जब तक हमारी मांग पूरी नहीं होती है, तब तक हमारा कार्यबहिष्कार जारी रहेगा.
– रितिक, MBBS इंटर्न छात्र

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