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अस्पताल की ओपीडी की लाइन में लगे पिता की गोद में बच्चे ने तोड़ा दम, देखें वीडियो

पिथौरागढ़। अस्पताल की ओपीडी की लाइन में लगे पिता की गोद में बच्चे के दम तोड़ देने का हृदयविदारक वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो पिथौरागढ़ के जिला अस्पताल का है, जिसमें दिख रहा है कि एक बच्चे की मौत इलाज के अभाव में पिता की गोद में ही हो गयी। वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है।

इस हृदयविदारक वीडियो ने पूरे सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था को हिला कर रख दिया है। वीडियो में दिख रहा है कि एक बच्चे को लेकर उसका बाप जिला अस्पताल में बेटे का इलाज कराने पहुंचा, लेकिन समय पर उपचार न मिलने के कारण बच्चे की मौत हो जाती है।

पिथौरागढ़ जिला अस्पताल का है वीडियो

हालांकि वायरल वीडियो पिछले तीन-चार दिन पुराना है, लेकिन उत्तराखंड के चिकित्सा स्वास्थ्य की हीलाहवाली की जमकर पोल  खोल रहा है। वीडियो बीडी पांडे जिला अस्पताल का बताया जा रहा है। वीडियो बनाने वाला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े करता सुनाई दे रहा है, जिसमें बताया जा रहा है कि पिता गंभीर रूप से बीमार बच्चे को इमरजेंसी वार्ड में ले गया, लेकिन इमरजेंसी में देखने के बजाय उसे ओपीडी में भेज दिया जाता है। तभी बच्चा पिता की गोद में ही दम तोड़ देता है। वीडियो में अस्पताल परिसर में पिता कपड़े में लपेटे बेटे का शव गोद में बैठकर रो रहा है। उधर, बच्चे की मौत पर परिजन भी रो रहे हैं।

इस संबंध में जिला प्रशासन कहता है कि बच्चे के उपचार में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गयी है। इमरजेंसी में चेकअप के बाद जांच की गई तो बच्चे रक्त संबंधी बीमारी से ग्रसित था। बीमारी से ही बच्चे की मौत हुई है। अस्पताल की व्यवस्था पर उठाये जा रहे सवाल बेबुनियाद है। https://sarthakpahal.com/

सीएमओ ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
मुख्य चिकित्साधीक्षक डा. जेएन नबियाल का कहना है कि बच्चे के उपचार में कोई लापरवाही नहीं बरती गयी है। बच्चे की मौत रक्त संबंधी बीमारी की वजह से हुई है। इधर, इंटरनेट मीडिया पर वीडियो को लेकर जमकर कमेंट्स किये जा रहे हैं। उत्तराखंड की चिकित्सा व्यवस्था पर जमकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

डीजी हेल्थ ने गठित की कमेटी
महानिदेशक से मिले निर्देशके बाद प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. जेएस नबियाल ने वरिष्ठ फिजीशियन डा. एसए कुंवर, बाल रोग विशेषज्ञ डा. एसए नबियाल और इमरजेंसी मेडिकल आफीसर डा. सौरभ पांगती की तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, जो दो दिन के भीतर अपनी जांच सौंप देगी।

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