
हरिद्वार, 25 जनवरी। हिंदुओं के धार्मिक स्थलों और उनके परिसर क्षेत्र में गैर हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित करने की मांग को लेकर कवायद तेज हो गई है। हरिद्वार डामकोठी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान श्री बदरीनाथ एवं श्री केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि आगामी अर्धकुंभ करोड़ों सनातन श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा महाआयोजन है, ऐसे में तीर्थ स्थलों की पवित्रता और धार्मिक स्वरूप बनाए रखने के लिए नीतिगत स्तर पर ठोस निर्णय अपेक्षित हैं।
बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि समिति के स्तर पर केदारनाथ और बदरीनाथ धाम के अधिसूचित क्षेत्रों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध से संबंधित प्रस्ताव लाने पर विचार किया जा रहा है। केदारनाथ क्षेत्र में यह प्रस्ताव पूरी घाटी को शामिल कर सकता है, जहां से यात्रा प्रारंभ होती है, जबकि बदरीनाथ में भी अधिसूचित सीमा के विस्तार पर चर्चा प्रस्तावित है। इस विषय में बीकेटीसी सरकार को अपनी मंशा से अवगत कराएगी।
हेमंत द्विवेदी ने कहा कि हरिद्वार में गंगा के पवित्र घाटों और प्रमुख धार्मिक क्षेत्रों को चिह्नित कर वहां प्रवेश व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक दृष्टि से पुनर्विचार किया जाना चाहिए। उनके अनुसार जहां सनातन आस्था से जुड़े अनुष्ठान, धार्मिक गतिविधियां और श्रद्धालुओं की आवाजाही अधिक होती है, इसलिए वहां विशेष प्रावधानों की आवश्यकता है। उन्होंने संकेत दिया कि शासन स्तर पर भी अर्धकुंभ से पूर्व इस विषय पर कोई निर्णय सामने आ सकता है। सरकार इस पर विचार मंथन कर रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में बीते वर्षों में की गई कार्रवाई का उल्लेख करते हुए उन्होंने तथाकथित ‘लैंड जिहाद’ के विरुद्ध की गई कार्रवाइयों को उदाहरण बताया। उनका दावा था कि वन क्षेत्रों और पर्वतीय इलाकों में अवैध निर्माणों पर सरकार द्वारा सख्ती दिखाई गई है। देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान पर जोर देते हुए हेमंत द्विवेदी ने कहा कि उत्तराखंड को देश-दुनिया में देवभूमि के रूप में जाना जाता है, जहां चारधाम सहित अनेक प्राचीन देवालय स्थित हैं और पवित्र नदियों का उद्गम भी यहीं से होता है। उन्होंने राज्य की धार्मिक विरासत को विशेष संरक्षण देने की आवश्यकता दोहराई।
देश के हर नागरिक को 77वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। जय हिंद! जय भारत!



