
हरिद्वार, 28 अगस्त, 26. विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में 1 अरब से अधिक लोग विभिन्न रूपों में धूम्रपान या तंबाकू की लत से जुड़े हैं. इसी रिपोर्ट के अनुसार भारत में धूम्रपान करने वाले वाले लोगों की संख्या 7 करोड़ से 10 करोड़ के बीच है. धूम्रपान से लोग कैंसर समेत अनेक बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं. ऐसे में उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज की एक रिसर्च धूम्रपान छुड़ाने में मददगार साबित हो रही है. प्राचीन आयुर्वेदिक सिद्धांतों के आधार पर निकोटीन युक्त हर्बल दंडिका (हर्बल बीड़ी) तैयार की है।
अब आसानी से छूटेगी स्मोकिंग, ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज ने बनाई हर्बल बीड़ी, ऐसे होता है रजिस्ट्रेशन और फ्री इलाज
स्मोकिंग की लत छुड़ाने के लिए नई पहल
धूम्रपान की लत छोड़ने की कोशिश कर रहे लोगों के लिए ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज के अंगदतंत्र विभाग ने एक नई पहल की है. इसमें तेदूं के पत्ते के अंदर शलकी, लाक्षा, मुलैठी (मधुयष्ठी) जैसी लगभग 15 औषधीय जड़ी-बूटियों का मिश्रण भरा गया है। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, आयुर्वेदाचार्यों और शोधार्थियों ने निकोटीन मुक्त औषधीय धूम्रपान दंडिका यानी हर्बल बीड़ी तैयार की है. चिकित्सकों के अनुसार इसका उद्देश्य धूम्रपान करने वाले व्यक्ति की मनोवैज्ञानिक तलब को कम करते हुए धीरे धीरे तंबाकू और निकोटीन से दूरी बनाने में मदद करना है. खास बात यह है कि धूम्रपान छोड़ने के लिए यहां के डॉक्टर बीड़ी, सिगरेट छोड़ने की बजाय धूमपान ही करा रहे हैं.
15 आयुुर्वेदिक जड़ी बूड़ियों का मिश्रण है इस हर्बल बीड़ी में
ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज के अंगदतंत्र विभाग के विशेषज्ञों ने प्राचीन आयुर्वेद के आचार्यों जैसे चरक, सुश्रुत और वागभट्ट के बताए गए आयुर्वेदिक सिद्धांतों के आधार पर इस हर्बल बीड़ी को तैयार किया है. इसमें तंबाकू और निकोटीन का इस्तेमाल नहीं किया गया है. आर्युवेद में इसे धूमपान विधि कहा जाता है. तंबाकू की जगह हर्बल बीड़ी में तेंदु के पत्ते के अंदर शलकी, लाक्षा और मधुयेष्ठी जैसी 15 आयुर्वेदिक दवाएं भरी गईं हैं.
ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज में अंगदतंत्र विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर, डॉ. भावना मित्तल ने बताया कि-धूम्रपान छोड़ना कई लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है. इसी को ध्यान में रखते हुए आयुर्वेदिक औषधियों से यह धूमपान दंडिका यानी हर्बल स्मोकिंग स्टिक तैयार की गई है. इसमें तंबाकू की जगह आयुर्वेदिक दवाएं भरी गई हैं. इसका इस्तेमाल चिकित्सकीय निगरानी में कराया जा रहा है.
-डॉ भावना मित्तल, असिस्टेंट प्रोफेसर, ऋषिकुल आयुर्वेद कॉलेज, हरिद्वार
हर्बल स्मोक स्टिक के शुरुआती परिणाम उत्साहजनक
डॉ प्रगति ने बताया कि कॉलेज की ओपीडी में पिछले एक महीने से धूम्रपान छोड़ने के इच्छुक लोगों को चिकित्सकों की निगरानी में हर्बल स्मोक स्टिक यानी हर्बल बीड़ी का पान कराया जा रहा है. शुरुआती परिणाम उत्साहजनक मिले हैं. शोध को आगे भी जारी रखा जा रहा है. उन्होंने बताया कि प्रारंभिक चरण में इसके अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं. 15 लोगों ने स्मोकिंग की लत छोड़ने के लिए रजिस्ट्रेशन भी करवा लिया है. लोगों से अपील है कि कोई भी आकर हमारे यहां रजिस्ट्रेशन करवा सकता है और पूरा इलाज निःशुल्क है. उनका प्रयास है कि लोग अधिक से अधिक इसका लाभ लें और स्मोकिंग की लत को छोड़ें.
ऐसे होता है रजिस्ट्रेशन
ऋषिकुल आयुर्वेदिक कॉलेज में पढ़ाई के साथ साथ ओपीडी भी चलती है. यहां लोगों को निशुल्क आयुर्वेद इलाज उपलब्ध कराया जाता है. धूम्रपान की लत छोड़ने के लिए सबसे पहले यहां काउंटर पर आकर दस रुपए की सरकारी फीस देकर पर्ची बनवानी पड़ेगी. उसके बाद चिकित्सक उस व्यक्ति की काउंसलिंग करेंगे. काउंसलिंग में आयु, धूम्रपान का समय, ब्रीथ टेस्ट, वजन, शुगर, बीपी और थायरॉयड जैसी बीमारियों की जानकारी जुटाई जाती है. सब कुछ परीक्षण करने के बाद डॉक्टर ही व्यक्ति को हर्बल बीड़ी देंगे. व्यक्ति को हर्बल बीड़ी पीने के बारे में भी सभी जानकारियां दी जाती हैं. उसके बाद स्मोकिंग छोड़ने तक डॉक्टरों की देखरेख में ही सारी प्रक्रियाएं होती हैं.
विशेष नोट:- विशेषज्ञों का कहना है कि इस हर्बल दंडिका का सेवन केवल डाक्टरों की चिकित्सकीय देखरेख और सलाह पर ही किया जाना चाहिए।



