
देहरादून, 20 अगस्त, 26. उत्तराखंड में सरकारी राशन वितरण प्रणाली में चौंकाने वाला घपला सामने आया है. दरअसल, प्रदेश में मौजूद 23 लाख से अधिक राशन कार्ड धारकों की जांच में 18 हजार 600 राशन कार्ड धारक ऐसे पाए गए हैं, जो राशन लेने के लिए पात्र नहीं थे. ऐसे में इन 18 हजार 600 परिवारों के राशन कार्ड को निरस्त कर दिया गया है. प्रदेश भर में मौजूद राशन कार्ड धारकों का अप्रैल, मई और जून में सत्यापन किया गया. इसमें इन अपात्र परिवारों की जानकारी सामने आई.
सत्यापन में हजारों कार्ड अपात्र पाए गये
राशन कार्ड धारकों के सत्यापन में पता चला कि हजारों की संख्या में ऐसे परिवार पाए गए हैं, जो बड़े-बड़े बंगलो में रह रहे हैं और उनके पास गाड़ियां भी हैं. बावजूद इसके वह फ्री का राशन या फिर सब्सिडी वाले राशन को सालों से ले रहे थे. प्रदेश में इस तरह के मामले सबसे अधिक नैनीताल, देहरादून, उधम सिंह नगर और पौड़ी जिले में सामने आए हैं. ऐसे में राशन वितरण व्यवस्थाओं पर सवाल भी खड़े होने लगे हैं.
14-15 लाख सफेद और गुलाबी कार्डों का कोटा है निर्धारित
इसके अलावा एक पहलू यह भी है कि भारत सरकार और राष्ट्रीय खाद्यान्न सुरक्षा अधिनियम के तहत उत्तराखंड के लिए अधिकतम 14 से 15 लाख सफेद और गुलाबी कार्ड बनाने का कोटा निर्धारित है. इसके अलावा, करीब 10 लाख पीला कार्ड बनाने का कोटा है. कुल मिलाकर उत्तराखंड में 24 लाख राशन कार्ड बनाए जा सकते हैं. जबकि वर्तमान समय में उत्तराखंड राज्य में 23.35 लाख राशन कार्ड धारक मौजूद है.
अपात्र लोगों की वजह से नहीं बन रहे थे नए राशन कार्ड
उत्तराखंड में बड़ी संख्या में राशन कार्ड धारकों की संख्या होने के कारण जरूरतमंदों के नए राशन कार्ड नहीं बन पा रहे थे, क्योंकि भारत सरकार के नियम के तहत राशन कार्ड निरस्त होने के सापेक्ष ही नए राशन कार्ड जारी करने की व्यवस्था थी. लेकिन लोग अपात्र होने के बावजूद भी अपना राशन कार्ड निरस्त नहीं करवा रहे थे.
जिलावार अपात्र पाए गए राशनकार्डो की संख्या
देहरादून में 2886, टिहरी गढ़वाल में 1515, हरिद्वार में 1576, पौड़ी गढ़वाल में 1798, रुद्रप्रयाग में 317, उत्तरकाशी में 449, चमोली में 1063, नैनीताल में 4247, बागेश्वर में 225, अल्मोड़ा में 463, उधम सिंह नगर में 1926, पिथौरागढ़ में 1573 और चंपावत जिले में 562 अपात्र राशन कार्ड पाए गए.
प्रदेश में 23 लाख से ज्यादा राशन कार्ड उपभोक्ता
उत्तराखंड में कुल राशन कार्ड होल्डर्स की संख्या 23.35 लाख से अधिक है. जिसमें पीला कार्ड धारकों की संख्या करीब 9 लाख 35 हजार, गुलाबी कार्ड धारकों की संख्या करीब 1 लाख 84 हजार और राज्य खाद्य योजना यानी बीपीएल (सफेद कार्ड) धारकों की संख्या करीब 12 लाख 15 हजार है. लेकिन 28 अप्रैल से 29 जून 2026 के बीच 8 चरणों में हुए सत्यापन के दौरान पाया गया कि 18 हजार 600 राशन कार्ड धारक ऐसे हैं, जिनके जीवन स्तर में काफी सुधार हुआ है. बावजूद इसके ये हजारों परिवार फ्री या फिर सब्सिडी वाले राशन का लाभ ले रहे थे. जिसके चलते पात्र लाभार्थियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. लिहाजा इन सभी अपात्र राशन कार्ड धारकों के राशन कार्ड को निरस्त कर दिया गया.
भारत सरकार करती है कार्ड की संख्या निश्चित
राज्य में राशन कार्ड की संख्या भारत सरकार की ओर से निश्चित है. ऐसे में नया राशन कार्ड तभी जारी किया जा सकता है, जब गलत राशन कार्ड धारकों के राशन कार्ड को निरस्त किया जाए. इसके लिए प्रदेश भर में विशेष अभियान चलाया गया जिसमें जिला प्रशासन को भी शामिल किया गया था।
उत्तराखंड में 18600 राशन कार्ड निरस्त
प्रदेश भर में अभियान के तहत जो 18 हजार 600 राशन कार्ड निरस्त किए गए हैं, उसके पीछे की मुख्य वजह, संबंधित परिवार का इनकम बढ़ना है. परिवार के किसी सदस्य की सरकारी नौकरी लगना, परिवार के कार्ड धारक की मृत्यु होना और इनकम टैक्स बेनेफिशियरी शामिल है. लिहाजा, वर्तमान समय में इन वजहों को देखते हुए राशन कार्ड को निरस्त किया गया है. किसी परिवार के आय में वृद्धि होने की जानकारी जिला प्रशासन को इस अभियान में शामिल करने के बाद स्थानीय लेवल पर जांच कर मिली है. ऐसे में जांच समिति की ओर से दिए गए सुझाव के आधार पर ही राशन कार्ड को निरस्त किया गया है.
इस तरह का अभियान प्रदेश में लगातार चलना चाहिए. हालांकि, विभाग की ओर से साल में एक दो बार इस तरह के अभियान को संचालित किया जा रहा है. वर्तमान समय में सरकारी मशीनरी, एसआईआर समेत अन्य कामों में व्यस्त है. ऐसे में जैसे ही सरकारी मशीनरी फ्री होती है, उसके बाद फिर से प्रदेश भर में अभियान चलाया जाएगा.
-बंशीलाल राणा, आयुक्त, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता



