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शीतकाल के लिए विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट कर 11 नवंबर को होंगे बंद

रुद्रप्रयाग, 20 अक्टूबर, 26. विजयदशमी के पावन पर्व पर पंचकेदार के तीन प्रमुख धामों तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ, द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर और भगवान केदारनाथ के कपाट बंद होने की तिथियां विजयदशमी पर्व पर घोषित कर दी गई हैं. शीतकाल के आगमन के साथ ही हिमालय की ऊंची चोटियों पर स्थित इन धामों में नियमित दर्शन बंद हो जाएंगे और भगवान की चल विग्रह उत्सव डोलियां अपने-अपने शीतकालीन गद्दीस्थलों के लिए प्रस्थान करेंगी. शीतकाल के दौरान इन छह महीनों में भक्त ऊखीमठ, मक्कूमठ और अन्य शीतकालीन गद्दीस्थलों पर ही भगवान के दर्शन कर सकेंगे।

11 नवंबर को होंगे बाबा केदार के कपाट बंद
विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर को सुबह 8:30 बजे शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे. इसके बाद बाबा केदार की चल विग्रह उत्सव डोली फाटा और गुप्तकाशी होते हुए शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंचेगी. इसकी जानकारी डोली प्रभारी डीएस भुजवाण ने दी.

6 नवंबर को बंद होंगे तुंगनाथ के कपाट
हिमालय में सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट आगामी 6 नवंबर को विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद किए जाएंगे. पंचांग गणना के अनुसार, विजयदशमी पर शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ में कपाट बंद होने की तिथि घोषित की गई. इसके बाद 8 नवंबर को भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली मक्कूमठ पहुंचेगी, जहां शीतकाल में श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर सकेंगे. इसकी जानकारी बीकेटीसी प्रबंधक प्रकाश पुरोहित ने दी. पंचकेदारों में प्रथम केदार भगवान केदारनाथ, भगवान मदमहेश्वर (द्वितीय केदार), भगवान तुंगनाथ (तृतीय केदार), भगवान रुद्रनाथ (चतुर्थ केदार) और भगवान कल्पेश्वर (पंचम केदार) आते हैं।

16 नवंबर को बंद होंगे मदमहेश्वर के कपाट
द्वितीय केदार भगवान मदमहेश्वर धाम के कपाट 16 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद होंगे. इसके बाद भगवान की उत्सव डोली गौंडार में रात्रि विश्राम करेगी. 17 नवंबर को डोली गौंडार से रांसी, 18 नवंबर को रांसी से गिरिया और 19 नवंबर को गिरिया से ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंचेगी. यहां भगवान मदमहेश्वर की शीतकालीन पूजा संपन्न होगी. इसकी जानकारी वेदपाठी विश्व मोहन जमलोकी ने दी.

तीनों धामों की कपाट बंद होने की तिथियों की घोषणा के साथ ही शीतकालीन पूजा की तैयारियां भी तेज हो गई हैं. अब शीतकाल में श्रद्धालु ऊखीमठ और मक्कूमठ स्थित गद्दीस्थलों में भगवान के दर्शन कर सकेंगे.

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