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स्थानीय युवकों ने राज्य सरकार द्वारा निहंगों पर कार्रवाई न होने पर पक्षपात का लगाया आरोप, चक्काजाम की दी धमकी

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रुद्रप्रयाग, 24 जून। कर्णप्रयाग और नागरासू में हाल ही में हुई घटनाओं को लेकर विभिन्न सामाजिक एवं क्षेत्रीय संगठनों ने राज्य सरकार से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। संगठनों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे व्यापक जनआंदोलन और चक्काजाम जैसे कार्यक्रमों पर विचार करेंगे।

नागरासू गुरुद्वारे में उपद्रव की घटना से क्षेत्र का माहौल खराब
जारी बयान में कहा गया कि कर्णप्रयाग में स्थानीय युवकों और कुछ निहंग सिखों के बीच हुए विवाद के बाद तलवार से हमले की घटना गंभीर चिंता का विषय है। वहीं नागरासू गुरुद्वारे में कथित तौर पर हुई तोड़फोड़, कब्जे और उपद्रव की घटनाओं से क्षेत्र में तनाव और असुरक्षा का माहौल बना है।

सरकार के मामले को हरिद्वार स्थानांतरित किये जाने पर उठाये सवाल
संगठनों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने मामले में कठोर कार्रवाई करने के बजाय स्थानीय युवकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की, जबकि कथित उपद्रवियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने मामले को चमोली और रुद्रप्रयाग से हटाकर हरिद्वार स्थानांतरित किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं।

स्थानीय युवकों के खिलाफ दर्ज मुकदमों की हो निष्पक्ष जांच
बयान में स्पष्ट किया गया कि उनका विरोध किसी धर्म या समुदाय विशेष से नहीं है। सिख समुदाय का उत्तराखंड के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है तथा प्रदेश में सदैव आपसी भाईचारा कायम रहा है। विरोध केवल उन लोगों से है जो कानून अपने हाथ में लेकर शांति व्यवस्था को प्रभावित करते हैं। संगठनों ने सरकार से मांग की है कि स्थानीय युवकों के खिलाफ दर्ज एफआईआर की निष्पक्ष समीक्षा की जाए, कथित हमलावरों और उपद्रवियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए तथा पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराई जाए। साथ ही यात्रा के दौरान हथियारों के प्रदर्शन और उपयोग को लेकर स्पष्ट नियम बनाने की भी मांग की गई है।

उचित कार्रवाईन होने पर चक्काजाम जैसे कार्यक्रम की धमकी
उन्होंने यह भी मांग की कि कर्णप्रयाग और नागरासू प्रकरण की जांच संबंधित जिलों की पुलिस के माध्यम से कराई जाए तथा उत्तराखंड के गुरुद्वारों के प्रबंधन में स्थानीय सिख समुदाय की भूमिका को प्राथमिकता दी जाए। संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो लोकतांत्रिक तरीके से जनआंदोलन और चक्काजाम जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। हालांकि प्रशासन की ओर से इस बयान पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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