
हैदराबाद, 20 अगस्त, 26. भारतीय रेलवे अपने सबसे बड़े कायाकल्प के दौर से गुजर रहा है. इस बदलाव की सबसे बड़ी पहचान बनकर उभरी है ‘वंदे भारत एक्सप्रेस’. भारत सरकार ने भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए एक मेगा मास्टरप्लान तैयार किया है, जिसके तहत साल 2030 तक देश की पटरियों पर 800 से ज्यादा वंदे भारत ट्रेन सेट दौड़ाने का लक्ष्य रखा गया है. यह ट्रेन अब न सिर्फ आधुनिक रेलवे की पहचान बन चुकी है, बल्कि रेलवे की कमाई का एक बहुत बड़ा जरिया भी बन गई है.
यात्रियों की संख्या में 34% तक बढ़ोतरी
वंदे भारत ट्रेनों की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें सफर करने वाले यात्रियों का आंकड़ा हर साल नए रिकॉर्ड बना रहा है. रेल मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में जहां 2.97 करोड़ लोगों ने वंदे भारत से सफर किया था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या लगभग 34 प्रतिशत बढ़कर 3.98 करोड़ पहुंच गई. साल 2019 में जब नई दिल्ली से वाराणसी के बीच देश की पहली वंदे भारत ट्रेन शुरू हुई थी, तब से लेकर अब तक 9.1 करोड़ से अधिक यात्री इस प्रीमियम ट्रेन सेवा का लाभ उठा चुके हैं.
कई रूट्स पर 100% से ज्यादा डिमांड
देश के कई प्रमुख रूट ऐसे हैं जहां वंदे भारत में पैर रखने की जगह नहीं है. तिरुवनंतपुरम-मंगलुरु, नई दिल्ली-वाराणसी और सिकंदराबाद-विशाखापत्तनम जैसे बेहद व्यस्त रेल मार्गों पर सीटों की मांग इतनी ज्यादा है कि यहां सवारी क्षमता 100% से भी ऊपर दर्ज की जा रही है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मुख्य स्टेशनों के अलावा बीच के स्टेशनों से भी यात्रियों द्वारा लगातार टिकटों की बुकिंग की जाती है.
रेलवे की तिजोरी में बरसे पैसे
यात्रियों की बढ़ती संख्या का सीधा फायदा रेलवे के राजस्व को मिल रहा है. दक्षिण रेलवे के आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2024-25 में वंदे भारत से होने वाली कमाई जहां 540.65 करोड़ रुपये थी, वह वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 803 करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है.
रेलवे अब वंदे भारत को सिर्फ दिन के सफर तक सीमित नहीं रख रहा है. लंबी दूरी और रात के सफर को आरामदायक बनाने के लिए ‘वंदे भारत स्लीपर’ ट्रेनों की शुरुआत की जा चुकी है. शुरुआती दौर में ही स्लीपर सर्विस को बंपर रिस्पॉन्स मिला है, जहां 1.21 लाख से ज्यादा यात्रियों ने सफर किया और ट्रेनें पूरी क्षमता के साथ चलीं.
सरकार का मुख्य मकसद इस नेटवर्क को इतना मजबूत करना है ताकि हवाई सफर और सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले हाई-पेइंग पैसेंजर्स को तेज गति, विश्वस्तरीय सुविधाओं और प्रीमियम सर्विस के दम पर रेलवे की तरफ आकर्षित किया जा सके.



