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Marma Therapy आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के 107 प्वाइंट्स में छिपा है मरीजों के रोगों का उपचार

देहरादून, 24 जुलाई, 26. आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में तमाम विधाएं हैं जिसके जरिए मरीजों के रोगों का उपचार किया जाता है. इसी क्रम में मर्म चिकित्सा एक ऐसी विधि है जिसके चलते दर्द को दूर किया जाता है. खास बात यह है कि इस विधि के जरिए घुटना, कमर, जोड़े, मसल्स पेन समेत अन्य दर्द की तकलीफों में आराम दिया जा सकता है. यही नहीं, इस मर्म चिकित्सा की खास बात यह है कि इसमें कोई भी मेडिसिन देने की जरूरत नहीं होती है बल्कि दो-तीन मिनट के इलाज से ही मरीज ठीक हो जाता है. साथ ही ये काफी अधिक सस्ता भी है. आखिर क्या है मर्म चिकित्सा? इस विधि से मरीजों का इलाज कैसे होता है ? आइये जानते हैं…

बता दें कि मर्म चिकित्सा आयुर्वेद की एक प्राचीन पद्धति है. इसमें शरीर के खास मर्म बिंदुओं पर हल्का दबाव या स्पर्श देकर ऊर्जा प्रवाह और शारीरिक संतुलन सुधारने का काम किया जाता है. खास बात ये है कि इस चिकित्सा से दर्द, तनाव में काफी ज्यादा राहत मिलती है. यही वजह है कि मर्म चिकित्सा के मरीजों की संख्या भी बढ़ती जा रही है.

107 बिंदुओं में छिपा राज


मर्म चिकित्सा में शरीर के 107 मर्म बिंदुओं को महत्वपूर्ण माना जाता है. जिनके जरिए दर्द से राहत दिया जाता है. मर्म चिकित्सा से गर्दन, पीठ, कमर और पैरों के दर्द में राहत मिलती है. इसके साथ ही इसे मानसिक शांति, बेहतर नींद और शरीर के संतुलन से भी जोड़ा जाता है.

मर्म चिकित्सा विधा एक वरदान
आयुर्वेद में मर्म उन संवेदनशील बिंदुओं को कहा जाता है, जहां मांस, शिरा, स्नायु, अस्थि और संधि जैसे शरीर के प्रमुख तत्त्वों का संगम होता है. आयुर्वेद के सुश्रुत संहिता के अनुसार मानव शरीर में 107 मर्म बिंदुओं का वर्णन है, जिन्हें प्राण ऊर्जा के महत्त्वपूर्ण केंद्र माना जाता है.

मर्म चिकित्सा में इन बिंदुओं पर हल्का स्पर्श, दबाव या हल्के मालिश जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है. जिससे शरीर की अवरुद्ध ऊर्जा प्रवाह को संतुलित करने, कार्यक्षमता बेहतर करने और शारीरिक-मानसिक आराम पहुंचाने में मदद मिलती है. यही वजह है कि आयुर्वेदाचार्य, मर्म चिकित्सा विधा को एक वरदान के रूप में देख रहे हैं. इससे मरीज को दर्द से काफी अधिक राहत मिलती है.

आयुर्वेद के सुश्रुत संहिता में वर्णित 107 बिंदु हैं. जिनका प्रयोग करके मर्म चिकित्सा की जाती है. यानी मर्म चिकित्सा, इन सभी 107 बिंदुओं पर ही आधारित है. ऐसे में रोगी ने इन बिंदुओं को चिन्हित करके उपचार किया जाता है. उन्हें लाभ दिया जाता है.
-वैद्य पंकज कुमार बच्चस, आयुर्वेदाचार्य

साथ ही कहा की मर्म चिकित्सा की खास बात यह है कि इसमें बहुत कम समय लगता है. यानी दो से तीन मिनट में ही मरीज को दर्द से राहत मिलने लग जाता है. यही नहीं, इस चिकित्सा में पैसा बहुत कम खर्च होता है. यानी अगर कोई मरीज दर्द से पीड़ित है तो वो कम समय और बिना पैसा खर्च किए, मर्म चिकित्सा विधि से राहत पा सकता है.

