
थराली, 18 सितंबर, 26. आस्था का अटूट विश्वास, मन में श्रद्धा और आंखों में नंदा के प्रति भावुकता. कुछ ऐसा ही नजारा नंदा देवी बड़ी जात यात्रा के दौरान देखने को मिल रहा है. भक्तों ने नम आंखों और जयकारों के बीच देव डोलियों, छंतोलियों और चौसिंग्या खाड़ू को वेदनी बुग्याल से अगले पड़ावों व कैलाश के लिए विदा किया. बेहद खुशगवार मौसम के बीच नंदा देवी बड़ी जात यात्रा अपने 15वें पड़ाव पातरनचौनिया और बगवाबासा पहुंच गई है.
बड़ी जात यात्रा में शामिल दशोली, बंड और ज्वाल्पा की देव डोलियों, छंतोलियों और चौसिंगा खाड़ुओं के साथ चल रहे श्रद्धालुओं ने शुक्रवार यानी 18 सिंतबंर को वेदनी बुग्याल स्थित वेदनी कुंड में स्नान किया. इसके बाद वेदनी में स्थापित नंदा देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की. पूजा के बाद यात्रा 14वें पड़ाव बेदनी से विदा होकर 15वें और दूसरे निर्जन पड़ाव पातरनचौनिया व बगवाबासा पहुंची.
19 सितंबर को रहस्यमयी रूपकुंड और ज्यूरागली की कठिन चढ़ाई करेगी यात्रा
कठिन पहाड़ी रास्तों के बावजूद यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के हौसले बुलंद हैं. शनिवार यानी 19 सिंतबर को बड़ी जात यात्रा रहस्यमयी रूपकुंड होते हुए यात्रा मार्ग के सबसे कठिन रास्तों में शामिल ज्यूरागली को पार करेगी. इसके बाद यात्रा 16वें और तीसरे निर्जन पड़ाव शीला समुद्र पहुंचेगी. फिर आखिरी पड़ाव होमकुंड पहुंचेगी. यहीं से पूजा के बाद चौसिंगा खाड़ुओं की कैलाश के लिए विदाई होगी. इसके बाद यात्रा अपने परंपरागत रूट से वापस लौटेगी.
वेदनी में पूजा के बाद देवराड़ा लौटी बधाण की नंदा डोली

इधर, नंदा देवी राजराजेश्वरी बधाण की डोली शुक्रवार यानी 18 सिंतबर की सुबह 13वें पड़ाव गौरोलीपातल से रवाना होकर वेदनी बुग्याल (बेदनी) पहुंची. जहां श्रद्धालुओं ने वेदनी कुंड की परिक्रमा कर पितरों को तर्पण दिया और उनके तारण की प्रार्थना की.
दोपहर बाद वापसी यात्रा शुरू हुई. डोली आली बुग्याल और दिदिना होते हुए देवाल ब्लॉक के बांक गांव पहुंची. यहां देवी भक्तों और ग्रामीणों ने डोली का गर्मजोशी से स्वागत किया. शनिवार को बधाण की नंदा डोली लोहाजंग और बगड़ीगाड़ होते हुए रात्रि प्रवास के लिए ल्वाणी गांव पहुंचेगी.
20 सितंबर को होमकुंड में पूजा के बाद लौटेगी बड़ी जात, खाड़ू की होगी विदाई
बता दें कि इस साल बड़ी जात में तीन देव डोलियां शामिल हुई हैं. इनमें बधाण की नंदा देवी राजराजेश्वरी की डोली वेदनी कुंड से वापस अपने पारंपरिक पड़ाव की ओर लौट चुकी हैं. वहीं, बंड की नंदा देवी, दशोली की नंदा देवी और ज्वाल्पा माता की डोलियां कैलाश की ओर बढ़ रही हैं. आगामी यात्रा 20 सितंबर को होमकुंड पहुंचेगी. यहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद खाड़ू की विदाई होगी.
इसके साथ ही कैलाश की ओर बढ़ी बड़ी जात अपने पारंपरिक पड़ावों की ओर वापस लौटना शुरू करेगी. जिसके तहत देव डोलियां और श्रद्धालु वापस अपने निर्धारित पारंपरिक पड़ावों की ओर लौटेंगे. यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह बना हुआ है. गौर हो कि इस बार नंदा देवी बड़ी जात यात्रा 5 सितंबर को सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर से शुरू हुई थी. वहीं, बड़ी जात में काफी संख्या लोग शामिल हुए हैं.



