
देहरादून, 19 जून। शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड ने एक नई उपलब्धि अपने नाम कर ली है. राज्य ने पिछले दो वर्षों के दौरान साक्षरता के मोर्चे पर राज्य ने प्रगति दर्ज करते हुए अपनी साक्षरता दर में करीब 14.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी हासिल की है. ये जानकारी राज्य के शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने दी है. उन्होंने बताया साल 2023-24 में राज्य की साक्षरता दर 83.8 प्रतिशत थी. वहीं वर्ष 2025 में यह बढ़कर 98.7 प्रतिशत तक पहुंच गई. इस उपलब्धि के साथ उत्तराखंड उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है जिन्होंने कम समय में साक्षरता के क्षेत्र में इतनी बड़ी छलांग लगाई है. राज्य सरकार का मानना है कि यह सफलता शिक्षा विभाग स्वयंसेवी संगठनों स्थानीय निकायों और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है.
देश के पूर्ण साक्षर राज्यों के नाम
1. मिजोरम, 2. गोवा(पश्चिमी भारत में यह दर्जा हासिल करने वाला पहला राज्य ), 3. त्रिपरा, 4. हिमाचल प्रदेश (पहाड़ी राज्यों में सबसे पहले इस मानक को छूने वाला राज्य), 5. सिक्किम और 6. उत्तराखंड (साक्षरता दर 98.7 प्रतिशत)। इसके अलावा केंद्रशासित प्रदेशों में यह दर्जा हासिल करने वाला लद्दाख पहला प्रदेश है, जिसे पूर्ण साक्षर होने का गौरव मिला है।
पूर्ण साक्षर राज्य घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी
राज्य में साक्षरता दर के निर्धारित मानकों से ऊपर पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य fully Literate State घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. केंद्र सरकार के नव भारत साक्षरता कार्यक्रम उल्लास के दिशा-निर्देशों के अनुसार यदि किसी राज्य की साक्षरता दर 95 प्रतिशत या उससे अधिक हो जाती है तो उसे पूर्ण साक्षर राज्य माना जा सकता है. इसी मानक के आधार पर राज्य सरकार ने यह प्रस्ताव तैयार किया था. जिसे कैबिनेट ने स्वीकृति प्रदान कर दी है. इस निर्णय को शिक्षा क्षेत्र में उत्तराखंड की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है.
केंद्र के मानकों के अनुरूप तैयार किया गया प्रस्ताव
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने 25 मई को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के संशोधित मानकों के अनुरूप राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था. प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया कि किसी भी राज्य या देश में शत-प्रतिशत साक्षरता हासिल करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं माना जाता. वृद्धावस्था, गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं, मानसिक एवं बौद्धिक अक्षमताएं जैसे कई कारण ऐसे होते हैं जिनकी वजह से कुछ लोग साक्षरता अभियानों का हिस्सा नहीं बन पाते. इसी वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने 95 प्रतिशत साक्षरता दर को पूर्ण साक्षरता का मानक निर्धारित किया है.
आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड की कुल आबादी (7 वर्ष के ऊपर) लगभग 1 करोड़ 23 लाख 46 हजार है। राज्य में व्यापक सर्वे के बाद अब केवल 1 लाख 31 हजार 986 व्यक्ति ही साक्षरता की श्रेणी से बाहर बचे हैं, जो कुल योग्य आबादी का मात्र 1.3 प्रतिशत है। यानी राज्य के 98.7 प्रतिशत नागरिक अब पूरी तरह पढ़ना, लिखना और बुनियादी गणना करना जानते हैं।
केंद्र सरकार ने माना है कि वृद्धावस्था, गंभीर बीमारी या बौद्धिक अक्षमता जैसी अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण व्यावहारिक ररूप से किसी भी राज्य में 100 प्रतिशत साक्षरता संभव नहीं है।
डा. मुकुल कुमार सती, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा
आबादी के महज 1.3 प्रतिशत लोग ही निरक्षर
उल्लास कार्यक्रम के तहत वर्ष 2025 के लिए किए गए आंकलन के अनुसार सात वर्ष से कम आयु के बच्चों को छोड़कर उत्तराखंड की अनुमानित जनसंख्या एक करोड़ 23 लाख चार हजार 601 आंकी गई है. इनमें केवल एक लाख 31 हजार 986 लोग ऐसे हैं जो अभी भी निरक्षर श्रेणी में आते हैं. यह संख्या राज्य की कुल पात्र आबादी का मात्र 1.3 प्रतिशत है. इसका अर्थ है कि राज्य के 98 प्रतिशत से अधिक लोग पढ़ने-लिखने की क्षमता रखते हैं. यही आंकड़े उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किए जाने का प्रमुख आधार बने हैं.
शिक्षा विभाग, स्वयंसेवी संस्थाओं, स्थानीय निकायों और नागरिकों के संयुक्त प्रयासों से उत्तराखंड ने यह अवसर हासिल किया है। अब सरकार का मुख्य फोकस इस साक्षरता दर को बनाये रखने और इसे सीधे रोजगार व कौशल विकास Skill Development से जोड़ने पर होगा।
(नोट: परंपरागत रूप से केरल हमेशा से देश का सबसे साक्षर राज्य रहा है, लेकिन केंद्र सरकार के इस नये डिजिटल, वित्तीय और व्यावहािक साक्षरता वाले उल्लास अभियान के मानकों के तहत प्रमाणित होने वाले राज्यों का क्रम यही है।)



