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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत, अग्रिम जमानत मंजूर

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प्रयागराज, 25 मार्च। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के यौन शोषण के मामले में को राहत दे दी है. कोर्ट ने उनकी 50 हजार निजी मुचलके पर अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली है. इससे पूर्व कोर्ट ने इस मामले में आदेश सुरक्षित करते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी.

यह आदेश न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा ने मंगलवार को सुनाया. इससे पूर्व सुनवाई के दौरान अविमुक्तेश्वरानंद व मुकुंदानंद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप कुमार, अधिवक्ता राजर्षि गुप्ता व सुधांशु कुमार, राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल, शासकीय अधिवक्ता पतंजलि मिश्र व एजीए प्रथम रूपक चौबे ने पक्ष रखा. जबकि आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से रीना एन सिंह ने अपने तर्क प्रस्तुत किए.

इससे पहले सुनवाई के दौरान अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से आरोपों को गलत बताते हुए कहा गया कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है. यह भी दलील दी गई कि वादी आशुतोष का खुद का आपराधिक इतिहास है. हालांकि राज्य सरकार की ओर से अग्रिम जमानत अर्जी का विरोध किया गया. अर्जी सीधे हाईकोर्ट में दाखिल करने और उसकी पोषणीयता पर भी सवाल उठाया गया. कोर्ट ने याचियों के अधिवक्ता को आशुतोष ब्रह्मचारी के पूरक शपथ पत्र की कॉपी प्रदान करने का निर्देश भी दिया है.

आशुतोष ब्रह्मचारी ने जिला न्यायालय में दाखिल किया था वाद
बता दें कि, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद व
अन्य के खिलाफ बटुकों के साथ कथित रूप से यौन शोषण का आरोप लगाते हुए आशुतोष ब्रह्मचारी ने जिला न्यायालय में वाद दाखिल किया था. जिस पर पॉक्सो स्पेशल कोर्ट ने सुनवाई करते हुए 21 फरवरी को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच करने का आदेश दिया. कोर्ट के आदेश के बाद प्रयागराज के 22 मार्च को झूंसी थाने में बीएनएस की धाराओं में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई.

एफआईआर दर्ज होने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अग्रिम जमानत की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की. जिस पर 27 फरवरी को हाईकोर्ट ने अगले आदेश तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी और मामले में सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. हाईकोर्ट के निर्देश के बाद 12 मार्च को सभी पक्षों को जवाब दाखिल करना था, लेकिन शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर हाईकोर्ट में जवाब नहीं दाखिल किया था. जबकि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और राज्य सरकार ने अपना जवाब दाखिल कर दिया था. 17 मार्च को आशुतोष ब्रह्मचारी हाईकोर्ट पहुंचे और 883 पेज का जवाब दाखिल किया.

बता दें कि इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीते 27 फरवरी को शंकराचार्य की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी थी और फैसले को सुरक्षित रख लिया.

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