छात्र रेगुलर कोर्स के साथ अब दूसरी डिग्री भी ले सकेंगे, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय की पहल

देहरादून, 31 अक्टूबर, 26. नियमित पढ़ाई के साथ दूसरी शैक्षणिक डिग्री हासिल करने का विकल्प भी छात्रों के पास है। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों के जरिये छात्र अपनी नियमित पढ़ाई जारी रखते हुए अतिरिक्त योग्यता हासिल कर सकते हैं। इससे उनके लिए रोजगार और उच्च शिक्षा के नए अवसर भी बन सकते हैं।
एक साथ दो अलग-अलग कोर्स करने की अनुमति
इस बीच यूजीसी ने जारी की गई गाइडलाइन में साफ किया है कि पीएचडी को छोड़कर किसी भी कोर्स को इसमें शामिल किया जा सकता है। इसके साथ ही इसके तहत छात्रों को एक साथ ऐसे दो अलग-अलग कोर्सों को भी करने की अनुमति मिलेगी, जिसमें एक फिजिकल मोड और एक आनलाइन मोड में होगा।
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने डीडी कालेज में आयोजित दीक्षारंभ कार्यक्रम में छात्रों को यह जानकारी दी। उन्होंने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और विभिन्न पाठ्यक्रमों के बारे में बताया। कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य उच्च शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाना है। खासकर दूरदराज के उन क्षेत्रों में, जहां आर्थिक और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण नियमित शिक्षा हासिल करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में अतिरिक्त शैक्षणिक योग्यता का महत्व बढ़ा है। मुक्त विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम छात्रों को अपनी नियमित पढ़ाई के साथ दूसरी मान्य उपाधि हासिल करने का अवसर देते हैं।
इस दौरान असिस्टेंट रीजनल डायरेक्टर डा. गोविंद सिंह ने विभिन्न योजनाओं और पाठ्यक्रमों की जानकारी दी। कालेज की प्राचार्य डा. ज्योत्सना रमोला ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि डा. क्षमा कौशिक ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में शिक्षक और विभिन्न संकायों के छात्र मौजूद रहे।
एक साथ दो अलग-अलग कोर्सों को करने की अनुमति
इस बीच यूजीसी ने जारी की गई गाइडलाइन में साफ किया है कि पीएचडी को छोड़कर किसी भी कोर्स को इसमें शामिल किया जा सकता है। इसके साथ ही इसके तहत छात्रों को एक साथ ऐसे दो अलग-अलग कोर्सों को भी करने की अनुमति मिलेगी, जिसमें एक फिजिकल मोड और एक आनलाइन मोड में होगा।
एक ही समय एक साथ किए दोनों ही कोर्स वैध रहेंगे
महत्वपूर्ण बात यह है कि इस व्यवस्था के साथ एक ही समय एक साथ किए दोनों ही कोर्स वैध रहेंगे। अभी तक की व्यवस्था में ऐसा नहीं था। एक समय में एक ही कोर्स वैधता थी। साथ ही उसे ही करने की अनुमति थी। आस्ट्रेलिया, अमेरिका सहित दुनिया के दूसरे देशों के उच्च शिक्षण संस्थान पहले से ही ऐसे कोर्स संचालित कर रहे हैं। गौरतलब है कि यूजीसी ने इससे जुड़ा ड्राफ्ट अप्रैल में ही जारी किया था, जिसे बाद में शिक्षा मंत्रालय ने मंजूरी दी थी।



