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30 जुलाई से शुरू हो रही है कांवड़ यात्रा, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेव पर कांवड़ियों के लिए नो एंट्री

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देहरादून, 18 जुलाई, 26. सनातन परंपरा में श्रावण केवल एक माह नहीं, बल्कि संपूर्ण चराचर सृष्टि की चेतना के नवीनीकरण का उत्सव है। इस वर्ष कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से प्रारंभ होकर 11 अगस्त तक चलेगी, जबकि शिवरात्रि का पावन पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा। 30 जुलाई को सावन मास का पहला दिन है और इसी के साथ इस पावन यात्रा की शुरुआत हो रही है। सावन का पहला सोवार 3 अगस्त को होगा।

11 अगस्त को शिवरात्रि के दिन महाजलाभिषेक के साथ समापन
उत्तराखंड ज्योतिष परिषद के अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य रमेश सेमवाल ने बताया कि चंद्र श्रावण मास 30 जुलाई से प्रारंभ हो रहा है, जो कि 11 अगस्त शिवरात्रि के दिन महाजलाभिषेक के साथ समाप्त होगी। सावन का पावन मास आत्मा को परमात्मा से जोड़ने, अंतर्मन को शुद्ध करने और महादेव की असीम अनुकंपा प्राप्त करने का सबसे चैतन्य काल माना जाता है। सावन के सोमवार के दिन भगवान शंकर और माता पार्वती की संयुक्त पूजा-अर्चना भक्तों के जीवन के सभी कष्टों को दूर कर उन्हें सुख-समृद्धि प्रदान करती है। ज्योतिषाचार्य रमेश सेमवाल ने बताया कि सर्वप्रथम भगवान परशुराम ने कांवड़ यात्रा की थी।

उन्होंने इसके पीछे के पौराणिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जब विषपान के कारण भगवान शंकर के शरीर में अत्यंत गर्मी उत्पन्न हो गई थी, तब उनकी इस तपन और व्याकुलता को शांत करने के लिए सभी देवताओं ने उन पर शीतल गंगाजल अर्पित किया था। यही कारण है कि श्रावण मास में महादेव को शीतलता प्रदान करने के लिए उन पर निरंतर जल, गंगाजल या दूध चढ़ाने की पावन परंपरा सदियों से चली आ रही है।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर पाबंदी
उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिली एनसीआर के प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था को देखते हुए कई फैसले लिए हैं। उत्तराकंड के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह साफ किया गया कि देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे कांवड़ यात्रियों के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। कांवड़ यात्रियों को निर्धारित पारंपरिक मार्गों से ही भेजा जायेगा। प्रशासन ने (विशेषकर मेरठ और पश्चिमी यूपी क्षेत्र में) 10 फीट से ऊंची कांवड़ ले जाने पर रोक लगाई है। इसके अलावा सभी कांवड़ यात्रियों को यात्रा के दौरान एक वैध पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य कर दिया गया है।

इस बार श्रद्धालुओं के लिए पहली बार डिजिटल व्यवस्था लागू की गयी
इस बार सावन की कांवड़ यात्रा में यदि कोई श्रद्धालु रास्ता भटक जाए, अचानक तबीयत बिगड़ जाए, किसी हादसे का शिकार हो जाए या पुलिस और प्रशासन से तुरंत संपर्क करना हो तो उसे इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बस मोबाइल निकालिए, सामने लगे क्यूआर कोड को स्कैन कीजिए और पल भर में पूरी व्यवस्था आपकी स्क्रीन पर होगी। हापुड़ जिला पुलिस ने कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सुगम और तकनीक से जोड़ने के लिए प्रदेश में पहली बार ऐसी डिजिटल व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है।

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