
नैनीताल, 15 अक्टूबर, 26. उत्तराखंड में नीट काउंसलिंग व एमबीबीएस एडमिशन के दौरान फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर आरक्षण का लाभ लेने के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने राजस्व और गृह सचिव से आरक्षण का लाभ लेने वाले सभी अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों के जांच के निर्देश दिए हैं
नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया. कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्व सचिव को सभी संदिग्ध सर्टिफिकेट्स की दो साल के भीतर गहराई से जांच एवं सत्यापन करने के निर्देश दिए हैं.
कई अभ्यर्थियों ने लगाए फर्जी प्रमाण पत्र
वहीं, सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि नीट की प्रथम और द्वितीय काउंसलिंग के दौरान कई अभ्यर्थियों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी (फ्रीडम फाइटर) कोटे के तहत फर्जी प्रमाण पत्र लगाए थे. जांच में पाया गया कि दस्तावेजों पर दर्ज प्रमाण पत्र संख्या किसी और की है और नाम किसी अन्य व्यक्ति का है.
याचिकाकर्ता की ओर से किए गए विस्तृत सत्यापन में यह भी खुलासा हुआ कि सिर्फ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ही नहीं, बल्कि ईडब्ल्यूएस यानी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र (डोमिसाइल) और अन्य कई दस्तावेज भी फर्जी तरीके से तैयार किए गए हैं.
770 छात्रों ने फर्जी कागजात से उठाया आरक्षण का लाभ
इन फर्जी दस्तावेजों के सहारे लगभग 770 ऐसे छात्रों ने आरक्षण का लाभ उठाया, जो उत्तराखंड के मूल निवासी नहीं हैं. जबकि, उनके स्कूल और कॉलेज तमिलनाडु, हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे अन्य राज्यों से संबंधित पाए गए.
कोर्ट में सरकार ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि इन अनियमितताओं की जांच के लिए पहले ही एक एसआईटी का गठन किया जा चुका है. जो मामले की जांच कर रही है.
राजस्व सचिव को प्रमाण पत्रों का करना होगा वेरिफिकेशन
वहीं, सरकार का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने राजस्व सचिव को निर्देश दिए कि वे इन सभी संदिग्ध प्रमाण पत्रों का सत्यापन सुनिश्चित करें. इन महत्वपूर्ण निर्देशों के साथ कोर्ट ने इस जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया.