मर्म चिकित्सा में कैसे होता है उपचार
उन्होंने बताया जब कोई मरीज उनके पास आता है तो उसके किस जगह पर दर्द हो रहा है. उसको देखते हुए 107 बिंदुओं में से उसका चयन किया जाता है. दर्द को ठीक करने के लिए 5 से 6 बिंदुओं को चिन्हित किया जाता है. मर्म चिकित्सा के जरिए मुख्य रूप से साइटिका, स्लिप डिस्क, घुटनों में दर्द, अर्थराइटिस, माइग्रेन के साथ ही मस्कुलर स्केलेटन दर्द का इलाज किया जाता है. उनके पास इस तरह के तमाम मरीज आ रहे हैं. उन्होंने बताया मुख्य रूप से मरीज को लगातार 7 दिन तक उपचार दिया जाता है. अगर जरूरत पड़ती है तो 11 दिनों तक भी उपचार दिया जाता है.

मर्म चिकित्सा में उपचार का प्रोटोकॉल
उन्होंने कहा मरीजों के इलाज के लिए एक प्रोटोकॉल भी बनाया गया है. जिसके जरिए उनका इलाज किया जाता है. जब कोई मरीज उनके पास आता है जिसे बॉडी में कही भी दर्द हो रहा है तो फिर सबसे पहले उसके दर्द का उपचार किया जाता है. और दर्द निवारण के लिए मर्म चिकित्सा का इस्तेमाल किया जाता है. इसके बाद आयुर्वेद में दिए गए विधियों के जरिए रोगी के अन्य तकलीफों को पहचाना जाता है. ऐसे में अगर मरीज को योग करने की जरूरत होती है तो उन्हें योगाचार्य के पास भेजा जाता है. यही नहीं, अगर मरीज को पंचकर्म दिए जाने की जरूरत होती है तो वो, सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है.

मर्म चिकित्सा में दर्द से तत्काल राहत
अन्य चिकित्सा पद्धतियों में किसी मरीज को दर्द से तत्काल राहत दिए जाने को लेकर मेडिसिन या फिर इंजेक्शन की सुविधा उपलब्ध है. इस तरह की सुविधा क्या आयुर्वेद में भी उपलब्ध है जिसके सवाल पर आयुर्वेदाचार्य ने कहा कि मर्म चिकित्सा में कुछ बिंदु ऐसे भी हैं जिसके जरिए तत्काल दर्द से राहत दिया जा सकता है. उनके पास तमाम ऐसे मरीज आते हैं जिनको दर्द से तत्काल राहत, मर्म चिकित्सा के जरिए दिया जाता है.

मर्म चिकित्सा में हो रही रिसर्च
मर्म चिकित्सा विधि में रिसर्च किए जाने के सवाल पर आयुर्वेदाचार्य ने कहा सबसे महत्वपूर्ण रिसर्च यही होती है कि रोगियों को उपचार के बाद कितना लाभ मिल रहा है. इसके लिए पूरी रिपोर्ट भी तैयार की जा रही है. वर्तमान समय में मर्म चिकित्सा का पाठ्यक्रम भी तमाम यूनिवर्सिटी में पढ़ाया भी जा रहा है. ऐसे में नए जो आयुर्वेद के वैद्य आ रहे हैं, वो लोग मर्म चिकित्सा की जानकारी ले रहे हैं.

उन्होंने बताया मर्म चिकित्सा, इसलिए भी काफी महत्वपूर्ण विधा है क्योंकि इसमें मरीज को ज्यादा पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं होती. साथ ही ज्यादा समय भी नहीं देना होता है. ऐसे में लोगों को इस चिकित्सा विधा को अपनाने की जरूरत है. इससे मरीजों को काफी बेहतर लाभ मिल रहे हैं. उनके पास तमाम ऐसे मरीज भी हैं जो 6 महीना पहले इलाज करा कर गए थे, अब उन्हें दर्द से काफी राहत है.

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