
देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी एवं प्राइवेट नर्सिंग कालेजों में प्रवेश के लिए आयोजित परीक्षा में पांच हजार में से सिर्फ 152 परीक्षार्थी ही पास हो पाये। उत्तराखंड नर्सिंग प्रवेश परीक्षा में 97 फीसदी युवा फेल हो गये।
50 फीसदी कटआफ था अनिवार्य
उत्तराखंड के सरकारी एवं प्राइवेट नर्सिंग कालेजों में प्रवेश के लिए आयोजित परीक्षा में पांच हजार में से सिर्फ 152 बच्चे ही परीक्षा पास कर पाये। इससे सरकारी व प्राइवेट नर्सिंग कालेजों में बीएस-सी नर्सिंग की सीटें खाली रहने की नौबत आ गयी है। उत्तराखंड में नर्सिंग प्रवेश परीक्षा के लिए इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने इस बार पास होने के 50 फीसदी की कटआफ अनिर्वाय कर दिया था।
अधिकांश बच्चे अंग्रेजी में खा गये गच्चा
इसमें से 20 नम्बर अंग्रेजी से जुड़े प्रश्न पूछे गये थे। अंग्रेजी में अधिकांश छात्रों के काफी कम नंबर आने से अधिकांश युवा फेल हो गये। वह निर्धारित पचास फीसदी कटआफ भी नहीं ला पाये। नर्सिंग कालेजों में प्रवेश के लिए एचएनबी मेडिकल कालेज विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा कराई जाती है। विश्वविद्यालय ने पहले कटआफ जारी नहीं किया था। सीटों के हिसाब से कटआफ घट-बढ़ जाती थी, पर 50 प्रतिशत कटआफ जरूरी होने से युवा प्रवेश के लिए सफल नहीं हो पाये। एचएनबी मेडिकल विश्विविद्यालय के कुलसचिव डा. एमके पंत ने बताया कि समस्या के समाधान के प्रयास किये जा रहे हैं। https://sarthakpahal.com/
प्रवेश के लिए चल रही काउंसलिंग
युवाओं के फेल होने का असर प्रवेश के लिए चल रही काउंसलिंग प्रक्रिया पर भी पड़ा है। काफी कम संख्या में युवा काउंसलिंग में शामिल हो रहे हैं, इससे सीटें खाली रहने की चिंता बढ़ गयी है। फेल होने से छात्र अब प्राइवेट कालेजों के चक्कर काटने को मजबूर होंगे। राज्य में प्राइवेट कालेजों में बीएस-सी नर्सिंग की दो हजार सीटें हैं। इन सीटों को नर्सिंग प्रवेश परीक्षा पास युवाओं से ही भरा जाता है। ऐसी स्थिति में प्राइवेट नर्सिंग कालेजों के सामने सीटें खाली रहने की नौबत आ गयी है। सरकारी नर्सिंग कालेजों में इस समय कुल 320 सीटें हैं, जिनमें से मात्र 152 युवाओं का ही चयन हो पाया है, बाकी 168 सीटें खाली रहने की स्थिति बन गयी है।



