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TET की अनिवार्यता के विरोध में हरिद्वार में प्राथमिक शिक्षकों का फूटा गुस्सा, सड़कों पर उतरकर किया प्रदर्शन

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हरिद्वार, 17 जुलाई, 26. उत्तरांचल स्टेट प्राइमरी टीचर्स एसोसिएशन, जनपद हरिद्वार के बैनर तले शुक्रवार को जिलेभर के प्राथमिक शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता समाप्त करने, आरटीई अधिनियम-2009 एवं एनसीटीई की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से स्थायी छूट देने तथा पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद शिक्षकों ने प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) जितेंद्र कुमार को सौंपा।

प्रदर्शन का मुख्य कारण, सुप्रीम कोर्ट का फैसला
1 सितंबर 2025 को आए सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद सभी सेवारत शिक्षकों के लिए 31 अगस्त 2028 तक TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) पास करना अनिवार्य कर दिया गया था। जिसमें शिक्षकों का तर्क था कि 2011 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों के सेवाकाल में TET जैसी कोई परीक्षा अस्तित्व में ही नहीं थी। कई शिक्षक 15, 20 या 25 सालों से सेवा दे रहे हैं और सेवानिवृत्ति के करीब हैं। ऐसे में अचानक उन पर परीक्षा थोपना उनके भविष्य, नौकरी और पदोन्नति के साथ खिलवाड़ है।

हरिद्वार के अन्य जिलों में भी विरोध प्रदर्शन
जिले के विभिन्न विकासखंडों से पहुंचे हजारों शिक्षक विकास भवन परिसर में एकत्र हुए। सभा के बाद शिक्षक हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर विकास भवन से कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च करते हुए पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए केंद्र सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।

सभा को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष अश्वनी चौहान, जिला महामंत्री हेमेन्द्र चौहान तथा जिला कोषाध्यक्ष अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के बाद वर्षों से कार्यरत हजारों शिक्षक मानसिक तनाव और असमंजस की स्थिति में हैं। उनका कहना था कि आरटीई अधिनियम-2009 और एनसीटीई की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना से पहले विधिवत नियुक्त शिक्षकों पर बाद में लागू टीईटी की अनिवार्यता थोपना प्राकृतिक न्याय, समानता और वैध अपेक्षा के सिद्धांतों के विपरीत है।

ओपीएस बहाली की भी उठाई मांग
ज्ञापन में देशभर के शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने की मांग भी उठाई गई। अपर जिलाधिकारी जितेंद्र कुमार ने ज्ञापन प्राप्त कर उसे प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री तक भेजने का आश्वासन दिया।

इस दौरान जिलाध्यक्ष अश्वनी चौहान, जिला महामंत्री हेमेन्द्र चौहान, जिला कोषाध्यक्ष अरविंद कुमार शर्मा, राजीव शर्मा, मुकेश चौहान, मनमोहन, पंकज बिश्नोई, अनिल चमोली, केहर सिंह, प्रवीण कुमार, कुलदीप, बबलू अधाना, विकास शर्मा, सुखबीर सैनी, प्रविंद्र, आलोक शर्मा, इकबाल अहमद, शालिनी गोस्वामी, नूपुर शर्मा, अँजेश, वीर सिंह, अमरीष वर्मा, ईश्वर सिंह, कविता शर्मा, सरिता त्यागी, प्रतिभा सैनी सहित जिले के विभिन्न विकासखंडों से बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे। शिक्षक नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक व्यापक किया जाएगा।

देशव्यापी आंदोलन और वर्तमान स्थिति
लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच हाल ही में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद NCTE और केंद्र सरकार की ओर से कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं। RTE एक्ट में संशोधन के जरिये इन-सर्विस और पुराने शिक्षकों को इस लक्ष्मण रेखा से राहत देने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि जब तक सरकार इस पर अंतम लिखित नोटिफिकेशन जारी नहीं कर देती, तब तक शिक्षकों ने अपना आंदोलन और दबाव जारी रखने का फैसला किया है।

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