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बदरीनाथ के कपाट खुलने से पहले नरेंद्रनगर राजदरबार में महारानी और सुहागिनों ने पिरोया तिल का तेल

नरेंद्रनगर (टिहरी), 7 अप्रैल। भगवान बदरी विशाल के नित्य प्रति महाभिषेक पूजा में प्रयुक्त होने वाले तिलों का तेल नरेंद्रनगर राजदरबार में पिरोया जा रहा है। टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह और अन्य सुहागिन महिलाओं द्वारा यह तीलों का तेल पिरोया जा रहा है। और फिर भगवान बदरी विशाल के तेल कलश गाडू घड़ा में इस तेल को भरा जाएगा। यह बदरीनाथ कपाट खुलने से पहले की अनिवार्य प्रक्रिया है, जिसे गाड़ू घड़ा (तेल कलश) यात्रा के नाम से जाना जाता है।
शोभा यात्रा के तहत नरेंद्रनगर राजदरबार से आज शाम को ऋषिकेश प्रस्थान करेगी। दो चरणों में शोभायात्रा तेल कलश बदरीनाथ धाम के पुजारी समुदाय डिमरियों के मूल ग्राम डिम्मर होते हुए बदरीनाथ यात्रा मार्ग से बदरीनाथ धाम 22 अप्रैल को पहुंच जाएगा। 23 अप्रैल को भगवान बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही गर्भ गृह में तेल कलश स्थापित कर दिया जाएगा। इसी तेल का उपयोग मंदिर में साल भर जलने वाली अखंड ज्योति के लिए भी किया जाता है। इसी तेल से भगवान बदरी विशाल का अभिषेक होगा।
तीलों का तेल पिरोये जाने की इस पूरी प्रक्रिया में 8 से 10 घंटे का समय लग जाता है। खास बात यह है कि जिन महिलाओं को इस कार्य के लिए चिह्नित किया जाता है, उन्हें परंपराओं का ज्ञान होना आवश्यक है। इसके अलावा अनुभव भी होना जरूरी है। हर कोई सुहागिन महिला इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकती है। वहीं जिनके परिवार में किसी की मृत्यु हुई हो उन महिलाओं को भी इस धार्मिक आयोजन में शामिल नहीं किया जाता है।
पूर्वजों की सदियों से स्थापित परंपरा का निर्वहन
महारानी माला राज्यलक्ष्मी शाह बताती हैं कि वे पूर्वजों की सदियों से स्थापित परंपरा का निर्वहन कर रही हैं। उन्होंने अपनी आने वाली पीढ़ी को भी इस धार्मिक कार्य करने की सीख दी है। वह बताती हैं कि टिहरी राजदरबार से जुड़ीं भविष्य की पीढ़ी भी बदरीनाथ मंदिर से जुड़ीं परंपराओं को निभाने के लिए तैयार है। खास तौर से इस आयोजन के लिए आई माला राज्यलक्ष्मी शाह की नातिनी का कहना है कि स्कूली शिक्षा और परीक्षा के कारण वो नहीं आ पाती थी, लेकिन अब यहां आकर इसमें शामिल होती रहेंगी।

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