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हिमाचल और उत्तराखंड के बीच टोंस नदी पर बन रहे किशाऊ बांध को लेकर ग्रामीणों का जबरदस्त विरोध

विकासनगर, 1 नवम्बर, 26. उत्तराखंड और हिमाचल की सीमा को अलग करने वाली टोंस नदी पर प्रस्तावित किशाऊ बांध परियोजना का विरोध लगातार हो रहा है. इसी कड़ी में तमाम गांवों से सैकड़ों महिलाएं और पुरुष हाथों में तख्तियां लेकर क्वानू पहुंचे. जहां उन्होंने जोरदार नारेबाजी की. साथ ही उन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन, मकान, खेत खलिहान को बर्बाद होने से बचाने की मांग रखी. इसके अलावा उन्होंने किशाऊ बांध परियोजना का निर्माण क्वानू से आगे से करने की मांग उठाई.

क्वानू में जबरदस्त प्रदर्शन


दरअसल, देश के सबसे बड़े बांधों में से एक किशाऊ बांध को लेकर लगातार विरोध हो रहा है. किशाऊ बांध संघर्ष समिति के बैनर तले मैलोत शम्भर क्वानू में सैकड़ों की संख्या में विभिन्न गांवों से ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया. जिसमें महिला, पुरुष, बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हुए. उन्होंने नारेबाजी करते हुए कहा कि उनका यह विरोध बांध के विरोध में नहीं है, बल्कि अपने खेत-खलिहान और गांव बचाने के लिए है.

बांध को प्रस्तावित स्थल से 10-15 किलोमीटर आगे शिफ्ट करने की मांग
ग्रामीणों का साफ कहना था कि ‘हम विकास के दुश्मन नहीं हैं. देश को बिजली और पानी चाहिए’. हमारी सिर्फ एक मांग है कि बांध को किशाऊ के मूल स्थान पर ही बनाया जाए या वर्तमान प्रस्तावित स्थल से 10-15 किलोमीटर आगे मीनस की तरफ शिफ्ट किया जाए. बांध निर्माण के कारण पारंपरिक गांव, उपजाऊ कृषि भूमि एवं सांस्कृतिक धरोहर जलमग्न होने के कगार पर हैं जिससे सैकड़ों परिवार बेघर और आजीविका विहीन हो जाएंगे.

चिंता में ग्रामीण, जल, जंगल और जमीन पर होगा गंभीर संकट
ग्रामीणों का कहना था कि इस परियोजना से क्षेत्र का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ेगा, जल, जंगल और जमीन पर गंभीर संकट उत्पन्न होगा. जन-सहभागिता के अभाव में स्थानीय निवासियों के हितों को ध्यान में रखे बिना एवं उचित मुआवजे के बिना इस परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है. जिससे क्षेत्रीय जनता में गहरा असंतोष है.

ग्रामीणों ने SDM के माध्यम से सीएम को भेजा ज्ञापन
ग्रामीणों का तर्क है कि मौजूदा सर्वे के मुताबिक, बांध बनने से क्वानू क्षेत्र की सबसे उपजाऊ जमीन, जहां साल में तीन फसल होती है, और कई राजस्व गांव पूरी तरह जलमग्न हो जाएंगे. पुश्तैनी जमीन जाने के बाद उनके पास पलायन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा. वहीं, आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए कालसी उप जिलाधिकारी मौके पर पहुंचे. ग्रामीणों ने उनके माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजा.

साल भर से ग्रामीण कर रहे हैं प्रदर्शन
ग्रामीणों ने बताया कि यह उनका पहला प्रदर्शन नहीं है. पिछले एक साल में वे मुख्य सचिव उत्तराखंड, जिलाधिकारी देहरादून और कई स्तर पर ज्ञापन दे चुके हैं. चकराता के विधायक प्रीतम सिंह भी विधानसभा में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा चुके हैं. अब सभी की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं. ग्रामीणों ने कहा है कि अगर उनकी बात नहीं सुनी गई तो वे अपने आंदोलन को और तेज करने को मजबूर होंगे.

ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर के अपना प्रदर्शन किया है. किशाऊ बांध संघर्ष समिति मैलोत शम्भर क्वानू की ओर से मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया है. यह ज्ञापन जिलाधिकारी को भेज दिया जाएगा. जहां से शासन स्तर पर भेजा जाएगा.
– प्रेम लाल, एसडीएम, चकराता

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