
लैंसडौन, 23 अप्रैल। लैंसडौन का नाम बदलकर जसवंत गढ़ छावनी करने के प्रस्ताव का विरोध लगातार बढ़ रहा है। विभिन्न स्थानीय संगठनों ने इस प्रस्ताव को जनभावनाओं के विपरीत बताया है। संगठनों ने आगामी 28 अप्रैल को सांकेतिक बाजार बंदी के साथ ही धरना-प्रदर्शन व जुलूस निकालने का फैसला किया है।
यह निर्णय लैंसडौन होटल एसोसिएशन, कैंट होटल एसोसिएशन, व्यापार मंडल, होटल एसोसिएशन जीएम ग्रुप और नागरिक मंच के पदाधिकारियों की बैठक में लिया गया। संगठनों ने सुझाव दिया कि वीर योद्धा हीरो ऑफ द नेफा राइफलमैन जसवंत सिंह रावत की स्मृति में युवाओं को रोजगार देने वाला संस्थान या आधुनिक चिकित्सालय स्थापित किया जाना चाहिए जिसका लाभ आमजनों को मिल सके। लोगों का कहना है कि नाम बदलने से इस ऐतिहासिक पर्टयन नगरी की पहचान पर संकट आ सकता है। लोगों का कहना है कि शहर पहले ही पलायन की मार झेल रहा है और नाम बदलना इस समस्या का समाधान नहीं है।
बैठक में लैंसडौन होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सतीजा, कैंट होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सलीम रहमान, नागरिक मंच के अध्यक्ष महिपाल रावत, व्यापार मंडल अध्यक्ष राजेश अग्रवाल और होटल एसोसिएशन जीएम ग्रुप के अध्यक्ष सक्षम खंडेलवाल आदि उपस्थित रहे। 28 अप्रैल को केवल बाजार ही बंद नहीं रहेगा, बल्कि संगठनों ने धरना-प्रदर्शन और जुलूस निकालने की भी योजना बनाई है।
कैंट बोर्ड ने 10 अप्रैल को पारित किया था प्रस्ताव
केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत छावनी परिषद ने लैंसडौन का नाम जसवंत गढ़ करने के संबंध में बीती 10 अप्रैल को आयोजित बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित किया था। इस बारे में आम जनता से 30 दिन के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। कैंट बोर्ड के प्रस्ताव के विरोध में विभिन्न संगठन लामबंद होने लगे हैं।



