
रुद्रप्रयाग, 6 जुलाई, 26. चमोली जिले सहित ऊपरी हिमालयी क्षेत्रों में रविवार रात से जारी मूसलाधार बारिश का असर अब रुद्रप्रयाग में भयावह रूप में देखने को मिल रहा है. अलकनंदा नदी विकराल रूप धारण करते हुए तेज बहाव के साथ वार्निंग लेवल के करीब पहुंच गई है. लगातार बढ़ते जलस्तर ने नदी किनारे बसे क्षेत्रों में चिंता बढ़ा दी है, जबकि प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है. एक दिन पहले जो शिव प्रतिमा दिखाई दे रही थी, आज वो अलकनंदा में जलमग्न है.
अलकनंदा में डूबी शिव प्रतिमा
अलकनंदा के बढ़ते जलस्तर का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नदी तट से करीब 20 से 25 मीटर दूर स्थापित भगवान शिव की विशाल प्रतिमा पूरी तरह जलमग्न हो गई है. नदी अपने सामान्य बहाव क्षेत्र से कई मीटर बाहर फैल चुकी है और चारों ओर पानी का विशाल सैलाब दिखाई दे रहा है. प्रतिमा का जलमग्न होना नदी के रौद्र स्वरूप का प्रत्यक्ष प्रमाण बन गया है.
नदी किनारे जाने पर रोक
लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण नदी किनारे स्थित सभी घाट पानी में समा चुके हैं. घाटों तक जाने वाले संपर्क मार्ग भी जलमग्न हो गए हैं, जिससे आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई है. प्रशासन ने एहतियातन नदी किनारे जाने पर रोक लगा दी है. पुलिस तथा संबंधित विभागों की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रही हैं.
रात में नदी के जलस्तर पर नजर रखने की अपील
अलकनंदा का बढ़ता जलस्तर अब रुद्रप्रयाग शहर के बेलनी क्षेत्र के लिए भी चिंता का कारण बन गया है. प्रशासन संभावित खतरे को देखते हुए हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है. किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने स्थानीय नागरिकों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है. उन्होंने कहा कि-लोग रात के समय नदी के जलस्तर पर नजर बनाए रखें. अनावश्यक रूप से नदी किनारे न जाएं. किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत प्रशासन और आपदा नियंत्रण कक्ष को दें.
-नंदन सिंह रजवार, आपदा प्रबंधन अधिकारी
बारिश के कारण सड़क पर मलबा आ गया है
बारिश से सड़क ध्वस्त होने के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं. मजबूरी में दूल्हा-दुल्हन, उनके परिजन और बाराती आवश्यक सामान के साथ पैदल मार्ग से आगे बढ़े और कठिन परिस्थितियों के बावजूद निर्धारित मुहूर्त पर त्रियुगीनारायण मंदिर पहुंचकर विवाह की सभी धार्मिक रस्में संपन्न कीं. इस दौरान कई बारातियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.

त्रियुगीनारायण भगवान शिव-पार्वती का विवाह स्थल है
त्रियुगीनारायण मंदिर वह पावन स्थल है, जहां पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था. इसी कारण देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और नवविवाहित जोड़े यहां विवाह के लिए पहुंचते हैं. लेकिन इस बार मौसम की मार ने इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना दिया.



