‘विदाई तो एक दस्तूर है जमाने का, पर दिल से रिश्ता कभी खत्म नहीं होता’ बिथ्याणी डिग्री कालेज में सीनियर्स की भावपूर्व विदाई

केएस रावत। महायोगी गुरु गोरखनाथ राजकीय महाविद्यालय बिथ्याणी, यमकेश्वर, पौड़ी गढ़वाल में षष्ठम सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं के लिए भव्य विदाई समारोह का आयोजन बड़े ही उत्साह और गरिमामय वातावरण में किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के आयोजन कक्ष को आकर्षक ढंग से सजाया गया, जिससे पूरे कार्यक्रम में उल्लास का माहौल बना रहा।
प्राचार्य ने सीनियर्स छात्रों के उज्जवल भविष्य की कामना की

हंसी-मजाक, बीते दिनों की खट्टी-मीठी यादें और भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाओं के साथ जूनियर छात्रों ने अपने सीनियर्स को गले लगाकर विदा किया। आपके जाने से भले ही कालेज के ये गलियारे सूने लगें, लेकिन आपकी सफलता की गूंज कालेज में हमेशा रहेगी। कालेज के वो लेक्चर, कैंटीन की बातें और दोस्तों के साथ बिताई पल अब इतिहास बन गये हैं। इस अवसर पर कालेज के प्राचार्य ने छात्रों को जीवन के नये संघर्षों के लिए प्रेरित किया और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले आप सभी के उज्जवल भविष्य की मंगल कामना।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुई। इसके बाद जूनियर छात्रों ने अपने सीनियर साथियों के सम्मान में विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी। इन प्रस्तुतियों ने सभी उपस्थित लोगों का मन मोह लिया और वातावरण को भावुक तथा आनंदमय बना दिया।
नम आंखों से सीनियर्स की विदाई
समारोह के दौरान षष्ठम सेमेस्टर के छात्र-छात्राओं ने अपने महाविद्यालय जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने शिक्षकों के मार्गदर्शन और मित्रों के साथ बिताए गए यादगार पलों को स्मरण करते हुए भावुक अभिव्यक्ति दी। कई छात्रों की आंखें नम हो गईं, जिससे इस अवसर की भावनात्मक गहराई स्पष्ट रूप से झलक रही थी।
महाविद्यालय के प्राचार्य एवं अन्य प्राध्यापकों ने छात्रों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने छात्रों को जीवन में आगे बढ़ने, कठिनाइयों का सामना करने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर प्राचार्य प्रो.डॉ. योगेश कुमार शर्मा, डॉ. गिरिराज सिंह, विनय कुमार पांडेय, डॉ. उमेश त्यागी, डॉ. राम सिंह सामंत, डॉ. नीरज नौटियाल, सुनील प्रसाद, पूजा रानी, डॉ. हिमानी बडोनी, डॉ.केशव प्रसाद डबराल, श्री चेतन भट्ट, डॉ. मनवीर सिंह कंडारी, उर्वशी जुयाल, नरेश राणा और बीना देवी उपस्थित रहीं।
”मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता हौंसलों से उड़ान होती है।”



