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1 लाख स्टाइपेंड की मांग को लेकर प्रदेश के रेजिडेंट डाक्टरों का कार्य बहिष्कार, बेपटरी स्वास्थ्य सेवाएं

देहरादून, 14 सितंबर, 26. राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन जारी है. पहले एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों ने धरना दिया. अब पीजी रेजिडेंट डॉक्टर भी अपनी मांगों को लेकर पिछले 8 दिन से धरने पर बैठे हैं. हालांकि, एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों की मांग पूरी होने के बाद उनका धरना खत्म हो चुका है, लेकिन पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों का धरना जारी है. डॉक्टरों का कहना है कि उनका स्टाइपेंड लंबे समय से नहीं बढ़ाया गया है. जबकि, पड़ोसी राज्यों में उन्हें अपेक्षाकृत ज्यादा स्टाइपेंड दिया जा रहा है।

डाक्टरों की स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग

रेजिडेंट डॉक्टरों
वर्तमान में रेजिडेंट डाक्टरों को 60 से 70 हजार स्टाइपेंड मिल रहा, जो कई सालों से नहीं बढ़ा है। वे इसे बढ़ाकर अन्य राज्यों और केंद्र संस्थानों के समकक्ष कम से कम एक लाख 10 हजार प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं। डाक्टरों का तर्क है कि वे हफ्ते में 80 से 100 घंटे तक की कठिन ड्यूटी करते हैं और मेडिकल फीस भी ज्यादा है, इसलिए यह बढ़ोतरी पूरी तरह जायज है। बता दें कि अभी फिलहाल पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों को 71,000 रुपए मिल रहा है. जबकि, आंदोलन कर रहे पीजी रेजिडेंट डॉक्टर 1,10,000 रुपए स्टाइपेंड की मांग कर रहे हैं. पूरे प्रदेशभर में 500 से ज्यादा डॉक्टर आंदोलनरत हैं।

लिखित शासनादेश जारी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
डाक्टरों का आरोप है कि शासन-प्रशासन के साथ वार्ता और ज्ञापनों के बावजूद अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। रेजिडेंट डाक्टरों ने साफ किया है कि जब तक सरकार स्टाइपेंड बढ़ाने का आधिकारिक शासनादेश GO जारी नहीं करती, दब तक उनका कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। उधर, अस्पताल प्रशासन वरिष्ठ चिकित्सकों और फैकल्टी के भरोसे वैकल्पिक व्यवस्था बनाने में जुटा है।

स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग लंबे समय से लंबित
पीजी रेजिडेंट्स डॉक्टरों के प्रतिनिधि डॉ. आकाश चौहान ने बताया कि एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों ने 7 सितंबर से आंदोलन शुरू किया था. जबकि, 8 सितंबर से पीजी रेजिडेंट्स भी आंदोलन में शामिल हो गए. उनका कहना है कि अस्पताल में इमरजेंसी, आईसीयू और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं में पीजी रेजिडेंट्स की अहम भूमिका रहती है. इसके बावजूद स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग लंबे समय से लंबित है.

OPD सेवायें ठप, मरीज परेशान
रेजिडेंट डाक्टरों के कार्य बहिष्का के कारण अस्पतालों की ओपीडी सेवाएं, वार्ड राउंड और रुटीन आपरेशन ठप हो रहे हैं। हालांक स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए डाक्टरों ने आपातकालीन और आईसीयू सेवायें जारी रखी हां। डॉ. आकाश चौहान ने कहा कि स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल समेत संबंधित अधिकारियों और मेडिकल कॉलेज प्रशासन के समक्ष पिछले पांच-छह महीने से लगातार मांग रखी जा रही थी. एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड तो बढ़ा दिया गया है, लेकिन उनकी नहीं बढ़ाई है. ऐसे में अब पीजी रेजिडेंट्स की मांग पर भी सरकार से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद है.

आठ दिन से धरने पर बैठे हैं रेजिडेंट डाक्टर
उन्होंने बताया कि आंदोलन के आठवें दिन भी काफी संख्या में जूनियर और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर धरने पर बैठे हैं. पीजी रेजिडेंसी तीन साल की होती है, जिसमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष के रेजिडेंट शामिल होते हैं. तृतीय वर्ष के कुछ रेजिडेंट परीक्षा के कारण धरनास्थल पर मौजूद नहीं हैं, लेकिन उन्होंने आंदोलन को अपना समर्थन दिया है.

सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर भी मांग के समर्थन में आंदोलन में शामिल
वहीं, सीनियर रेजिडेंट भी मांग के समर्थन में आंदोलन में शामिल हैं. डॉक्टरों की मुख्य मांग है कि पीजी रेजिडेंट्स के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी कर इसे कम से कम पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के स्तर तक किया जाए. डॉक्टरों का कहना है कि सरकार की ओर से उन्हें लिखित आश्वासन दिया जाए. ताकि, उनकी मांग को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके.

रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष डॉ. आकाश चौहान ने कहा कि डॉक्टर बारिश समेत तमाम परिस्थितियों के बावजूद अपनी मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं. आंदोलन के कारण अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है और मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. उन्होंने सरकार से जल्द वार्ता कर समस्या का समाधान करने की मांग उठाई है.

एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों का बढ़ चुका स्टाइपेंड
गौर हो कि बीती 11 सितंबर को धामी मंत्रिमंडल की बैठक में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर्स का स्टाइपेंड को 17 हजार रुपए से बढ़ाकर 25 हजार रुपए प्रतिमाह करने पर मंजूरी दी थी. जबकि, पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड को लेकर कोई निर्णय लिया गया. पीजी रेजिडेंट डॉक्टरों को उम्मीद थी कि उनका भी स्टाइपेंड बढ़ेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. ऐसे में वो धरना दे रहे हैं.

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