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SC के फैसले के बाद देहरादून में हजारों दुकानदारों की रोजी-रोटी पर संकट, मंत्री, विधायकों तक में हलचल

देहरादून, 15 अक्टूबर, 26. राजधानी देहरादून से हजारों दुकानदारों पर रोजगार का संकट आने वाला है. रिहायशी इलाकों में आवासीय नक्शे पर व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वालों पर अब सरकार डंडा चलाने जा रही है. हालांकि प्रशासन को ऐसा सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कारण करना पड़ रहा है, लेकिन इससे हजारों दुकानदारों और व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वालों पर बड़ा संकट खड़ा होने जा रहा है. खास बात यह है कि इसी मामले को लेकर अब तमाम विधायक और मंत्री भारी दबाव में है और चुनाव से पहले इस दबाव से मुक्ति पाने का रास्ता ढूंढ रहे है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद छोटे कारोबारियों के सामने रोजगार का संकट
राजधानी देहरादून में हजारों दुकानदारों और छोटे कारोबारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है. आवासीय नक्शे पर बने भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी ने कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है. प्रशासन की ओर से ऐसे प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं. इस कार्रवाई के पीछे सुप्रीम कोर्ट का आदेश बताया जा रहा है. हालांकि इसका असर अब सीधे उन हजारों परिवारों पर पड़ने की आशंका है, जिनकी आजीविका इन दुकानों और छोटे कारोबारों पर निर्भर है. विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच इस मुद्दे ने जनप्रतिनिधियों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं. यही वजह है कि अब मंत्री और विधायक इस समस्या का समाधान तलाशने में जुट गए हैं.

नोटिस से कारोबारियों में चिंता, चुनाव से पहले बढ़ा दबाव

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन का मामला उठाया गया है. सवाल यह है कि जिस भवन का निर्माण आवासीय उपयोग के लिए किया गया है, उसमें व्यावसायिक गतिविधियां किस आधार पर संचालित की जा रही हैं. बताया जा रहा है कि आदेश के अनुपालन की प्रक्रिया प्रदेशों की राजधानियों से शुरू की गई है. उत्तराखंड में इसका असर देहरादून में दिखाई देने लगा है.

आवासीय इलाकों की दुकानें बंद होने की कगार पर
राजधानी में बड़ी संख्या में दुकानदारों को नोटिस जारी होने के बाद कारोबारियों के बीच असमंजस की स्थिति है. कार्रवाई आगे बढ़ती है तो उन लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो सकता है, जिन्होंने आवासीय क्षेत्रों में दुकानें खोलकर अपना रोजगार शुरू किया है. इसका असर केवल कारोबारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इन प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कर्मचारियों और उनसे जुड़े परिवारों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है.

प्रभारी मंत्री के आवास पर जुटे विधायक और मंत्री
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए देहरादून के प्रभारी मंत्री सुबोध उनियाल के आवास पर जनप्रतिनिधियों की बैठक हुई. इसमें राजपुर विधायक एवं कैबिनेट मंत्री खजान दास, मसूरी विधायक एवं कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और कैंट विधायक सविता कपूर समेत अन्य जनप्रतिनिधि पहुंचे. बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारियों को भी बुलाया गया.

बैठक का मुख्य मुद्दा यही रहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए प्रभावित कारोबारियों को राहत देने का रास्ता कैसे निकाला जाए? जनप्रतिनिधियों की चिंता यह है कि यदि बड़ी संख्या में दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई होती है तो इसका राजनीतिक और सामाजिक असर भी देखने को मिल सकता है.

विधानसभा चुनाव से पहले हजारों परिवारों की आजीविका से जुड़ा यह मामला सरकार के लिए भी चुनौती बन गया है. एक तरफ न्यायालय के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करना है, तो दूसरी तरफ उन कारोबारियों की परेशानी का समाधान तलाशना है, जो सालों से इन स्थानों पर अपना व्यवसाय चला रहे हैं.

विदेशों में भी घरों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जाती हैं. देशभर में बड़ी संख्या में लोग इसी तरह अपना रोजगार चला रहे हैं. ऐसे में सरकार चाहती है कि प्रभावित लोगों को राहत देने के विकल्प तलाशे जाएं.
-सुबोध उनियाल, प्रभारी मंत्री, देहरादून

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