
केएस रावत। कोटद्वार के सिद्धबली बाबा के दर्शन के लिए ऊंची सीढ़ियां चढ़ना दिव्यांगों और बुजर्गों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होता था, लेकिन अब लिफ्ट लग जाने से उनकी राह आसान हो जायेगी। हनुमान जयंती और रामनवमी पर यहां विशेष पूजा और उत्सव होते हैं। दिसंबर में तीन दिवसीय भव्य महोत्सव भी मनाया जाता है। यहां गुरु गोरखनाथ को सिद्धि प्राप्त हुई थी, इसलिए इसे सिद्धबली कहा जाता है। यहां सिद्ध बाबा और हनुमान जी की दो पीड़ियां विराजमान हैं।
उत्तराखंड के कोटद्वार में खोह नदी के किनारे स्थित सिद्धबली मंदिर हनुमान जी को समर्पित एक अत्यंत प्रसिद्ध और जागृत सिद्धपीठ है। यह मंदिर अपनी मान्यताओं के अनुसार भक्तों की हर मनोकामना पूरी करने के लिए जाना जाता है, जिसके कारण यहाँ मन्नत पूरी होने पर भंडारे (लंगर) आयोजित किए जाते हैं और भक्तों की भीड़ के कारण 2034 तक भंडारे की बुकिंग हो चुकी है।
श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत
शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्ति, व्हीलचेयर का उपयोग करने वाले श्रद्धालु और घुटनों के दर्द से परेशान बुजुर्ग अब बिना किसी कष्ट के सीधे मंदिर परिसर तक पहुंच सकेंगे। यह लिफ्ट मंदिर की पहाड़ी को ध्यान में रखकर विशेष रूप से डिजान की गयी है, जिससे सुरक्षा और सुविधा दोनों का ध्यान रखा गया है।
पर्यटन और आस्था को बढ़ावा
सिद्धमंदिर न केवल एक धार्मिक केंद्र है, बल्कि कोटद्वार का प्रमुख पर्यटन स्थल भी है। लिफ्ट की सुविधा मिलने से यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होगी। यह कदम सुगम्य भारत अभियान की दिशा में एक बेहतरीन उदाहरण है, जहां धार्मिक स्थलों को सभी के लिए समावेशी बनाया जा रहा है। सिद्धबली बाबा की कृपा से अब हर भक्त चाहे वह बुजुर्ग हो या दिव्यांग सुगमता से दर्शन कर सकेंगे।



