
नैनीताल, 2 मार्च। फाल्गुन की पूर्णिमा तिथि पर साल का पहला चंद्रग्रहण मंगलवार को लगेगा। तीन घंटे 27 मिनट तक लगने वाला ग्रहण दोपहर तीन बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज मंगलवार शाम को लगने जा रहे सूर्यग्रहण का यू ट्यूब से सीधा प्रसारण दिखाएगा। इसे ब्लड मून इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि पूर्ण ग्रहण के दौरान चंद्रमा गहरे लाल या तांबे के रंग जैसा दिखाई देगा। यानि कि जब चंद्रमा उदय होगा, तो उस पर पहले से ही ग्रहण चल रहा होगा। यह केवल 15-20 मिनट के लिए ही दिखाई देगा।
एरीज साइंस सेंटर प्रभारी डॉ वीरेंद्र यादव ने बताया कि आम जनता के लिए प्रत्यक्ष रूप से ग्रहण देखने की व्यवस्था शाम छह बजे से की गई है। खगोल प्रेमी चंद्र ग्रहण देखने के लिए एरीज आ सकते हैं। साथ ही अपने घर से भी इसे देख सकते हैं। ग्रहण को नग्न आंखों या फिर दूरबीन से देख सकते है। इस तरह की दुर्लभ मनमोहक खगोलीय घटनाएं हमारी जिज्ञासा के लिए शानदार अवसर हैं।
चंद्रग्रहण का समय
ग्रहण का छाया प्रवेश दोपहर दो बजकर 14 मिनट पर, ग्रहण का स्पर्श दोपहर तीन बजकर 20 मिनट, ग्रहण का सम्मिलन शाम चार बजकर 35 मिनट, ग्रहण का मध्यकाल शाम पांच बजकर चार मिनट, जबकि ग्रहण का मोक्ष शाम छह बजकर 47 मिनट पर रहेगा।
डा. यादव ने बताया कि पूर्ण चंद्र ग्रहण के समय सूर्य का कुछ प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल से होते हुए चंद्रमा पर पड़ता है। हमारा वायुमंडल सूर्यप्रकाश के रंगों में से बैंगनी और नीले रंगों को ज्यादा बिखेरता है और लाल और नारंगी रंगों को कम बिखेरता है।
सूर्यप्रकाश का लाल रंग लगभग सीधे चंद्रमा पर पड़ता है, जिससे चंद्रमा गहरे लाल रंग का प्रतीत होता है। आज के चंद्र ग्रहण में भी ऐसा रंग नजर आएगा। लाल रंग में दिखने के कारण इसे ब्लड मून कहते हैं। नैनीताल में सांय 6.15 बजे से आंशिक ग्रहण देखा जा सकेगा। उधर चंद्रग्रहण के दौरान मां नयना देवी मंदिर सहित पाषाण देवी मंदिर व हनुमानगढ़ स्थित मंदिर के कपाट बंद रहेंगे। इसके बाद शुद्धिकरण कर मंदिरों के पट खोल विधि-विधान से पूजा-अर्चना होगी।
सूतककाल में यह रहता प्रतिबंध
उत्तराखंड विद्वत सभा के अध्यक्ष आचार्य हर्षपति गोदियाल ने बताया कि सूतककाल के दौरान स्नान, पुण्य कार्य, व्रत, भगवान की मूर्ति का स्पर्श प्रतिबंध रहता है। लोग घरों पर ही प्रभु का स्मरण और दान कर पुण्य कमा सकते हैं।
सूतककाल कब है
ज्योतिषाचार्य आचार्य डा. सुशांत राज के अनुसार ग्रहण का सूतककाल सुबह छह बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा। सूतककाल में पूजा पाठ वर्जित होता है तथा मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं।



