
अयोध्या, 5 जुलाई, 26. अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित गड़बड़ी की जांच के बीच नया दावा सामने आया है. यह दावा देश के पूर्व गृह सचिव और पूर्व IAS अधिकारी एस. लक्ष्मीनारायणन ने किया है। उनका कहना है कि उनके परिवार की ओर से दान की गई करीब 5 करोड़ रुपये की सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस अब मंदिर परिसर में दिखाई नहीं दे रही है.
अप्रैल 2024 में किया था दान
एस. लक्ष्मीनारायणन के मुताबिक उनके परिवार ने अप्रैल 2024 में सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भेंट की थी. शुरुआती दिनों में इसे श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए रखा गया था. यह पांडुलिपि लगभग 147 किग्रा वजन है, जिसे तांबे, चांदी और सोने की परत से तैयार किया गया है। इसमें लगभग एक किलो 24 कैरेट सोने की परत चढ़ी हुई है।
‘अब मंदिर में नहीं दिख रही रामचरितमानस’
पूर्व अधिकारी का दावा है कि कुछ समय बाद रामचरितमानस को मंदिर से हटा दिया गया. उन्होंने कई बार ट्रस्ट से इसकी जानकारी मांगी, लेकिन अब तक स्पष्ट जवाब नहीं मिला. उनका कहना है कि दान देने के बाद शुरुआती 5 महीने तक इस स्वर्णजड़ित रामचरितमानस को गर्भगृह के पास श्रद्धालुओं के दर्शन और पूजा के लिए रखा गया था। उनका आरोप है कि इस बहुमूल्य दान के बदले उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की तरफ से कोई आधिकारिक रसीद भी नहीं दी गयी।
चंपत राय ने क्या कहा?
लक्ष्मीनारायणन के अनुसार, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने उन्हें बताया कि मंदिर में चढ़ाई गई हर भेंट को स्थायी रूप से प्रदर्शित करना संभव नहीं है. इसलिए सभी दान की गई वस्तुएं मंदिर में नहीं रखी जा सकतीं. नियमों के मुताबिक सुरक्षा और स्थान की उपलब्धता को देखते हुए कई मूल्यवान उपहारोंं को सुरक्षित लॉकर या स्ट्रांग रूम में रख दिया जाता है।
पहले से चल रही है चढ़ावे में गड़बड़ी की जांच
राम मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला 7 जून को सामने आया था. इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी का गठन किया और 25 जून को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई. सूत्रों के मुताबिक एसआईटी यह भी जांच कर रही है कि कहीं मंदिर से कथित तौर पर गायब हुए सोने के आभूषणों को पिघलाकर सोने की बिस्किट में तो नहीं बदला गया, ताकि उनकी पहचान मिटाई जा सके. फिलहाल इस संबंध में जांच जारी है.
दावे के बाद बढ़ी सियासी और प्रशासनिक हलचल
पूर्व IAS अधिकारी के इस दावे के बाद राम मंदिर में चढ़ावे के रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं. हालांकि ट्रस्ट की ओर से इस विशेष दावे पर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
फिलहाल पूरे मामले की जांच एसआईटी कर रही है. ऐसे में यह साफ होना बाकी है कि सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस को नियमित प्रक्रिया के तहत सुरक्षित स्थान पर रखा गया है या पूर्व IAS अधिकारी के दावों में कितना तथ्य है. जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी.
फिलहाल आधिकारिक तौर पर इसे चोरी नहीं कहा जा रहा है, बल्कि दानदाता का आरोप है कि मंदिर प्रशासन इसे दिखाने या इसकी वर्तमान सुरक्षित स्थिति की स्पष्ट जानकारी देने में पारदर्शिता नहीं बरत रहा है, जिससे उनकी चिंता बढ़ गयी है।



