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पहाड़ की अस्मिता बचाने के लिए धारकोट ग्रामसभा का ‘जल-जंगल-जमीन’ हेतु शंखनाद

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यमकेश्‍वर, 14 मई। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में अपनी पैतृक संपत्ति और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने की मुहिम अब जोर पकड़ने लगी है। यमकेश्‍वर डांडा मंडल के अंतर्गत न्याय पंचायत किमसार के ग्राम सभा धारकोट में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में ग्रामीणों ने एकमत होकर अपनी ‘जल, जंगल और जमीन’ की सुरक्षा के लिए कई कड़े और ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किए हैं। ग्राम सभा धारकोट में आयोजित इस विशेष बैठक की अध्यक्षता ग्राम प्रधान हेमा देवी ने की। यमकेश्वर ब्लाक की ग्रामसभा धारकोट द्वारा लिया गया यह निर्णय उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में जनजागरूकता और स्वशासन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह कदम न स्थानीय संसाधनों को बचायेंगे, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक मजबूत नींव भी रखेंगे।

बैठक में क्षेत्र के समस्त गणमान्य प्रधान. क्षेत्रीय पटवारी और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। स्थानीय निवासियों ने बढ़-चढ़कर इस चर्चा में भाग लिया और गांव के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कड़े नियम बनाने पर जोर दिया। बैठक के दौरान गांव की अस्मिता और संसाधनों को बचाने के लिए कई प्रस्तावों पर मुहर लगी।

भू-माफियाओं और अवैध बोरिंग पर लगाम
अवैध बोरिंग पर पूर्ण रोक. क्षेत्र में गिरते जलस्तर और प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण को देखते हुए यह निर्णय लिया गया कि बिना अनुमति के कोई भी नया बोरिंग कार्य नहीं किया जाएगा। प्रतिबंधित और दंडनीय होगा। भूमि बिक्री पर कड़ा नियंत्रण. भू-कानून की मांग के बीच धारकोट ग्राम सभा ने मिसाल पेश करते हुए तय किया है कि कोई भी भूमि स्वामी अपनी जमीन बेचने से पहले ग्राम पंचायत से अनिवार्य रूप से लिखित अनुमति लेगा। इससे अंधाधुंध भू-विक्रय पर लगाम लगेगी।

पारंपरिक रास्तों और जल स्रोतों की सुरक्षा हेतु बने सख्त नियम
अक्सर देखा गया है कि जमीन बिकने के बाद नए मालिक पारंपरिक रास्तों को बंद कर देते हैं। पंचायत ने प्रस्ताव पारित किया है कि बेची गई जमीन से गुजरने वाले किसी भी पुराने या पारंपरिक रास्ते को रोका नहीं जाएगा और ग्रामीण उनका उपयोग पूर्ववत करते रहेंगे।

बैठक के समापन पर उपस्थित प्रतिनिधियों ने कहा कि जल. जंगल. जमीन और अपने रास्तों के संरक्षण हेतु धारकोट ग्राम सभा सहित समस्त डांडा मंडल का यह निर्णय आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षा कवच साबित होगा। स्थानीय निवासियों का मानना है कि यदि समय रहते इस प्रकार के कड़े नियम नहीं बनाए गए. तो पहाड़ की संस्कृति और संसाधन खत्म हो जाएंगे। इस पहल की सराहना अब पूरे क्षेत्र में हो रही है. जिसे अन्य ग्राम सभाओं के लिए भी एक प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है।

सार्थकपहल.काम के लिए साभार- दिगम्बर सिंह चौहान ऊर्फ मस्त पहाड़ी निवासी ग्राम जामल

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