
यमकेश्वर, 1 नवम्बर. उत्तराखंड में जनहित के मुद्दों और पहाड़वासियों के अधिकारों को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। उक्रांद के वरिष्ठ नेता डॉ. शक्तिशैल कपरवाण ने मुख्य सचिव, उत्तराखंड शासन को पत्र भेजकर सरकार को 14 नवंबर 2026 तक का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा तक जनहित से जुड़ी मांगें पूरी नहीं हुईं तो 15 नवंबर से आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।
गैरसैंण सत्र में मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराजगी
डॉ. कपरवाण ने अपने पत्र में कहा कि 27 और 28 अक्टूबर 2026 को गैरसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र के दौरान उत्तराखंड क्रांति दल की ओर से सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण जनहित की मांगें रखी गई थीं। पार्टी का कहना है कि इन मांगों को लेकर पूर्व में भी कई बार ज्ञापन दिए गए और सरकार से इन्हें कानूनी रूप देने की मांग की गई, लेकिन विधानसभा सत्र में जनहित से जुड़ा एक भी कानून पारित नहीं किया गया।
उन्होंने इसे प्रदेश की जनता की अपेक्षाओं की अनदेखी बताते हुए कहा कि लगातार अनसुनी हो रही जनसमस्याओं के कारण लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है।
14 नवंबर तक का अल्टीमेटम, 15 से आर-पार की लड़ाई
उक्रांद नेता ने सरकार से मांग की है कि संलग्न ज्ञापन में उठाए गए सभी जनहित के मुद्दों पर 14 नवंबर तक ठोस निर्णय लेकर उन्हें पूरा किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस समय सीमा के भीतर मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं करती है तो 15 नवंबर 2026 से पहाड़वासियों और मूलनिवासियों को न्याय दिलाने के लिए आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।
डीएम पौड़ी को भी भेजी पत्र की प्रतिलिपि
इस मामले में डॉ. कपरवाण ने जिलाधिकारी पौड़ी गढ़वाल को भी पत्र की प्रतिलिपि भेजी है। उन्होंने जिला प्रशासन से जनहित की मांगों के समाधान में सहयोग करने का अनुरोध किया है।
डॉ. कपरवाण के इस अल्टीमेटम से प्रदेश की राजनीति में जनहित के मुद्दों को लेकर नई हलचल के संकेत मिल रहे हैं। अब देखना होगा कि राज्य सरकार 14 नवंबर की समय सीमा से पहले इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है।



