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वीर चंद्र सिंह गढ़वाली विवि में छात्रा की मौत का मामला गरमाया, आक्रोशित छात्रों का प्रदर्शन, DM ने मांगी रिपोर्ट

पौड़ी (भरसार), 31 अगस्त। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के भरसार स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय में बीएससी हॉर्टिकल्चर चतुर्थ वर्ष की छात्रा की इलाज के दौरान मौत हो गई. छात्रा का ऋषिकेश में इलाज चल रहा था. छात्रा की मौत से आक्रोशित साथी छात्राओं ने सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में विरोध जताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए.

अब पूरा मामला जानिए
छात्राओं के अनुसार शनिवार रात बीएससी हॉर्टिकल्चर चतुर्थ वर्ष में अध्ययनरत छात्रा मधु यादव की अचानक तबीयत खराब हो गई थी. मधु यादव मूल रूप से पंतनगर की रहने वाली बताई जा रही है. छात्राओं के मुताबिक मधु को सर्दी और बुखार की शिकायत थी. उसकी तबीयत बिगड़ने पर साथी छात्राओं ने विश्वविद्यालय परिसर में उपलब्ध मेडिकल सुविधा से उपचार दिलाने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि वहां उसे अपेक्षित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल सकी.

छात्रा को श्रीनगर हायर सेंटर रेफर किया गया था
इसके बाद विश्वविद्यालय की एंबुलेंस से मधु को उपचार के लिए पाबौ अस्पताल ले जाया गया. छात्राओं का आरोप है कि पाबौ पहुंचने के बाद विश्वविद्यालय की ओर से अपनी एंबुलेंस उपलब्ध कराने से मना कर दिया गया, जिसके बाद सरकारी एंबुलेंस की मदद से उसे पौड़ी अस्पताल ले जाया गया. पौड़ी में उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे श्रीनगर रेफर किया गया.

छात्रा को रविवार को ऋषिकेश रेफर किया गया
छात्राओं के मुताबिक श्रीनगर में भी जब मधु की तबीयत में सुधार नहीं हुआ, तो रविवार को उसे ऋषिकेश ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान रविवार को उसकी मौत हो गई. छात्रा की मौत की खबर विश्वविद्यालय परिसर में पहुंचते ही साथी छात्राओं में शोक के साथ आक्रोश फैल गया.

मौके पर मजिस्ट्रेट नियुक्त
परिसर में बने तनाव को देखते हुए छात्रों की मांगों को सुनने और स्थिति को शांत कराने के लिए एक मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी को तुरंत विश्वविद्यालय परिसर भेजा गया है।

मामले में लिखित शिकायत व आधिकारिक रिपोर्ट तलब की गयी है और जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
स्वाति एस भदौरिया, जिलाधिकारी, पौड़ी गढ़वाल

मेडिकल व्यवस्था पर उठे सवाल
छात्राओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि विश्वविद्यालय परिसर में बेहतर और पर्याप्त मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध होती तो मधु को समय पर उपचार मिल सकता था और उसकी जान बच सकती थी. छात्राओं का कहना है कि विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अध्ययन करते हैं और ऐसे में परिसर में आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए बेहतर चिकित्सा व्यवस्था, चिकित्सकीय स्टाफ और पर्याप्त संसाधनों का होना बेहद जरूरी है.

मधु की तबीयत खराब होने के बाद छात्राओं ने हर संभव मदद करने की कोशिश की, लेकिन हमें विश्वविद्यालय प्रशासन से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया. एंबुलेंस उपलब्ध कराने में भी परेशानी हुई और छात्राओं को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक मरीज को ले जाने के दौरान काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.
-रिधम, छात्रा

वार्डन के व्यवहार पर भी छात्राओं में भारी नाराजगी
छात्राओं ने विश्वविद्यालय की वार्डन की कार्यप्रणाली और व्यवहार पर भी सवाल उठाए. उनका आरोप है कि मुश्किल समय में छात्राओं को अपेक्षित सहयोग नहीं मिला और उनके साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया.

छात्राओं की निष्पक्ष जांच की मांग
छात्राओं का कहना है कि एक छात्रा की गंभीर बीमारी की स्थिति में विश्वविद्यालय प्रशासन को उनके साथ खड़ा होना चाहिए था, लेकिन उन्हें ऐसा सहयोग नहीं मिला. छात्राओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि मधु की मौत के वास्तविक कारणों और उसे समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में हुई किसी भी प्रकार की कमी की जांच होनी चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय की मेडिकल और एंबुलेंस व्यवस्था को बेहतर करने की भी मांग की, ताकि भविष्य में किसी अन्य छात्र-छात्रा को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

जिलाधिकारी गढ़वाल को इस पूरे मामले में जांच करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही विश्वविद्यालय में छात्र छात्राओं का जो विरोध चल रहा है, उसके लिए एक मजिस्ट्रेट अधिकारी को मौके पर भेजकर तत्काल बच्चों की समस्याओं का समाधान करवाया जाए.
-आनंद स्वरूप, आयुक्त गढ़वाल मंडल

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